शिमला रामपुर शहर के ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर के सामने स्थित सार्वजनिक विश्राम स्थल इन दिनों अपनी बदहाली और अव्यवस्था पर आंसू बहा रहा है। जिस स्थान को बुजुर्गों के बैठने और थके-हारे राहगीरों के विश्राम के लिए बनाया गया था, वह अब पूरी तरह से अवैध कब्जे की
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सुविधा बनी दुविधा: कारोबार का अड्डा बना विश्राम स्थल
स्थानीय नागरिक विनय शर्मा ने बताया कि नगर परिषद ने इस स्थल को विशेष रूप से सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों के लिए विकसित किया था। यहाँ लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगाए गए थे ताकि वे सुकून के कुछ पल बिता सकें। लेकिन, वर्तमान में ्थिति इसके उलट है। यहाँ अवैध रूप से सामान जमा किया जा रहा है और यह स्थान धीरे-धीरे व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है, जिससे आम जनता का यहाँ बैठना दूभर हो गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर लोगों ने संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है:
विभागीय निष्क्रियता: अवैध कब्जे की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
अव्यवस्था का डर: नागरिकों को डर है कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो शहर के अन्य पार्क और सार्वजनिक स्थल भी इसी तरह भू-माफिया या अवैध कब्जाधारियों की भेंट चढ़ जाएंगे।
प्रशासन और नगर परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
रामपुर के प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि:
विश्राम स्थल को तुरंत अवैध कब्जे से मुक्त करवाया जाए।
यहाँ रखे गए अतिरिक्त सामान को हटाकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
इसे पुनः बुजुर्गों और यात्रियों के लिए व्यवस्थित कर बैठने योग्य बनाया जाए।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि शहर की सुंदरता और सार्वजनिक सुविधाओं को सुरक्षित रखना प्रशासन और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस जन समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेती है।
