छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिम्प्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर संगीता केतन शाह और उनके पति केतन मूलचंद शाह को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। हाईकोर्ट ने दोनों को अग्रिम जमानत भी दे दी है। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट को देखने के बाद माना कि शिकायतकर्ता के खाते में 10 लाख रुपए वापस भेजे जा चुके थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तथ्य का जिक्र शिकायत और सिविल सूट में नहीं किया गया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दुर्ग कोर्ट में चल रही आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामला सुनील कुमार सोमेन से जुड़े जमीन सौदे का है। शिकायत के मुताबिक 13 मार्च 2023 को संगीता शाह ने ग्राम कोहका की जमीन बेचने के लिए सुनील कुमार से 50 लाख रुपए में सौदा किया था। इसके एवज में 10 लाख रुपए एडवांस लिए गए थे। बाद में जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आरोप है कि उसी जमीन पर बाद में 4.50 करोड़ रुपए का लोन भी लिया गया। सुनील कुमार ने इस मामले में नवंबर 2025 में पुलिस में शिकायत की थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में सिविल कोर्ट में केस दायर किया गया। फिर मार्च 2026 में दुर्ग कोर्ट में परिवाद दायर किया था। सुपेला थाना में पुलिस ने दर्ज किया है अपराध
कोर्ट के आदेश के बाद 8 मई 2026 को पुलिस ने सुपेला थाना में अपराध दर्ज किया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि आरोपियों ने विवादित जमीन को विवादमुक्त बताकर सौदा किया और बाद में रजिस्ट्री से इनकार कर दिया। वहीं संगीता शाह और केतन शाह की ओर से कोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपए पहले ही वापस कर दिए गए थे। बचाव पक्ष ने बैंक स्टेटमेंट भी पेश किया, जिसमें 10 अक्टूबर 2024 को रकम ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड बताया गया। कोर्ट में कहा- लौटा दी थी राशि, तथ्यों को छिपाकर पेश किया
सिम्प्लेक्स कॉस्टिंग की डायरेक्टर संगीता केतन शाह ने कोर्ट में अपने बचाव में कहा कि घटना के करीब 3 साल बाद 8 मई 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई और देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपए वापस कर दिए गए थे। यह रकम 10 अक्टूबर 2024 को खाते में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन इस तथ्य को छिपाकर कोर्ट में परिवाद पेश किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि, लोन के लिए आवेदन 27 सितंबर 2024 को किया गया था और रकम अक्टूबर 2024 में मिली थी। जबकि शिकायतकर्ता को अग्रिम राशि उससे पहले 30 सितंबर 2024 को लौटा दी गई थी, इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया। दुर्ग जिला कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा था कि, उपलब्ध तथ्यों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह अग्रिम जमानत देने योग्य मामला नहीं है। इसी आधार पर अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश पी एस मरकाम की कोर्ट ने संगीता शाह और केतन शाह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद संगीता केतन शाह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पुराने मामले में भी कोर्ट से जमानत मिली थी
बता दें कि संगीता केतन शाह के उपर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। कोर्ट के सामने यह तथ्य भी रखे गए कि, आरोपियों के खिलाफ पहले भी पुलगांव थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो चुका है। उस मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी थी कि वे भविष्य में किसी भी तरह के अपराध में शामिल नहीं होंगे। वहीं इसके बाद फिर दूसरा मामला भी इसी तरह का कोर्ट के आदेश के बाद सुपेला थाना में पंजीबद्ध हुआ है। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए कार्यवाही पर रोक लगाई है।
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