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अखंड सुहाग के लिए महिलाएं आज करेंगी वट सावित्री व्रत: भरणी-कृत्तिका नक्षत्र सहित सौभाग्य योग का संयोग, महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर सुनेंगी सत्यवान-सावित्री कथा – Patna News

अखंड सुहाग के लिए महिलाएं आज करेंगी वट सावित्री व्रत:  भरणी-कृत्तिका नक्षत्र सहित सौभाग्य योग का संयोग, महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर सुनेंगी सत्यवान-सावित्री कथा – Patna News

अखंड सुहाग की कामना से सुहागिन महिलाएं आज वट सावित्री का व्रत करेंगी। आज भरणी और कृत्तिका नक्षत्र का युग्म संयोग के साथ सौभाग्य योग बन रहा है। महिलाएं वट सावित्री की पूजा कर वट वृक्ष की परिक्रमा करने के बाद पौराणिक कथा सुनेंगीं। आज शनिवार को अमावस्या होने से शनैश्चरी अमावस्या का पुण्यकारी संयोग बन रहा है। वट वृक्ष में ब्रह्मा, शिव, विष्णु व देवी सावित्री विराजमान रहती है। वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त अमावस्या तिथि: देर रात 01:44 बजे तक सौभाग्य योग मुहूर्त: सुबह 10:13 बजे तक शुभ योग मुहूर्त: सुबह 06:45 बजे से 08:26 बजे तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:19 बजे से 12:13 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 11:46 बजे से शाम 04:47 बजे तक सुहागिनों को अखंड सुहाग का मिलता है आशीर्वाद – ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, ‘स्कन्द पुराण के अनुसार वट सावित्री का व्रत, पूजा और परिक्रमा के बाद भक्तिपूर्वक सत्यवान-सावित्री की कथा सुनने से सुहागिनों को अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, वंश वृद्धि, दांपत्य जीवन में सुख-शांति तथा वैवाहिक जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। वट की पूजनोपरांत अन्न, वस्त्र, ऋतुफल, मिष्ठान आदि का दान करने से सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति, गृहक्लेश तथा अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं। ज्येष्ठ अमावस्या पर गंगा या तीर्थ में स्नान करने से सहस्त्र गौदान व कोटि सुवर्ण दान के समान पुण्य फल मिलता हैं।’ पूजा के बाद बांस के पंखे से हवा देंगी व्रती वट सावित्री की पूजा के बाद महिलाएं बरगद के पेड़ को बांस के पंखा से हवा देंगी। फिर अपने पति को भी इसी पंखा से हवा देंगी। शास्त्रों में इसका दो महत्व बताया गया है। पहला- बांस का संबंध वंश से होता है। शादी-विवाह में भी बांस की पूजा होती है। बांस के पौधे जैसे एक से दो, दो से तीन होते हुए एक पूरा समूह बना लेते है। उसी प्रकार हमारा वंश भी वृद्धि होता रहे। दूसरा – मान्यता है कि आज के दिन पति को श्रद्धा भाव से हवा देने पर पुरे गर्मी उनको सूर्य की ताप से रक्षा होती है। अंकुरित चने का आध्यात्मिक महत्व भविष्य पुराण के अनुसार, यमराज ने चने के रूप में ही सत्यवान के प्राण सावित्री को वापस दिए थे। सावित्री चने को लेकर सत्यवान के शव के पास आईं और चने को सत्यवान के मुख में रख दिया, इससे सत्यवान पुनः जीवित हो गए थे। चना के प्राणदायक महत्व होने के कारण इसे वट सावित्री की पूजा में अंकुरित चना अर्पण किया जाता है।



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