स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत, कुदरा नगर पंचायत की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नगर पंचायत कुदरा शहर के कचरे को सुरक्षित निस्तारित करने के बजाय, इसे नगर के सीमावर्ती कझार घाट नदी पुल के पास मुख्य सड़क किनारे डंप कर रही है। कचरे के इस विशाल ढेर से उठने वाली दुर्गंध से राहगीर और स्थानीय ग्रामीण परेशान हैं। यह डंपिंग यार्ड एक प्राथमिक विद्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे वहां पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं सांस लेने में तकलीफ पैदा कर रहा है। कचरे का नहीं हो रहा उचित प्रबंधन ग्रामीणों ने बताया कि नगर पंचायत कूड़ा उठाव और उसके निस्तारण पर प्रतिमाह लगभग 18 लाख रुपए खर्च करती है। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है और कचरे का उचित प्रबंधन नहीं हो रहा है। एक ओर जिला प्रशासन पराली जलाने वाले करीब पौने दो लाख किसानों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुले में कचरा जलाकर वायु प्रदूषण फैलाने वाली नगर पंचायत पर प्रशासन मौन है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कचरे का सही जगह निस्तारण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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