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मंडी के शिकारी देवी मंदिर में उमड़ रही आस्था: पंचायत चुनावों के बाद बढ़ेगी भक्तों की संख्या, 15 नवंबर तक खुला रहेगा कपाट – Mandi (Himachal Pradesh) News

मंडी के शिकारी देवी मंदिर में उमड़ रही आस्था:  पंचायत चुनावों के बाद बढ़ेगी भक्तों की संख्या, 15 नवंबर तक खुला रहेगा कपाट – Mandi (Himachal Pradesh) News

समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर मंडी में स्थित प्रसिद्ध माता शिकारी देवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही है। धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मंदिर में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। हालांकि पंचायत चुनावों के कारण फिलहाल श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से थोड़ी कम है, लेकिन रविवार और छुट्टियों के दिनों में हजारों भक्त माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रबंधन को उम्मीद है कि चुनाव समाप्त होने के बाद भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। माता शिकारी देवी मंदिर अपने मनमोहक दृश्यों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में गूंजते जयकारों और भक्ति भावना से श्रद्धालु सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। पहुंचने के लिए मार्ग और सुविधाएं मंदिर तक पहुंचने के लिए सबसे निकटतम मार्ग चैलचौक से देवीदड़ वाया सड़क है, जिसकी दूरी करीब 35 किलोमीटर है। इसके अलावा जंजैहली और करसोग मार्ग से भी श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकते हैं। ये सड़कें छोटे-बड़े वाहनों के लिए सुगम हैं, जिससे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों से पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी द्वारा सराय की व्यवस्था की गई है। वन विभाग का विश्राम गृह भी उपलब्ध है। साथ ही सरकार द्वारा एक नए रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मंदिर का कपाट 15 नवंबर तक खुला रहेगा मंदिर के पुजारी सुरेश ठाकुर ने बताया कि माता शिकारी देवी मंदिर के कपाट हर साल 15 मार्च को खोले जाते हैं और 15 नवंबर को बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह मंदिर न सिर्फ स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को नजदीक से देखने के लिए पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय है।
फोटोज से देखिए श्रद्धालुओं का आनंद



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