हाड़ौती क्षेत्र में फरवरी के महीने में बढ़े तापमान के कारण लहसुन की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हुई है। इससे किसानों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अच्छी कीमत मिलने के बावजूद वे उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं कर पा रहे हैं। लहसुन की फसल से बेहतर आय की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सपनों पर मौसम की मार ने पानी फेर दिया है। उन्हें पर्याप्त भाव तो मिल रहा है, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे आर्थिक रूप से निराशा हाथ लग रही है। अकेले झालावाड़ जिले में ही करीब 25,000 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की जाती है। मंडियों में जोरदार आवक
हाड़ौती क्षेत्र की कृषि उपज मंडियों में इस साल लहसुन की जोरदार आवक बनी हुई है। देसी लहसुन 3,000 से 12,000 रुपए प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का लहसुन 5,000 से 15,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। हालांकि, बेहतर गुणवत्ता नहीं होने के कारण अन्य राज्यों और देशों में इसकी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ‘निर्यात के लायक नहीं रहा’
खानपुर कृषि मंडी लहसुन व्यापार संघ के अध्यक्ष बालचंद नागर ने बताया कि पैदावार प्रभावित होने से लहसुन निर्यात के लायक नहीं रहा है। इसी कारण बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति के लिए लहसुन की सभी प्रकार की गुणवत्ता मानकों को पूरा करना आवश्यक होता है। किसान संघ के प्रचार प्रमुख महेश मेहर ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि फरवरी माह के तापमान में वृद्धि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे लहसुन की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पहले की अपेक्षा बुवाई एरिया हुआ कम
फरवरी माह के दौरान तापमान में बढौत्तरी से लहसुन की औसत साइज नहीं बन पाई। इस कारण भी लहसुन के दामों में तेजी बनी हुई है। लेकिन डिमांड के अनुसार लहसुन नही है, ऐसे में किसान बाहर की उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन की पूर्ति नहीं कर पा रहे है। ऐसे में किसान को लहसुन से अच्छी कमाई नहीं हो रही है।
जबकि पिछले 6 सालों में इस साल 2025-26 में 26038 हेक्टेयर में बुवाई हुई है। जबकि 2023-24 में बुवाई केवल आधी रह गई थी। इस साल एक हेक्टेयर में बुवाई में औसतन करीब 5 क्विंटल लहसुन पैदावार हुई है,जबकि 10 से 12 क्विंटल होती तो अच्छा लाभ मिलता।
पिछले 6 साल में हेक्टेयर में लहसुन बुवाई पिछले साल से लहसुन का कम हुआ उत्पादन
किसान रामचरण का कहना है कि इस बार लहसुन की उपज पिछले वर्ष की अपेक्षा कम रही है। इस बार एक बीघा में 20 से 22 कट्टे निकल रहे हैं। जबकि पिछले वर्ष यह 25 से 26 कट्टे तक चला गया था। मंडियों में भी लहसुन का भाव न्यूनतम 2500 व अधिकतम 12500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बिकता लहसुन
दूसरी दुविधा यह है कि राजस्थान में आमतौर पर लहसुन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बिकता है। क्योंकि लहसुन केंद्र सरकार की घोषित एमएसपी वाली फसलों की सूची में लहसुन शामिल नहीं है। इसी कारण किसानों को मजबूरी के चलते कम भाव में ही लहसुन के बेचना पड़ेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि लहसुन की कटाई के बाद इसकी सार संभाल अच्छे से करनी होती है थोड़ी सी भी नमी या बहुत अधिक गर्मी लहसुन को खराब कर सकती है। इसीलिए भंडारण के समय भी इसे घरों पर कूलर या औसत तापमान में रखा जाता है। इस बार मिल रहे है औसत भाव
किसान और व्यपारी ने बताया कि इस बार किसानों को लहसुन के औसत भाव मिल रहे है। लहसुन के भाव 18 हजार रूपए प्रति क्विटल बोले जा रहे है। भाव की यह चमक केवल उच्च गुणवत्ता तक के लहसुन तक सीमित है। जबकि औसत भाव 10-11 हजार रुपए प्रति क्विंटल चल रहे है।
इससे किसानों के लिए लहसुन की फसल लाभकारी साबित हो रही है। उन्होने बताया कि भाव में तेजी की संभावना निर्यात पर निर्भर करती है। जिले में उठीं, शंकर आधी प्रमुख किस्मे है जिनकी बुवाई होती है।
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