लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा सोमवार को साक्षरता निकेतन, कानपुर रोड में शिक्षक गरिमा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना था। साथ ही, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शिक्षकों और समन्वयकों को सम्मानित किया गया। इसमें 70 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों और समन्वयकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र के सस्वर गायन, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुईं । वरिष्ठ गायत्री परिजन अरुण श्रीवास्तव ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की अवधारणा और उसके उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा यह परीक्षा वर्ष 1980 से आयोजित की जा रही है, जिसमें कक्षा 5 से लेकर परास्नातक तक के विद्यार्थी शामिल होते हैं। पिछले दो वर्षों से विद्यार्थियों की सहभागिता के मामले में लखनऊ जिला पूरे उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। शिक्षा के बदलते स्वरूप पर चर्चा दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन सिंह ने शिक्षा के बदलते स्वरूप और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. बीसी यादव ने गायत्री मंत्र की वैज्ञानिकता पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. पंकज भारती ने दैनिक जीवन में छोटे बदलावों के माध्यम से स्वस्थ जीवन अपनाने के उपाय सुझाए। योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह योग, नैचुरोपैथी एवं होलिस्टिक हेल्थ विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने बताया कि प्राचीन यौगिक अभ्यास मन और मस्तिष्क पर सकारात्मक वैज्ञानिक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। ये मौजूद रहे समारोह के समापन पर विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और समन्वयकों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान डॉ. बीसी यादव, गायत्री परिवार ट्रस्ट आलमबाग के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी डॉ. एसएन सचान और समन्वयक अनिल तिवारी द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन जीएस शर्मा ने किया। इस अवसर पर जीएस गुप्ता, राहुल मिश्रा, एचआर मौर्य और नीरज श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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