जयपुर में बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक 2200 करोड़ रुपए कीमत की 42 बीघा अवाप्तशुदा जमीन का आज हाउसिंग बोर्ड ने कब्जा लिया। बोर्ड की टीम ने आज मौके पर पहुंचकर बुल्डोजर से वहां बनी बाउंड्रीवाल, कच्चे-पक्के मकान तोड़े और जमीन खाली करवाकर कब्जे के साइनेज लगाए। इसकी आगे की कार्रवाई अब रविवार को की जाएगी, जिसमें इस जमीन पर बने कई बड़े स्ट्रेक्चर तोड़े जाएंगे। आज कार्रवाई हाउसिंग बोर्ड के उप आवासन आयुक्त संजय शर्मा, राजस्थान आवासन बोर्ड कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह ,महामंत्री रमेश शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविन्द नाटाणी के नेतृत्व में अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन के सहयोग से की। इससे पहले बोर्ड प्रशासन ने 16 अप्रेल को भी यहां कब्जा लेने की कार्रवाई की थी। लेकिन तब विरोध और ऊपर के स्तर पर दखल के बाद कार्रवाई को बीच में छोड़ दिया था। इसके बाद कॉलोनी के कुछ लोग इस कार्रवाई के खिलाफ राजस्थान हाइकोर्ट में चले गए थे, जहां कोर्ट ने स्टे दे दिया। लेकिन हाल ही में हाईकोर्ट में दोबारा हुई सुनवाई के बाद स्टे को खारिज करते हुए बोर्ड प्रशासन को कब्जा लेने के आदेश दिए थे। आपको बता दें कि हाउसिंग बोर्ड प्रशासन ने वर्ष 1989 में इस जमीन को अवाप्त करने की प्रकिया शुरू की थी। इसके बाद वर्ष 1991 में प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन तब कब्जा नहीं लिया गया। इस बीच जमीन पर कुछ भूमाफियाओं ने जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टे के आधार पर कॉलोनी बसा दी और भूखंड का बेचान दिखा दिया। ये बेचान वर्ष 1981 में जमीन खरीद के आधार पर बताया गया। बताया जा रहा है कि इसमें कई बड़े रसूखात लोगों को भूखंड कौड़ियों के दाम बेचे गए। वर्ष 2019 में एनओसी देने से किया मना वर्ष 2019 में कॉलोनी के नियमन को लेकर जेडीए ने एनओसी मांगी, लेकिन आवासन मंडल के तत्कालीन आयुक्त ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। मंडल ने तर्क दिया कि जब जमीन पर 50 फीसदी निर्माण ही नहीं है तो नियमन क्यों किया जा रहा है? सोसाइटी के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई गई। मामला एसीबी को भेज दिया गया।
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