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दतिया उपचुनाव: निर्वाचन पदाधिकारी ने कलेक्टर को भेजा पत्र: कलेक्टर ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बुलाई बैठक; एक ही दिन में जारी हुए दोनों आदेश – Bhopal News

दतिया उपचुनाव: निर्वाचन पदाधिकारी ने कलेक्टर को भेजा पत्र:  कलेक्टर ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बुलाई बैठक; एक ही दिन में जारी हुए दोनों आदेश – Bhopal News

दतिया में उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारी तेजी से शुरू कर दी है। शुक्रवार को मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने दतिया कलेक्टर को पत्र लिखा। चुनाव आयोग का पत्र मिलने के तुरंत बाद दतिया कलेक्टर ने भी जिले के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर ईवीएम और वीवीपीएट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) में शामिल होने का आमंत्रण भेज दिया। 19 मई को होगी ईवीएम की एफएलसी
दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए EVM-VVPAT मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) कराने के निर्देश दिए गए हैं। दतिया जिले में 291 मतदान केंद्रों के लिए 200 प्रतिशत BU, CU और VVPAT मशीनों (लगभग 600-600-600) की तकनीकी जांच की जाएगी। यह प्रक्रिया 19 मई 2026 से शुरू होगी। जिला प्रशासन ने तुरंत की कार्रवाई
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, दतिया ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर FLC में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए राजनीतिक दलों की सतर्क उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों से मांगी ये जानकारी एफएलसी पूरी होने पर बनेंगे प्रमाणपत्र कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी ने FLC की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए BEL इंजीनियरों, सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रांग रूम, वेबकास्टिंग, फ्रिस्किंग और अन्य मानक प्रोटोकॉल की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। Annexure-12 के अनुसार FLC हॉल की तैयारियों की जांच रिपोर्ट और Annexure-13 के अनुसार FLC पूरा होने पर प्रमाण-पत्र भी तैयार किए जाएंगे। अब दतिया के विधायक राजेन्द्र भारती की विधानसभा सदस्यता जाने के घटनाक्रम को समझिए.. 24 अगस्त 1998: राजेन्द्र भारती की मां सावित्री देवी श्याम के नाम (श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान ट्रस्ट) पर दतिया के जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में ₹10 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) 3 वर्ष की अवधि और 13.5% ब्याज दर पर की गई। उस समय भारती बैंक के बोर्ड चेयरमैन थे। आरोप के अनुसार, FD की अवधि बढ़ाकर 10-15 वर्ष कर दी गई और दस्तावेजों में हेराफेरी कर मैच्योरिटी से पहले ही प्रतिवर्ष ₹1.35 लाख ब्याज निकाला गया (कुल लगभग ₹18.5 लाख अवैध ब्याज)। मामले की शुरुआत और जांच



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