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NCRB की रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में अपराध घटे, पर उसका स्वरूप बदल रहा, साइबर क्राइम 50% बढ़ा; महिलाओं के खिलाफ क्रूरता के 14 हजार से ज्यादा मामले – Raipur News

NCRB की रिपोर्ट:  छत्तीसगढ़ में अपराध घटे, पर उसका स्वरूप बदल रहा, साइबर क्राइम 50% बढ़ा; महिलाओं के खिलाफ क्रूरता के 14 हजार से ज्यादा मामले – Raipur News

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ भारत में अपराध 2024’ रिपोर्ट छत्तीसगढ़ में अपराध के बदलते ट्रेंड की तस्वीर सामने आई है। राज्य में तीन वर्षों में कुल अपराधों में मामूली गिरावट आई है, वहीं साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं।

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महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पति और रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता सबसे बड़ी श्रेणी बनकर उभरी है। रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार, बच्चों के खिलाफ अपराध और आर्थिक अपराधों में बड़ी संख्या में मामले अब भी अदालतों में लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल पंजीकृत अपराधों की संख्या लगातार कम हुई है। वर्ष 2022 में राज्य में 1,21,065 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में घटकर 1,15,493 रह गए।

वर्ष 2024 में यह संख्या और घटकर 1,14,658 हो गई। राज्य की अपराध दर 374.2 प्रति लाख आबादी रही। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने 86% मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किए हैं। आंकड़े संकेत देते हैं कि पारंपरिक अपराधों में कुछ कमी आई है, लेकिन अपराध का स्वरूप बदल रहा है।

2024 – छत्तीसगढ़ में अपराध

  • 1,14,658 – कुल अपराध राज्य में हुए
  • 660 – साइबर अपराध
  • 469 – ऑनलाइन धोखाधड़ी
  • 14,208 – महिलाओं के खिलाफ क्रूरता
  • 2,205 – दुष्कर्म के मामले
  • 2,231 – पीछा करने के मामले
  • 696 – दहेज हत्या व प्रताड़ना
  • 8,342 – आर्थिक अपराध लंबित
  • 47 – भ्रष्टाचार के मामले

महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सबसे ज्यादा मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के रहे। रिपोर्ट के अनुसार इस श्रेणी में कुल 14,208 मामले दर्ज किए गए। दुष्कर्म के 2,205 मामले दर्ज हुए, जबकि पीड़ित महिलाओं की संख्या 2,232 रही। पीछा करने के 2,231 और शीलभंग की नीयत से हमले के 1,668 मामले दर्ज हुए हैं।

एससी-एसटी अत्याचार में सजा कम अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में पुलिस ने 98.3% मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किया, लेकिन अदालतों में दोषसिद्धि दर केवल 20.9% रही। वहीं 94.5% मामले लंबित हैं। अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर 30.2% रही, जबकि 93.1% मामले अब भी पेंडिंग हैं।

आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार बढ़े राज्य में आर्थिक अपराधों के 1,459 मामलों में ट्रायल पूरा हुआ, लेकिन दोषसिद्धि दर केवल 26.7% रही। वर्ष के अंत तक 8,342 मामले अदालतों में लंबित थे। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कुल 47 मामले सामने आए। इनमें 44 ट्रैप केस यानी रिश्वत लेते पकड़े जाने के और 3 आय से अधिक संपत्ति के मामले शामिल हैं।

साइबर अपराध

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2022 में 439 मामले दर्ज हुए थे। 2023 में यह संख्या 473 पहुंची और 2024 में बढ़कर 660 हो गई। राज्य में साइबर अपराध दर 2.2 प्रति लाख आबादी है। सबसे ज्यादा 469 मामले कंप्यूटर के जरिए धोखाधड़ी के दर्ज हुए।

बच्चों के खिलाफ अपराध

छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ अपराध के 3,094 मामलों में ट्रायल पूरा हुआ। इनमें दोषसिद्धि दर 23.9% रही, जबकि 87.6% मामले लंबित हैं। रिपोर्ट संकेत देती है कि बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई और मजबूत कानूनी प्रक्रिया की जरूरत बनी हुई है।

एक्सपर्ट व्यू – आरके विज, रिटायर्ड डीजी

साइबर क्राइम से लड़ाई में संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती, थानों में स्टॉफ नहीं

पूरे देश में साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं, लेकिन जिस अनुपात में उनसे निपटने के लिए संसाधनों की जरूरत है, उस गति से संसाधन नहीं बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में नए साइबर थाने जरूर खोले जा रहे हैं, पर उनमें पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से साइबर अपराधों की जांच प्रभावित होती है।

कई बार अधिकारी साइबर अपराध दर्ज करने के बजाय शिकायतों को जांच में रख लेते हैं। इस दिशा में सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है। साइबर अपराध की जांच में विशेषज्ञता विकसित करनी होगी और रुचि रखने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के लिए पुलिस को स्कूलों और कॉलेजों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए।



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