मध्य प्रदेश के देवास की पटाखा फैक्ट्री अनिल मालवीय के नाम पर थी, लेकिन इसका असली मालिक दिल्ली निवासी मुकेश विज है। वह इस समय चीन में है और फैक्ट्री के लिए बम बनाने की मशीनों का सौदा करने गया है। उसकी एक फैक्ट्री हिमाचल प्रदेश में भी चल रही है।
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घायल मजदूरों के मुताबिक हिमाचल की फैक्ट्री से पूरा मैनेजमेंट चलता था। देवास की फैक्ट्री में बन रहे पटाखों का ऑर्डर भी वहीं से आया था। 14 मई को देवास के टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 5 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 से ज्यादा घायल हैं। इनमें 13 की हालत गंभीर है।
फैक्ट्री में बड़ी संख्या में माचिस बम बनाए जा रहे थे और मजदूरों को बिहार से बुलाया गया था। हादसे के बाद सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर देवास-शाजापुर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी की संचालक अनिल मालवीय के साथ तस्वीरें वायरल हुईं।
सांसद ने सफाई देते हुए कहा कि सैकड़ों लोग उनके दफ्तर आते हैं और उन्हें अनिल मालवीय के पटाखा कारोबार की जानकारी नहीं थी। पढ़िए रिपोर्ट…
देवास की पटाखा फैक्ट्री में चीन से लाई गई मशीनें। यहां और भी मशीनें आने वाली थीं।
बेनामी निवेश और ‘दिल्ली-चीन’ का कनेक्शन टोंककला के पास जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, वह छह माह पहले शुरू हुई थी। घायल मजदूर रोहित के मुताबिक संचालक को पटाखों का बड़ा ऑर्डर मिला था, जिसे बारिश से पहले पूरा करना था। इसी वजह से बड़ी संख्या में मजदूर बुलाए गए थे। फैक्ट्री में उत्तर प्रदेश, बिहार और देवास के मजदूर काम कर रहे थे।
ठेकेदारों के जरिए और मजदूर बुलाने की तैयारी भी थी। बड़े पैमाने पर विस्फोटक रखकर पटाखे बनाए जा रहे थे। रोहित ने बताया कि फैक्ट्री का लाइसेंस अनिल मालवीय के नाम पर था, लेकिन असली निवेशक दिल्ली निवासी मुकेश विज है, जो फिलहाल चीन में है। फैक्ट्री में नई मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन की तैयारी थी।
जमीन अनिल ने किराए पर ली थी, लेकिन निवेश और संचालन मुकेश विज कर रहा था। अब जांच एजेंसियां इस ‘बेनामी’ निवेश के सोर्स की जांच कर रही हैं।

नाबालिग मजदूर और 40 रुपए का ‘ओवरटाइम’ राजनीतिक विवाद के बीच फैक्ट्री में मजदूरों के शोषण की बात भी सामने आई है। बिहार से आए 17 वर्षीय मजदूर सुकेश कुमार (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह पिछले दो महीने से यहां काम कर रहा था।
फैक्ट्री में 24 घंटे काम चलता था। मजदूरों को 9 घंटे की शिफ्ट के लिए 15 हजार रुपए मिलते थे, लेकिन ओवरटाइम के बदले सिर्फ 40 रुपए प्रति घंटा दिया जाता था।
सरपंच की वो चिट्ठी, जिसे रद्दी समझ लिया गया इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्राम पंचायत कलमा के सरपंच ने 16 मार्च को तहसीलदार को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि फैक्ट्री के पास पेट्रोल पंप और रिहायशी इलाका है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
सरपंच ने पत्र में लिखा था कि “यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी पंचायत की नहीं होगी।” इसके बावजूद प्रशासन ने चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया।

सरपंच कविता गौड़ की चिट्ठी जिसमें लिखा है कि कभी भी हादसा हो सकता है।
वायरल तस्वीर पर सांसद की सफाई हादसे के बाद फैक्ट्री के लाइसेंसधारी अनिल मालवीय की तस्वीरें सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। विपक्ष और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इसी ‘राजनीतिक कवच’ के कारण फैक्ट्री में नियमों की अनदेखी हो रही थी।
इन आरोपों के बीच सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “एक जनप्रतिनिधि होने के नाते हजारों लोग मुझसे मिलने आते हैं। मेरा कार्यालय सबके लिए खुला है। किसी के साथ फोटो खिंच जाने का यह मतलब कतई नहीं है कि वह व्यक्ति कानून से ऊपर हो गया।”

जांच के आदेश, मगर कई सवालों का जवाब बाकी उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में ब्लास्ट के कारण, विस्फोटक नियमों के पालन, फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल होगी। जांच के लिए अपर कलेक्टर अतेन्द्र सिंह गुर्जर और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिकारी नमिता तिवारी को नियुक्त किया गया है।
अधिकारियों को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। फैक्ट्री का लाइसेंस 23 दिसंबर को जारी हुआ था और 6 मई को रिन्यू किया गया था। फैक्ट्री के पास पटाखा निर्माण और बिक्री के अलग-अलग लाइसेंस थे।

घायलों से मुलाकात करते अफसर।
इन सवालों का जवाब मिलना बाकी
1. जब मार्च में लिखित शिकायत मिल गई थी, तो सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई?
2. क्या राजनीतिक रसूख के कारण अधिकारी इस फैक्ट्री पर कार्रवाई करने से डर रहे थे?
3. नाबालिग मजदूरों से खतरनाक काम कराने की अनुमति किसने दी?
4. क्या लाइसेंस सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए किसी और के नाम पर लिया गया था?
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देवास जिले के टोंककला के पास पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट मामले में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। फैक्ट्री का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ और अंदर पटाखा बनाने का काम तेजी से चल रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
