झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा रविवार को आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। राज्य के छह जिलों रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर और बोकारो में 430 केंद्रों पर लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन कई केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की कमी और प्रबंधन की लापरवाही ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। बोकारो के सेक्टर-9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल में शिक्षा विषय (कोड 09) के 32 प्रश्नपत्र कम पड़ गए, जबकि रांची के एएसटीवीएस जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में ओड़िया विषय (कोड 023) के प्रश्नपत्र पढ़ने योग्य नहीं थे। इन गंभीर गड़बड़ियों के कारण आयोग को दोनों विषयों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी। केंद्रों पर हंगामा, देरी से शुरू हुई परीक्षा रांची के एचईसी स्थित केराली स्कूल में भी स्थिति बिगड़ी रही, जहां 600 अभ्यर्थियों के लिए बनाए गए केंद्र पर 120 प्रश्नपत्र कम निकले। बायोमीट्रिक व्यवस्था का अभाव भी सामने आया। समय पर प्रश्नपत्र नहीं मिलने से अभ्यर्थियों ने हंगामा किया। केंद्र प्रबंधन द्वारा सूचना देने के बावजूद आयोग से तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। बाद में अनुपस्थित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र बांटकर किसी तरह परीक्षा शुरू कराई गई। निर्धारित समय सुबह 10 बजे के बजाय 11 बजे परीक्षा शुरू हुई और दोपहर 1 बजे के बजाय 2 बजे समाप्त हुई। बोकारो में भी अभ्यर्थियों को घंटों धूप में बैठाए रखा गया, लेकिन अंत तक प्रश्नपत्र नहीं पहुंचे, जिससे कई परीक्षार्थी बिना परीक्षा दिए लौट गए। प्रश्नपत्रों में त्रुटियां, गुणवत्ता पर उठे सवाल केवल प्रबंधन ही नहीं, प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता भी विवादों में रही। नागपुरी विषय के प्रश्नपत्र में अन्य भाषाओं जैसे कुड़ुख, संताली, मुंडारी और पंचपरगनिया से जुड़े प्रश्न पूछे गए, साथ ही व्याकरणिक और भाषागत अशुद्धियां भी सामने आईं। विशेषज्ञों ने इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। अंग्रेजी प्रश्नपत्र में भी गड़बड़ी सामने आई, जहां दो प्रश्न (संख्या 55 और 74) एक जैसे थे और एक प्रश्न में ‘डी’ विकल्प ही गायब था। ओड़िया विषय के प्रश्नपत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उसे रद्द करना पड़ा। इन त्रुटियों ने परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 17 साल बाद परीक्षा, फिर भी तैयारी अधूरी राज्य गठन के बाद वर्ष 2007 के बाद यह दूसरी बार जेट परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन इतने लंबे अंतराल के बावजूद आयोग की तैयारी अधूरी नजर आई। अभ्यर्थियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 17 साल बाद आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में भी ऐसी लापरवाही अस्वीकार्य है। परीक्षा रद्द होने से सैकड़ों अभ्यर्थियों पर मानसिक और आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने होंगे। साल 2007 में आयोजित पहली जेट परीक्षा भी विवादों में रही थी, जिसकी जांच अब तक सीबीआई कर रही है। ऐसे में इस बार की गड़बड़ियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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