झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे के सिंगनोर गांव में गुरुवार को सीआरपीएफ जवान ओमप्रकाश मीणा का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तीन दिन पहले ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था। ड्यूटी के दौरान आया हार्ट अटैक बता दे कि मंगलवार शाम को ओडिशा में ड्यूटी के दौरान ओमप्रकाश मीणा को हार्ट अटैक आया था। जिससे उनका निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर गुरुवार को गुढ़ा पुलिस स्टेशन पहुंचा। गुढ़ा पुलिस स्टेशन से हजारों की संख्या में लोग तिरंगा बाइक रैली के साथ उनके पैतृक गांव सिंगनोर पहुंचे। गांव में शोक की लहर थी और घर पर गमगीन माहौल था। इस दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, ओमप्रकाश तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारे लगाए गए। पार्थिव शरीर के साथ आई सीआरपीएफ की टुकड़ी और 55वीं बटालियन आरएएफ जयपुर ने गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी दी। ओमप्रकाश मीणा अपने पीछे पत्नी अनुराधा, एक बेटी और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनकी बूढ़ी दादी पतासी देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। ओमप्रकाश चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके पिता मक्खन लाल मीणा का छोटी उम्र में ही देहांत हो गया था। 2011 में सेना में भर्ती हुए थे ओमप्रकाश मीणा साल 2011 में अजमेर में आयोजित चयन प्रक्रिया के दौरान कॉन्स्टेबल पद पर सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनकी बेसिक ट्रेनिंग आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी, हैदराबाद में हुई थी। पहली पोस्टिंग उन्हें 41वीं बटालियन भोपाल में मिली थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2016 से 2021 तक श्रीनगर में सेवाएं दीं। वर्तमान में वे ओडिशा में 127वीं बटालियन में कॉन्स्टेबल जीडी पद पर कार्यरत थे। करीब चार महीने पहले ही उन्होंने हवलदार पद के लिए प्रशिक्षण कोर्स भी पूरा किया था। ओमप्रकाश गांव में युवाओं को हमेशा देश प्रेम की भावना के लिए प्रेरित करते थे। वे हर साल एक जनवरी को गांव में शहीदों के सम्मान में आयोजित होने वाली तिरंगा यात्रा में भी सक्रिय रूप से शामिल होते थे।
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