हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में 15 दिन पहले हुए एक दर्दनाक हादसे ने आज एक मासूम की जान ले ली। निर्माणाधीन भवन से गिरी ईंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुए नौवीं कक्षा के छात्र ने आईजीएमसी (IGMC) अस्पताल के आईसीयू में दम तोड़ दिया। इस खबर के बाद पूरे क्षेत्र और स्कूल में शोक की लहर दौड़ गई है। इस मामले में भवन मालिक शांता लाल चोपड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया यह दुखद घटना 29 अप्रैल को संजौली पुरानी पुलिस चौकी के पास हुई थी। 14 वर्षीय छात्र स्कूल की छुट्टी के बाद समिट्री स्थित अपने घर की ओर पैदल जा रहा था। इसी दौरान एक निर्माणाधीन भवन की ऊपरी मंजिल से अचानक एक ईंट सीधे उसके सिर पर जा गिरी। स्थानीय लोगों ने लहूलुहान हालत में छात्र को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहाँ पिछले दो हफ्तों से विशेषज्ञ डॉक्टर उसे बचाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन गहरी चोट के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी पुलिस की प्रारंभिक जांच में भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच के अनुसार निर्माणाधीन स्थल पर जाली (Safety Net) या अन्य सुरक्षा कवच नहीं लगाए गए थे। भीड़भाड़ वाले रास्ते पर निर्माण कार्य के बावजूद राहगीरों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया। पुलिस ने अब निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार और संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। स्कूल में अवकाश और स्थानीय लोगों का रोष छात्र की मौत के बाद स्कूल प्रबंधन ने गहरा दुख व्यक्त किया है और सम्मान स्वरूप अगले दिन स्कूल में अवकाश घोषित किया है। वहीं, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी रोष प्रकट किया है। लोगों का आरोप है कि शहर में कई जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिससे आए दिन राहगीरों की जान को खतरा बना रहता है। प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग शिमला पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। यह मकान शांता लाल चोपड़ा का है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मामले में भवन मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस हादसे ने एक बार फिर नगर निगम और प्रशासन द्वारा निर्माण कार्यों के दौरान दी जाने वाली सुरक्षा अनुमतियों और उनकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनता ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस लागू की जाएं।
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