हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स के विरोध में पंजाब के किसान संगठनों ने 1 जून को चार घंटे के चक्का जाम की घोषणा की है। यह प्रदर्शन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा से जुड़े सभी 55 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर किया जाएगा। पंजाब मोर्चा, किरती किसान मोर्चा, शेर-ए-पंजाब किसान यूनियन और भारतीय किसान यूनियन (बहीराम) सहित कई किसान संगठनों ने इस आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यह टैक्स वापस नहीं लिया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। एडवोकेट उताश ने रेसिप्रोकल टैक्स’ लगाने का कानूनी ड्राफ्ट जारी किया प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, संगठनों के वकील एडवोकेट उताश मोगा ने हिमाचल प्रदेश की सरकारी और व्यावसायिक गाड़ियों पर ‘रेसिप्रोकल टैक्स’ लगाने का कानूनी ड्राफ्ट जारी किया। इस ड्राफ्ट की प्रतियां पंजाब के वित्त और शिक्षा मंत्री को भेजी गई हैं, जिसमें सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा गया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश के लोग उनके भाई हैं, इसलिए सीमावर्ती तहसीलों को इस टैक्स से राहत दी गई है। हालांकि, हिमाचल सरकार के वाहनों पर भारी टैक्स लगाकर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जाएगी। चक्का जाम के मुख्य बिंदुओं में रूपनगर-नालागढ़ हाईवे पर ढेरोवाल टैक्स प्वाइंट, भरतगढ़ के दोनों प्रमुख प्वाइंट्स, कीरतपुर साहिब-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर गड़ा टैक्स प्वाइंट, श्री नैना देवी मार्ग पर कोलांवाला डोबा प्वाइंट, ऊना-नंगल-महितपुर हाईवे, होशियारपुर और पठानकोट के सीमावर्ती क्षेत्र शामिल हैं। संयोजक गौरव राणा ने CM मान की चुप्पी पर सवाल उठाए मोर्चा के संयोजक गौरव राणा और वीर सिंह बड़वा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हाल ही में रूपनगर और आनंदपुर साहिब आए थे, लेकिन उन्होंने एंट्री टैक्स के मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जनता देख रही है कि सरकार के विधायक केवल दिखावा कर रहे हैं या वास्तव में पंजाब के साथ खड़े हैं। किसान नेताओं ने 21 से 30 मई तक स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करने की अपील की है। उन्होंने मांगें न माने जाने पर हिमाचल प्रदेश का बहिष्कार और स्थायी नाकेबंदी की चेतावनी भी दी है। इस आंदोलन को बाबा अच्छर सिंह महाकाल की अगुवाई में निहंग सिंह संगठनों का भी समर्थन मिला है।
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