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झारखंड के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह का निधन: राज्यपाल-सीएम ने बताया अपूरणीय क्षति, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार – Bokaro News

झारखंड के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह का निधन:  राज्यपाल-सीएम ने बताया अपूरणीय क्षति, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार – Bokaro News


झारखंड के पूर्व मंत्री और गोमिया विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ नेता माधव लाल सिंह का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से गंभीर हालत में रां

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रांची के पल्स अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही गोमिया समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

सीएम ने पूर्व मंत्री स्व माधव लाल सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।

राज्यपाल-सीएम ने जताया शोक

पूर्व विधायक माधव लाल के निधन पर सीएम हेमंत सोरेन के शोक जताया है। उन्होंने अपने X हेंडल पर लिखा गोमिया से पूर्व विधायक, एकीकृत बिहार सरकार एवं राज्य गठन के बाद झारखंड सरकार में मंत्री रहे आदरणीय माधव लाल सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने लंबे समय तक जनसेवा और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

स्व माधव बाबू का निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। मरांग बुरु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को यह दुःख की घड़ी सहन करने की शक्ति दे। उन्होंने पूर्व मंत्री स्व माधव लाल सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।

वहीं राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शोक जताते हुए कहा कि झारखंड के पूर्व मंत्री एवं गोमिया के पूर्व विधायक माधव लाल सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने जनसेवा एवं राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।

स्व माधव बाबू का निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।

स्व माधव बाबू का निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।

चार बार विधायक रहे, जननेता के रूप में बनाई पहचान

माधव लाल सिंह गोमिया विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने अविभाजित बिहार और बाद में झारखंड सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। लंबे समय तक वे क्षेत्रीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।

उनकी पहचान एक ईमानदार और जमीनी जननेता के रूप में थी, जो हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने विकास कार्यों के साथ-साथ जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई और लोगों के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखी।

दशकों तक राजनीति में रहा प्रभाव

गोमिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर उनका प्रभाव कई दशकों तक कायम रहा। वर्ष 1977 से 2014 तक गोमिया की राजनीति मुख्य रूप से माधव लाल सिंह और छत्रुराम महतो के इर्द-गिर्द घूमती रही।

उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन का नेतृत्व किया और जनता की आवाज को मजबूती से उठाया।

उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन का नेतृत्व किया और जनता की आवाज को मजबूती से उठाया।

इस दौरान उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन का नेतृत्व किया और जनता की आवाज को मजबूती से उठाया। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। क्षेत्र के लोगों के बीच वे एक सहज, सुलभ और संघर्षशील नेता के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।

निर्दलीय चुनाव लड़ दिखाई माधो लहर

गोमिया विधानसभा की राजनीति में वर्ष 1977 से 2014 तक मुख्य रूप से दो नेताओं, माधव लाल सिंह और छत्रुराम महतो का दबदबा रहा। माधव लाल सिंह ने 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर “माधो लहर” के साथ अपनी पहचान बनाई और दिग्गज नेताओं को हराकर राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कई बार निर्दलीय और विभिन्न दलों के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की।

वर्ष 2000 में जीत के बाद वे अविभाजित बिहार में पर्यटन मंत्री बने और बाद में झारखंड में परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 2000 में जीत के बाद वे अविभाजित बिहार में पर्यटन मंत्री बने और बाद में झारखंड में परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 2000 में जीत के बाद वे अविभाजित बिहार में पर्यटन मंत्री बने और बाद में झारखंड में परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि राजनीतिक जीवन में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा, लेकिन जनसंघर्ष और आम जनता से जुड़े मुद्दों के कारण उनकी लोकप्रियता कायम रही। उनकी सादगी और जमीनी जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही, जिसने उन्हें दशकों तक गोमिया की राजनीति का केंद्रीय चेहरा बनाए रखा।



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