मंत्री कृष्णा गौर ने संबंधित अधिकारियों की बैठक ली।
भोपाल के अयोध्या बायपास के 16 किलोमीटर लंबे 10 लेन प्रोजेक्ट में सीवेज लाइन को लेकर नगर निगम और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के बीच चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है।
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मंत्री कृष्णा गौर ने दोनों विभागों के अधिकारियों को बुलाया और बातचीत की। इसके बाद भी दोनों विभाग गलती मानने को तैयार नहीं थे। मंत्री के सामने ही एनएचएआई और निगम अधिकारियों में जमकर बहस हुई।
करीब आधे घंटे चली बैठक में मंत्री कृष्णा गौर ने अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा, क्या यह भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर है?
सड़क जनता के लिए है, और अगर विभाग आपस में लड़ेंगे तो परेशानी जनता को ही होगी। दोनों एजेंसी साथ में काम करें और समस्या का समाधान निकले।
बहस के बाद दायरा बढ़ाया, अब 3 तरीके से डलेगी लाइन शुरुआत में एनएचएआई ने नियमों का हवाला देते हुए सड़क के दोनों तरफ 33-33 मीटर के दायरे के बाहर सीवेज लाइन बिछाने की शर्त रखी थी।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद एनएचएआई ने निगम को सीवेज लाइन के लिए दोनों तरफ 4-4 मीटर जगह दी है। इसके तीन विकल्प निकाले गए हैं।
‘सख्ती’ वाले पत्र पर निगम की आपत्ति इससे पहले निगम ने एनएचएआई के जारी उस पत्र पर आपत्ति जताई थी जिसमें ‘सख्ती से निर्देशों के पालन’ की भाषा का उपयोग किया गया था। निगम का तर्क था कि लोकहित के कार्यों में ऐसी भाषा का स्थान नहीं होनी चाहिए। मंत्री के निर्देश के बाद अब दोनों टीमें समन्वय के साथ काम करेंगी।
…तो दोबारा खोदना पड़ती नई सड़कें इस सीवेज लाइन के न बनने से 5 लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हो रही थी। भानपुर में बन रहा शहर का सबसे बड़ा 60 एमएलडी का एसटीपी भी इसी नेटवर्क पर निर्भर है। यदि समाधान न निकलता, तो भविष्य में नई बनी सड़कों को फिर से खोदना पड़ता, जिससे जनता के करोड़ों रुपए बर्बाद होते।
