भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु का स्लैब टूटने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। शनिवार सुबह महादेवपुर गंगा घाट पर भारी भीड़ देखने को मिली। भागलपुर जाने के लिए सब्जी विक्रेता, दूध कारोबारी, नौकरीपेशा और दैनिक यात्री नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर नजर आए। घाट पर अन्य दिनों की तुलना में नावों की संख्या कम थी, जिससे यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान घाट पर आपदा मित्र, पुलिस बल और एसडीआरएफ की टीम यात्रियों की सुरक्षा में लगी हुई थी। माइक से लगातार नाविकों को लाइफ जैकेट पहनने और नाव पर क्षमता से अधिक यात्रियों को नहीं बैठाने की घोषणा की जा रही थी। इसके बावजूद अधिकांश नावों पर सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी दिखी। कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के ही सफर करते नजर आए। नाव से आने जाने में खर्च भी बढ़ रहा है इस्माइलपुर दियारा के दूध कारोबारी सुनील यादव ने बताया कि पहले विक्रमशिला पुल के रास्ते आसानी से भागलपुर पहुंच जाते थे, लेकिन अब नाव के सहारे सफर करना पड़ रहा है। रोजाना नाव भाड़े में करीब 200 रुपए खर्च हो रहे हैं, जबकि बाइक में पेट्रोल का खर्च अलग से लग रहा है। यात्रा में एक घंटे से अधिक समय लग जाता है, जिससे होटल संचालक भी देर होने पर शिकायत करते हैं। सब्जी विक्रेता छोटू कुमार ने बताया कि रोजाना भिंडी, कद्दू और झींगा लेकर तिलकामांझी चौक जाते हैं। नावों की कमी के कारण काफी परेशानी हो रही है। सरकारी नाव का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन वह समय पर नहीं आती। शाम पांच बजे के बाद नाव का परिचालन बंद हो जाता है। भाड़ा और पेट्रोल खर्च में ही अधिकांश कमाई खत्म हो जा रही है। लोगों में डर का माहौल दैनिक यात्री अरविंद साह ने नावों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नावें छोटी होने के कारण डर बना रहता है। बाइक चढ़ाने और उतारने के दौरान हादसे की आशंका बनी रहती है। अधिकांश लोग बिना लाइफ जैकेट के सफर कर रहे हैं, जिससे यात्रियों में भय का माहौल बना हुआ है।
Source link
