टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स को FY26 की चौथी तिमाही में ₹1,793 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹1,340 करोड़ का मुनाफा हुआ था। यानी सालाना आधार पर कंपनी का मुनाफा 33.8% बढ़ा है। यह ग्रोथ बिक्री में बढ़ोत्तरी और बेहतर मार्जिन की वजह से मिली है। चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 19.3% बढ़कर 26,098 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की सामान तिमाही में यह 21,863 करोड़ रुपए रहा था। मुनाफे में आई इस तेजी को देखते हुए बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स के लिए 4 रुपए प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है। FY26 की चौथी तिमाही में टाटा मोटर्स CV का मुनाफा 33% बढ़ा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। Q4 में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं टाटा मोटर्स ने चौथी तिमाही में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले 25% ज्यादा हैं। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कुल बिक्री 14% बढ़कर 4.28 लाख यूनिट रही। घरेलू बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी (VAHAN मार्केट शेयर) 35.7% रही। इसमें हैवी कमर्शियल व्हीकल (HCV) सेगमेंट में कंपनी का दबदबा सबसे ज्यादा 55% रहा। इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए कंपनी ने इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए हैं। इसके अलावा भारत के नए लेबर कोड लागू होने की वजह से ग्रेच्युटी और अन्य प्रावधानों में बदलाव का असर भी वित्तीय नतीजों पर दिखा है। मार्च तिमाही में इसके चलते 214 करोड़ रुपए का नेट रिवर्सल दर्ज किया गया, जिसे अनुमानों में बदलाव के तौर पर दिखाया गया है। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। यहां, टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर जैसी 100 से ज्यादा सब्सिडियरी और एसोसिएट कंपनियां हैं। इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कॉन्सोलिडेटेड कहा जाएगा। वहीं, अगर जगुआर लैंड रोवर के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा। क्या होता है EBITDA और EBIT? EBITDA: इसका मतलब है- अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमोरटाइजेशन। यह बताता है कि ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले कंपनी ने अपने मुख्य कामकाज से कितना कमाया। EBIT: इसे ‘ऑपरेटिंग प्रॉफिट’ भी कहते हैं। यह कंपनी के कामकाज से होने वाली कुल कमाई को दर्शाता है, जिसमें से केवल ब्याज और टैक्स को नहीं घटाया गया होता। नेट कैश पॉजिटिव: जब किसी कंपनी के पास उसके कुल कर्ज (डेट) से ज्यादा कैश या निवेश मौजूद हो, तो उसे नेट कैश पॉजिटिव कहा जाता है।
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