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भिलाई सिविक सेंटर मारपीट केस में बड़ा फैसला: कोर्ट ने हत्या के प्रयास से बरी किया, दो आरोपी साधारण मारपीट के दोषी – durg-bhilai News

भिलाई सिविक सेंटर मारपीट केस में बड़ा फैसला:  कोर्ट ने हत्या के प्रयास से बरी किया, दो आरोपी साधारण मारपीट के दोषी – durg-bhilai News

भिलाई के सिविक सेंटर में हुए चर्चित मारपीट मामले में एफटीसी कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अवध किशोर की अदालत ने आरोपी टी. प्रशांत और करण शाह को हत्या के प्रयास यानी धारा 307 के आरोप से बरी कर दिया है। दोनों को केवल साधारण मारपीट (धारा 323) का दोषी माना गया है। वहीं तीसरे आरोपी राहुल को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए पूरी तरह बरी कर दिया गया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह घटना हत्या के प्रयास का मामला नहीं, बल्कि शराब भट्ठी के सामने उपजा एक तात्कालिक विवाद था। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि हत्या की नीयत होती, तो चोटें इतनी साधारण क्यों होतीं। कोर्ट ने कहा- हत्या की नीयत नहीं थी अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला हत्या के प्रयास का नहीं, बल्कि शराब भट्ठी के सामने हुए अचानक विवाद का था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर हत्या की नीयत होती, तो चोटें इतनी साधारण क्यों होतीं। क्या था मामला यह घटना 9 अप्रैल 2023 की रात भिलाई सिविक सेंटर स्थित शराब भट्ठी क्षेत्र में हुई थी। शिकायतकर्ता मुकेश साहू ने आरोप लगाया था कि तीन युवकों ने रॉड और डंडे से हमला किया। लेकिन कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और नक्शों की जांच के बाद पाया कि मुकेश के सिर पर केवल साधारण चोट और कान के पास ब्लड क्लॉट था। मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिली गंभीर चोट अदालत ने कहा कि अगर जान से मारने की मंशा होती, तो चोटें गंभीर होतीं। सीटी स्कैन, एक्स-रे और अन्य मेडिकल रिपोर्ट में न कोई फ्रैक्चर मिला और न ही कोई जानलेवा चोट। फैसले में यह भी सामने आया कि शिकायत में घटना अपना सुपर बाजार के पास बताई गई थी, जबकि कोर्ट ने वास्तविक घटनास्थल शराब भट्ठी के सामने चखना सेंटर माना। पटवारी नक्शा, विवेचक का नजरी नक्शा और गवाहों के बयान इसी ओर इशारा करते हैं। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता ने अपनी मौजूदगी छिपाने की कोशिश की। शिकायतकर्ता पुलिस आरक्षक निकला मामले का अहम पहलू यह भी रहा कि शिकायतकर्ता मुकेश साहू खुद पुलिस आरक्षक हैं। कोर्ट ने नोट किया कि एफआईआर दर्ज कराते समय उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी नहीं बताया था। फैसले में यह भी दर्ज है कि मेडिकल दस्तावेजों और गवाहों से संकेत मिले कि वह नशे की हालत में थे। कोर्ट ने माना कि संभवतः विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए यह तथ्य छिपाया गया। राहुल बरी, दो आरोपी दोषी कोर्ट ने कहा कि राहुल के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। उसकी पहचान और संलिप्तता साबित नहीं हुई, इसलिए उसे बरी किया गया। वहीं प्रशांत और करण के खिलाफ मारपीट साबित हुई, इसलिए उन्हें धारा 323 में दोषी ठहराया गया। जितनी जेल काटी, उतनी सजा मानी सजा के मामले में अदालत ने मानवीय रुख अपनाया। प्रशांत पहले ही 99 दिन और करण 168 दिन जेल में रह चुके थे। कोर्ट ने इसे पर्याप्त मानते हुए दोनों को रिहा माना। पुलिस जांच पर भी उठे सवाल फैसले में पहचान परेड न कराने, गवाहों के बयानों में विरोधाभास, घटनास्थल की अलग तस्वीर और 307 जैसी गंभीर धारा लगाने पर भी अप्रत्यक्ष सवाल उठाए गए हैं। इस तरह हाई-प्रोफाइल 307 केस का अंत बिना अतिरिक्त जेल सजा के हो गया।



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