सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 427 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह राजमार्ग को 42 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार को बहाल कर दिया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह मार्ग अब वाहनों की आवाजाही के लिए तैयार है, हालांकि लाहौल स्पीति जिला प्रशासन की अनुमति का इंतजार है। बारालाचा दर्रे पर लेह की ओर से प्रोजेक्ट हिमांक के कमांडर कर्नल सारत और मनाली की ओर से प्रोजेक्ट दीपक की 38 बीआरटीएफ के कमांडर कर्नल गौरव बंगारी ने दर्रे के दोनों छोर खुलने पर ‘गोल्डन हैंडशेक’ किया। सरचू में भी दोनों परियोजनाओं के अधिकारियों ने एक-दूसरे का स्वागत किया। बारालाचा दर्रे को बहाल करने की चुनौती पार बीआरओ ने 27 मार्च को इस मार्ग की बहाली का कार्य शुरू किया था। कर्नल गौरव बंगारी ने बताया कि 42 दिनों में यह सफलता मिली, हालांकि इस दौरान बर्फबारी के कारण काम को छह बार रोकना पड़ा। जवानों ने माइनस तापमान में काम करते हुए 16040 फीट ऊंचे बारालाचा दर्रे को बहाल करने की चुनौती को पार किया। मनाली से सरचू तक 26 हिमस्खलन बिंदु भी बीआरओ के लिए बड़ी चुनौती थे। पर्यटक इस मार्ग पर आसानी से सफर कर सकेंगे कर्नल बंगारी ने बताया कि सड़क तो बहाल हो गई है, लेकिन वाहनों की आवाजाही को हरी झंडी लाहौल स्पीति प्रशासन के साथ बैठक करने के बाद ही दी जाएगी। प्रशासन जल्द ही पर्यटकों और सामान्य वाहनों के लिए मार्ग को खोल देगा जिससे पर्यटक इस मार्ग पर आसानी से सफर कर सकेंगे । सैन्य अफसरों ने बीआरओ जवानों की पीठ थपथपाई यह कार्य ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट कर्नल तेजस मौर्या और कैप्टन साजे की देखरेख में पूरा हुआ। कर्नल गौरव ने हिमस्खलन वाले क्षेत्रों में सुरक्षित और रणनीतिक तरीके से काम करने के लिए सभी बीआरओ जवानों के हौसले और कार्य की सराहना की।
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