चंडीगढ़ की सड़कों पर अब डीजल नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी। शहर को इसी साल 328 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं, जिसके लिए केंद्र सरकार ने टेंडर जारी कर दिया है। पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि चंडीगढ़ में सभी बसें इलेक्ट्रिक हों, ताकि प्रदूषण के संकट को कम किया जा सके। सप्ताह में एक दिन लोग सरकारी बस या साइकिल का प्रयोग करें। इसकी शुरुआत अधिकारियों से की जाएगी। अभी तक हम सुझाव ले रहे है। नई बसें चलाने के साथ ही प्रशासन ऐसा सिस्टम तैयार करने जा रहा है, जिससे सभी बसों पर एक समय में नजर रखी जा सके। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। यात्री टिकट से जुड़ी समस्या या अन्य किसी परेशानी की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। बसें चलाने मुनाफे का सौदा नहीं प्रशासक मानते बसें मुनाफे का सौदा नहीं, बल्कि एक सेवा हैं। फिर भी कोशिश की जा रही है कि खर्च की पूर्ति हो सके। कुल 428 बसें (100 बसे पहले मंजूर हुई) प्रति किलोमीटर योजना के तहत मिल रही हैं। यह 62 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन यह आकलन कर रहा है कि कितना राजस्व प्राप्त हो सकता है और केंद्र सरकार से कितनी सहायता मिलेगी। साथ ही लोगों को बेहतर सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है। जून में 40 बसें मिलेंगी पिछले दो महीनों में चंडीगढ़ प्रशासन ने 100 बसों को कंडम घोषित किया है, क्योंकि उनकी समय सीमा पूरी हो चुकी थी। इससे लंबी दूरी के रूट प्रभावित हुए। इसी क्रम में 7 तारीख को 40 बसें मिली हैं। अब तक कुल 60 बसें मिल चुकी हैं, जबकि 40 और बसें जून में मिलेंगी। 15 साल पहले खरीदी गई थी बसें चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) ने हाल ही में अपनी 180 से अधिक डीजल बसों को कंडम घोषित कर दिया है, जिनमें से 85 बसें नवंबर 2025 तक और करीब 95-100 बसें हाल के महीनों में हटाई गई हैं। ये बसें मुख्य रूप से वर्ष 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान खरीदी गई थीं, जिन्होंने अपनी 15 साल की निर्धारित समय-अवधि पूरी कर ली है।
Source link
