भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के दौरे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री की ‘ग्राम विकास चौपाल’ को जनता के साथ छलावा बताते हुए इसे महज एक सुनियोजित ड्रामा करार दिया है। रोत ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह दौरा और रात्रि चौपाल, जिसका नाम ‘ग्राम विकास चौपाल’ रखा गया था, वह अपने मूल उद्देश्यों से पूरी तरह भटक गई। ये एक हाई प्रोफाइल ड्रामा भजन मंडली’ में तब्दील हो गया। सांसद रोत ने तंज कसते हुए कहा ”मुख्यमंत्री का यह दौरा बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र और डूंगरपुर जिले के चौरासी विधानसभा क्षेत्र के धम्बोला गांव में रहा। इसे नाम तो ‘ग्राम विकास चौपाल’ दिया गया था, लेकिन धरातल पर यह ग्राम विकास चौपाल न होकर एक हाई ड्रामा ‘भजन मंडली चौपाल’ के रूप में तब्दील हो गई।” जनता को गुमराह करने की कोशिश
BAP सांसद ने आरोप लगाया कि इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा पहले से ही इस तरह तैयार की गई थी, जिससे केवल राजनीतिक सोच कह सकते है। इस ड्रामे के जरिए सरकार यह दिखाना चाहती थी कि वे राजस्थान और विशेषकर दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के हितैषी हैं और गरीबों के शुभचिंतक हैं।
उन्होंने कहा कि आम जनमानस को भी यह अहसास हो गया कि यह कोई विकास चौपाल नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल ड्रामा भजन मंडली प्रोग्राम था।” ‘जनसुनवाई शब्द का मजाक बनाया’
सांसद रोत ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यक्रम में ‘जनसुनवाई’ शब्द के अर्थ को ही बदल दिया गया। जिस तरह से असल में जनसुनवाई होती है, उस पूरी प्रक्रिया को ही खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर आम जनता को पहुंचने ही नहीं दिया गया। जब ‘जन’ (जनता) को ही वहां पहुंचने की अनुमति नहीं थी, तो वह कैसी जनसुनवाई और कैसी चौपाल? उन्होंने आरोप लगाया कि चौपाल में भाजपा के नेताओं को भी एंट्री नहीं मिली। उनके कई नेताओं के पास ही नहीं बनाये गये थे। जिस कारण उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। जिस कारण भाजपा के नेता ही नाराज है। यहां तक कि अब तो भाजपा के लोग ही इसे भजन मंडली प्रोग्राम कहने लगे हैं। जनसुनवाई इसे कहते हैं कि आम जन की हिस्सेदारी हो, आमजन अपनी समस्या को गिनाए और उसका समाधान हो, उसको जनसुनवाई कहा जाता है। ‘यहां 700 करोड़ का प्रोजेक्ट ही दे दो’
सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि वागड़ के माही बांध और सोम कमला आम्बा बांध से पानी को लिफ्ट कर जालोर और अन्य जिलों में ले जाने 7 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है। लेकिन मुख्यमंत्री चाहते है कि यहां के लोगों को फायदा मिले तो वे सिर्फ 700 करोड़ का प्रोजेक्ट ही मंजूर कर दे। जिससे यहां के लोगों को सुविधा मिलेगी।
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