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रालामंडल का 100 मीटर दायरा अब ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’: चीतल, सांभर, नीलगाय की संख्या 500 पार, पुराने निर्माण का क्या होगा यह स्थानीय समिति तय करेगी – Indore News

रालामंडल का 100 मीटर दायरा अब ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’:  चीतल, सांभर, नीलगाय की संख्या 500 पार, पुराने निर्माण का क्या होगा यह स्थानीय समिति तय करेगी – Indore News


इंदौर7 मिनट पहले

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रालामंडल में चीतल, सांभर, कृष्ण मृग (ब्लैकबग), नीलगाय की संख्या 500 से अधिक हो गई है। अन्य जंगली जानवरों का कुनबा भी यहां खूब पनप रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रालामंडल को बचाने के लिए 100 मीटर का दायरा तय होने जा रहा है।

रालामंडल के चारों तरफ 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। पहले जो निर्माण हो चुका है, उसका क्या होगा? यह संभागायुक्त, कलेक्टर, डीएफओ की समिति तय करेगी। 100 मीटर का दायरा तय करने की जिम्मेदारी निजी कंसल्टेंट फर्म को सौंपी गई है।

डीएफओ लाल सुधाकर सिंह के मुताबिक बीच शहर में 247 हेक्टेयर के इस अभयारण्य को संरक्षित करने की दिशा में 100 मीटर का दायरा तय किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के अभयारण्य को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ईको सेंसेटिव जोन तय करने के निर्देश दिए थे।

कई सेंचुरी में 1 से 10 किमी तक का दायरा तय किया गया है। रालामंडल के आसपास पहले से गांव, बसाहट है, इसलिए यहां 100 मीटर का दायरा तय किया गया है। रालामंडल का सीमांकन पहले ही किया जा चुका है। इस सीमांकन के हिसाब से ईको सेंसेटिव जोन तय किया जाएगा।

पहले डियर सफारी बन चुका है रालामंडल में 70 एकड़ से अधिक खाली जमीन को 10 साल पहले डियर सफारी एरिया बनाने के रूप में शामिल किया गया था। इस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा था। रालामंडल का दायरा बढ़ाकर यहां पहले तार फेंसिंग की गई। घास उगाई गई। पहाड़ी पर रहने वाले चीतल, सांभर, ब्लैक बग को मैदान के रूप में जगह मिली। इस एरिया में बैटरी कार से पर्यटकों को करीब से जंगली जानवर दिखाए जाते हैं।

बूढ़ा तालाब को दोबारा संवारने की जरूरत विभाग ने रालामंडल में मनोरंजन की सुविधाएं बढ़ाने के लिहाज से बायपास के करीब बूढ़ा तालाब नामक जगह को विकसित किया था। गार्डन, तालाब को विकसित किया था। नक्षत्र वाटिका भी बनाई थी। बैठने के लिए बेंच, हट भी बनाई थी। देशभर से आम की विभिन्न प्रजातियां लाकर लगाई थीं, लेकिन यह स्थान कभी शुरू ही नहीं हो पाया। खास बात यह है कि इस पर 1 करोड़ रुपए तक खर्च कर दिए थे। इसे दोबारा संवारने की जरूरत है।

इंदौर की सेहत और पर्यावरण के लिए ‘लाइफ-सपोर्ट सिस्टम’ है रालामंडल

  1. शहर का ‘ऑक्सीजन चैंबर’: कांक्रीट के जंगल बनते जा रहे इंदौर के बीच 247 हेक्टेयर का यह घना जंगल शहर के प्रदूषण को सोखने और ताजी हवा (ऑक्सीजन) देने का सबसे बड़ा स्रोत है।
  2. तापमान नियंत्रण : रालामंडल की हरियाली इंदौर के बढ़ते तापमान को कम करने में मदद करती है। यह शहर के लिए एक ‘नेचुरल एयर कंडीशनर’ की तरह काम करता है।
  3. वाटर रिचार्ज पॉइंट : रालामंडल की पहाड़ी और उसका वन क्षेत्र बारिश के पानी को जमीन के भीतर उतारने में बड़ी भूमिका निभाता है, जिससे आसपास के इलाकों का जलस्तर बना रहता है।
  4. जैव विविधता का संरक्षण : यहां 500 से अधिक चीतल, सांभर और दुर्लभ कृष्ण मृग मौजूद हैं। यह शहर की अगली पीढ़ी को प्रकृति और वन्यजीवों से जोड़ने का एकमात्र नजदीकी केंद्र है।
  5. प्रदूषण और शोर से राहत : बायपास पर शोर-शराबे वाले ट्रैफिक और धूल के बीच रालामंडल एक ‘बफर जोन’ की तरह काम करता है, जो शहर को धूल के गुबार से बचाता है।



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