लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व से वन्यजीवों का एक दुर्लभ और रोमांचक दृश्य सामने आया है। जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों ने बाघ और जंगली भालू के आमने-सामने आने का वीडियो अपने कैमरों में कैद कर लिया। पर्यटक दुधवा के जंगल में सफारी के दौरान कच्चे रास्ते से गुजर रहे थे। तभी अचानक रास्ते के बीचों-बीच एक बाघ दिखाई दिया। पर्यटक अभी इस दृश्य को देख ही रहे थे कि सामने से एक जंगली भालू भी वहां पहुंच गया। आमतौर पर जंगल में दूसरे जानवर बाघ की मौजूदगी भांपते ही दूरी बना लेते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी। भालू ने पीछे हटने के बजाय दी चुनौती वीडियो में देखा जा सकता है कि भालू बाघ को देखकर पीछे हटने के बजाय उसके सामने डट गया। वह अपनी पिछली टांगों पर खड़ा होकर खुद को बड़ा दिखाने लगा और लगातार बाघ को चुनौती देता नजर आया। कुछ देर तक दोनों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा। जंगल के दो ताकतवर वन्यजीव आमने-सामने थे और पर्यटक पूरे घटनाक्रम को करीब से देख रहे थे। बाघ का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय इस पूरे घटनाक्रम में बाघ का शांत व्यवहार सबसे ज्यादा चर्चा में है। भालू के आक्रामक रुख के बावजूद बाघ ने कोई हमला नहीं किया और पूरे समय संयम के साथ अपनी जगह पर खड़ा रहा। काफी देर तक चली इस स्थिति के बाद भालू धीरे-धीरे पीछे हट गया और जंगल की ओर लौट गया। दुधवा में 172 बाघ और 182 भालू 2025 के वन्यजीव आंकड़ों के अनुसार दुधवा नेशनल पार्क में 172 बाघ और 182 भालू मौजूद हैं। जंगली भालू आमतौर पर एकांतप्रिय और इंसानों से दूर रहने वाले जीव माने जाते हैं। वे खतरा महसूस होने, बच्चों की रक्षा करने या भोजन के आसपास होने पर ही आक्रामक होते हैं। तराई के जंगल की अलग पहचान दुधवा का जंगल करीब 490 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस जंगल में साल और साखू के ऊंचे-ऊंचे घने पेड़ हैं। यहां बड़े-बड़े घास के मैदान हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘फांटा’ कहा जाता है। यही मैदान हिरण और बारहसिंगा जैसे जानवरों का पसंदीदा ठिकाना हैं। सुहेली और मोहाना जैसी नदियां इस जंगल से होकर गुजरती हैं। इनके चलते यहां दलदली इलाके, तालाब और झीलें हमेशा पानी से भरी रहती हैं। बाघ, गैंडा और बारहसिंगा सबसे बड़े आकर्षण दुधवा जैव विविधता के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है। यहां 135 से ज्यादा बंगाल टाइगर खुले जंगल में घूमते हैं। इसके अलावा असम के काजीरंगा से लाए गए एक सींग वाले गैंडों को भी यहां सफलतापूर्वक बसाया गया है। अब उनकी संख्या 50 से ज्यादा हो चुकी है। दुधवा बारहसिंगा के लिए भी खास पहचान रखता है। दुनिया में पाए जाने वाले बारहसिंगों का बड़ा हिस्सा यहीं के दलदली घास के मैदानों में रहता है।
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