न्यूजीलैंड से लौट मलेशिया में फंसने की कहानी सुनाता आकाश।
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ये कहना है कि 16 दिन मलेशिया में फंसे रहने के बाद जालंधर लौटे युवक का। उसने बताया कि न्यूजीलैंड से एयर मलेशिया की फ्लाइट ली थी। 24 अप्रैल को जैसे ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा तो यहां उसे डॉक्यूमेंट चेक करने के लिए रोक लिया गया।
उसने अपने सभी दस्तावेज अधिकारियों को दे दिए। इस दौरान अंदर से एक महिला कर्मी आई और मोबाइल जब्त करवाने के लिए कहने लगी। जब उसे कहा गया कि रिटन में डॉक्यूमेंट दें और मोबाइल ले लें।
इस पर महिला बहस करने लगी और धमकाया कि मैं तुम्हें बताती हूं कि तुम्हें एंट्री कैसे मिलती है। बहस की खुन्नस में अधिकारियों ने मेरे डॉक्यूमेंट को वैध नहीं माना और फिर से एयर मलेशिया की फ्लाइट में चढ़ा दिया। जिससे उसे 16 दिन परेशानी का सामना करना पड़ा।
युवक ने कहा कि न्यूजीलैंड में जब भी वहां से लोग नस्लीय टिप्पणी करते थे, तो मैं भारत के लिए उनसे भिड़ जाता था, कई बार बेगाने मुल्क में थप्पड़ भी खाए। 13 साल बाद दिल्ली आकर अहसास हुआ कि मैं इस देश के लिए थप्पड़ खा रहा था, जहां लोगों में इतनी ईगो है। युवक की जुबानी, पढ़ें पूरी कहानी….
आकाश ने कहा कि पिता की तबीयत खराब हो गई, तो मैं तुरंत 23 अप्रैल को रिटर्न टिकट करवाकर भारत के लिए निकल पड़ा था।
आकाश ने ये बड़ी बातें कही…
- वैध दस्तावेजों के बावजूद रोका: आकाश ने कहा कि उसके पास न्यूजीलैंड सरकार द्वारा जारी वैध ट्रैवल डॉक्यूमेंट था और उसने अपना शरण का केस भी वापस ले लिया था। इसके बावजूद, दिल्ली एयरपोर्ट के इमिग्रेशन अधिकारी इस दस्तावेज को समझ नहीं पाए और उसे न्यूजीलैंड का पासपोर्ट मानकर वीजा की मांग करने लगे। मैंने उनको पूरी बात समझाई। अपना आधार कार्ड भी दिया, लेकिन वे इस जिद पर अड़ गए कि वह भारत का नागरिक नहीं है। इसके चलते एंट्री देने से रोक दिया।
- फोन न देने पर ईगो हर्ट, बोले- पाकिस्तान से आए हो: आकाश ने बताया की जब एक महिला अधिकारी ने बिना किसी कानूनी वजह के उसका फोन मांगा और लॉक खोलने को कहा, तो मैंने फोन देने से मना कर दिया। इस बात पर अधिकारी भड़क गई। उन्होंने इसे अपने ईगो पर ले लिया और डराने-धमकाने लगे। उसे ये तक कह दिया कि क्या तुम पाकिस्तान से आए हो।
- आधार कार्ड देखने के बाद भी भारतीय मानने से इनकार: आकाश ने बताया कि उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों को अपना आधार कार्ड भी दिया। इतना भी कहा कि 50 करोड़ भारतीयों के पास पासपोर्ट नहीं है, तो क्या वो भारतीय नहीं हैं। लेकिन उसका एक भी तर्क नहीं सुना गया। हैरानी की बात है कि उसी रात कनाडा से आए गुरदासपुर के युवक को सेम केस में एंट्री दे दी गई।
- टिकट न लेने पर सिक्योरिटी से पिटवाया: आकाश ने आरोप लगाया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर 2 दिन रखने के बाद अधिकारियों ने उसे कहा कि वापस न्यूजीलैंड जाना होगा। इस पर मैंने उनको समझाया कि न्यूजीलैंड ने लिखित डाक्यूमेंट दिया है कि उसका उनके देश से कोई रिश्ता नहीं है और वह दोबारा लौटकर नहीं आ सकता। इस पर उससे कहा गया कि तुम्हें भेज रहे हैं और टिकट लो। इस पर मैंने टिकट लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद मुझे सिक्योरिटी से पिटवाया गया।
- ट्रैवल डॉक्यूमेंट देखा तो सवालों की बौछार कर दी: अकाश ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनका ट्रैवल डॉक्यूमेंट देखा तो सवालों की बौछार शुरू कर दी। उन्होंने पूछा कि आपके पास इंडिया का वीजा है या नहीं। आकाश ने समझाया कि यह ट्रैवल डॉक्यूमेंट हैं और वह स्थायी रूप से घर लौट रहे हैं। 13 साल बाद घर लौट रहा था, लेकिन उसकी खुशी को अधिकारियों की मनमानी ने चूर कर दिया।
- खाने-पीने और आराम की कोई सुविधा नहीं दी: अकाश ने बताया कि उसे 2 दिन तक दिल्ली एयरपोर्ट पर रोककर रखा गया। खाने-पीने और आराम की कोई सुविधा नहीं दी गई। अधिकारियों को बार-बार समझाने की कोशिश की कि मेरा केस जेन्युइन है, लेकिन अधिकारियों ने मेरी बात अनसुनी कर दी। तीसरे दिन उसे बताया गया कि न्यूजीलैंड वापस भेजा जा रहा है। उसने विरोध किया और कहा कि वहां जाने पर उसे फिर एंट्री नहीं मिलेगी। फिर अचानक फैसला बदलकर अधिकारियों ने उसे मलेशिया भेज दिया।

राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल के प्रयासों से घर लौट सका आकाश।
5 पॉइंट में जानिए आकाश के फंसने की कहानी…
- वीजा खत्म होने से मुसीबत में फंस गया- आकाश ने कहा कि मैं पिछले 13 साल से न्यूजीलैंड में रह रहा था, लेकिन जब मुझे खबर मिली कि मेरे पिता की तबीयत बहुत खराब है, तो मैं तुरंत 23 अप्रैल को रिटर्न टिकट करवाकर भारत के लिए निकल पड़ा। लेकिन मेरा वीजा खत्म हो गया था, इसलिए मेरा पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पाया था। मैंने न्यूजीलैंड सरकार से ट्रैवल डॉक्यूमेंट लिया और फ्लाइट पकड़ ली।
- दिल्ली पहुंचा तो एयरपोर्ट से बाहर नहीं जाने दिया- आकाश ने बताया कि जब मेरा जहाज दिल्ली उतरा, तो इमिग्रेशन अधिकारियों ने कहा कि आप इस दस्तावेज पर भारत में प्रवेश नहीं कर सकता। मैंने उन्हें बहुत समझाया कि न्यूजीलैंड में मेरा वीजा खत्म हो चुका है और मैं अब वहां का निवासी नहीं हूं, इसलिए आप मुझे वापस नहीं भेज सकते, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। मुझे जबरन वापस मलेशिया भेज दिया।
- न्यूजीलैंड ने भी एंट्री से मना किया-मलेशिया में फंसा- भारत द्वारा प्रवेश न देने और न्यूजीलैंड ने भी एंट्री से मना कर दिया। इसके चलते मैं मलेशिया एयरपोर्ट पर फंस गया। वहां मैंने 6 दिन एयरपोर्ट के फर्श पर बिताए और उसके बाद अधिकारियों ने मुझे 10 दिनों तक डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) में डाल दिया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अगर कोई देश मुझे नहीं अपना रहा, तो मेरी राष्ट्रीयता क्या है।
- कोई मेरी बात सुनने को तैयार नहीं था- आकाश ने कहा कि डिटेंशन सेंटर की स्थिति बहुत भयावह थी। न्यूजीलैंड वाले कह रहे थे कि मलेशिया से संपर्क करो और मलेशिया वाले मुझे दिल्ली दूतावास भेजने की बात कह रहे थे। मैं एक देश से दूसरे देश की कागजी कार्रवाई के बीच पिस रहा था। मेरी कोई सुनने वाला नहीं था। मैं बाहर निकलने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा था।
- पिता ने संत सीचेवाल से मांगी मदद- अंत में मेरे पिता ने संत सीचेवाल से मदद मांगी। राज्यसभा सदस्य के हस्तक्षेप और सरकारी चिट्ठी-पत्री के बाद मलेशिया में ही मेरा व्हाइट पासपोर्ट (आपातकालीन प्रमाण पत्र) बनवाया गया। मैं इसके लिए संत सीचेवाल का बहुत आभारी हूं कि उनकी मदद से मैं 9 मई को वापस अपने वतन लौट सका। आज अपने परिवार के साथ सुरक्षित और खुश हूं।
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