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महर्षि महेश योगी विवि की डिग्रियों पर संकट: बालाघाट SP ने जांच के लिए कटनी कलेक्टर को पत्र लिखा; परीक्षा केंद्रों की जांच शुरू – Katni News

महर्षि महेश योगी विवि की डिग्रियों पर संकट:  बालाघाट SP ने जांच के लिए कटनी कलेक्टर को पत्र लिखा; परीक्षा केंद्रों की जांच शुरू – Katni News

कटनी में महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, करौन्दी की ओर से जारी अंकसूचियों और डिग्रियों की वैधता पर सवाल उठ गए हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन पर नियमों के उल्लंघन और हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में कटनी कलेक्टर ने सोमवार को गंभीरता से जांच करने की बात कही है। दरअसल, महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के छात्र आशीष धुर्वे ने बालाघाट पुलिस अधीक्षक को एक तथ्यात्मक शिकायत दी थी। इस पर संज्ञान लेते हुए बालाघाट पुलिस अधीक्षक ने मामले की गहन जांच के लिए सीधे कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कटनी को पत्र लिखा है। विश्वविद्यालय का मुख्य मुख्यालय कटनी जिले के करौन्दी में स्थित है, इसलिए इस संभावित शैक्षणिक घोटाले की जांच अब कटनी जिला प्रशासन के हाथों में है। बालाघाट के सुरभि नगर निवासी छात्र आशीष धुर्वे (सत्र 2022, BSW कोर्स) ने सोमवार को आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से जारी डिग्रियों की प्रामाणिकता और कानूनी मान्यता पर गंभीर सवाल हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालाघाट ने आधिकारिक पत्र (क्रमांक पुअ/बाला/शिका/जनता/662/2026) के माध्यम से मूल शिकायत कटनी कलेक्टर को भेजकर तत्काल वैधानिक कार्रवाई का अनुरोध किया है। पुलिस की प्राथमिक जांच में शिकायत के बिंदु गंभीर पाए गए हैं। डिग्री विवाद में घिरा वैदिक विश्वविद्यालय प्रबंधन यह कार्रवाई माननीय उच्चतम न्यायालय के ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ निर्णय और पुलिस मुख्यालय मध्य प्रदेश के कड़े परिपत्रों के तहत शुरू हुई है। कानूनविदों के अनुसार, यदि जांच में तथ्यों की पुष्टि होती है, तो विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) सहित अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है। शिकायतकर्ता छात्र की ओर से प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन मुख्य रूप से चार मोर्चों पर घिरता नजर आ रहा है। ​यूनिवर्सिटी खुद को शासकीय बताती है या निजी, इसे लेकर हमेशा से रहस्य बना हुआ है। यूजीसी (UGC) के पत्र दिनांक 07.11.2014 के मुताबिक, स्ववित्त पोषित होने के कारण इसे राज्य निजी विश्वविद्यालय की श्रेणी में शामिल किया गया था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी इसके गठन से जुड़ी राज्य सरकार की मूल अधिसूचनाएं और गजट नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं करती, जिससे छात्रों में भ्रम बना रहता है। यूजीसी नियम उल्लंघन से डिग्रियों की वैधता पर संकट विश्वविद्यालय की ओर से निजी विश्वविद्यालयों के संचालन हेतु तय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कड़े नियमों (विशेषकर धारा 12 और 15) का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इन नियमों का पालन न होने के कारण विवि द्वारा पूर्व में और वर्तमान में जारी की गई डिग्रियों की वैधता सीधे तौर पर शून्य होने की कगार पर है। शिकायतकर्ता छात्र आशीष धुर्वे की अंकसूची ने इस पूरे मामले की पोल खोल दी है। छात्र की मार्कशीट में परीक्षा केंद्र का नाम ही गायब है। नियमों के विपरीत जाकर विश्वविद्यालय ने अपने मुख्यालय (कटनी) के बाहर बालाघाट और अन्य जिलों में अवैध रूप से परीक्षा केंद्र बनाकर परीक्षाएं आयोजित कीं, जो कि यूजीसी के टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन (क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार) नियमों का उल्लंघन है। वोकेशनल-तकनीकी कोर्स विश्वविद्यालय की स्थापना के मूल अधिनियम 37 (वर्ष 1995) के तहत इसे केवल वैदिक शिक्षा और उससे जुड़े विषयों के लिए अनुमति थी। बिना किसी वैधानिक संशोधन या उच्च शिक्षा मंत्रालय/राजभवन की अनुमति के, विवि प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर कई तरह के व्यावसायिक वोकेशनल और टेक्निकल कोर्स शुरू कर दिए और छात्रों से मोटी फीस वसूल कर उन्हें प्रवेश दे दिया।
​भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड जब्त करने की मांग की है। बालाघाट पुलिस की ओर से गेंद कटनी कलेक्टर के पाले में डाले जाने के बाद, अब शिकायतकर्ता और पीड़ित छात्रों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल एक उच्च स्तरीय टीम गठित करे। यह टीम विश्वविद्यालय के करौन्दी (कटनी) स्थित मुख्यालय और जबलपुर स्थित प्रशासनिक कार्यालय का भौतिक निरीक्षण करे और पिछले कुछ वर्षों का प्रवेश व परीक्षा रिकॉर्ड जब्त करे, ताकि बड़े पैमाने पर हो रहे इस खेल का पर्दाफाश हो सके। इस संबंध में कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि पत्र में जो भी जानकारियां कटनी जिले से मांगी गई है उसे हम जांच करा कर समय अवधि पर भेजने का प्रयास करेंगे, एवं आगे नियम अनुसार कार्यवाही की जाएगी



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