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पंजाब में जी-राम-जी एक्ट का बढ़ता विरोध: ग्रामीणों ने सांसदों से पूछे 9 सवाल, गांव के बाहर लगाया पोस्टर, बोले- जवाब दें MP – Patiala News

पंजाब में जी-राम-जी एक्ट का बढ़ता विरोध:  ग्रामीणों ने सांसदों से पूछे 9 सवाल, गांव के बाहर लगाया पोस्टर, बोले- जवाब दें MP – Patiala News


पंजाब में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) एक्ट, 2025 को लेकर बढ़ते विरोध को रोकने के लिए पंजाब भाजपा जहां 7 जनवरी से राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने जा रही है, वहीं उससे पहले ही ग्रामीण मजदूरों ने विरोध

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पटियाला जिले के नाभा क्षेत्र के गांव कंसूहा खुर्द में मनरेगा मजदूरों ने गांव के बाहर बैनर और पोस्टर लगाकर इस कानून के पक्ष में वोट देने वाले सांसदों से सीधे सवाल पूछे हैं। खुद को ‘कंसूहा खुर्द के मनरेगा मजदूर’ बताने वाले ग्रामीणों ने पोस्टर में कुल 9 अहम सवाल लिखे हैं, जो कानून बनाने की प्रक्रिया और इसके संभावित असर को लेकर हैं।

सांसदों से पूछा- बिल पढ़ने का कितना समय मिला ?

पोस्टर में लिखा गया एक सवाल खास तौर पर चर्चा में है। इसमें पूछा गया है कि,

“यह बिल सांसदों को कब सौंपा गया और उन्हें इसे पढ़ने व समझने के लिए कितना समय दिया गया ?”

पंजाब में जी-राम-जी एक्ट का बढ़ता विरोध:  ग्रामीणों ने सांसदों से पूछे 9 सवाल, गांव के बाहर लगाया पोस्टर, बोले- जवाब दें MP – Patiala News

ग्रामीणों का आरोप है कि कानून को जल्दबाजी में पास किया गया, जबकि इससे जुड़े करोड़ों ग्रामीण मजदूरों और मनरेगा श्रमिकों से कोई सीधा परामर्श नहीं किया गया।

मनरेगा मजदूरों में असमंजस और नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि, VB-G RAM G एक्ट आने के बाद मनरेगा जैसी मौजूदा रोजगार गारंटी योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरों को आशंका है कि नए कानून के नाम पर उनकी मौजूदा रोजगार गारंटी कमजोर की जा सकती है।

पटियाला जिले में नाभा के गांव में लगा हुआ बैनर।

पटियाला जिले में नाभा के गांव में लगा हुआ बैनर।

ग्रामीणों के मुताबिक, पोस्टर लगाकर वे यह जानना चाहते हैं कि:

  • VB-G RAM G कानून का प्रस्ताव सांसदों को किस दिन मिला और उसे पढ़ने-समझने के लिए कितना वक्त दिया गया?
  • कानून के समर्थन में वोट डालने से पहले सांसदों ने किस-किस से चर्चा की?
  • इतनी जल्दबाजी में कानून पास करने पर सांसदों ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?
  • प्रदेश पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाले इस कानून के पक्ष में वोट डालने के क्या कारण थे, और क्या इससे रोजगार की गारंटी वास्तव में बनी रहेगी?
  • मनरेगा में मांग के अनुसार रोजगार की व्यवस्था खत्म कर जी-राम-जी में इसे केंद्र की तय राशि से जोड़ना क्यों सही माना गया?
  • जब मनरेगा में 100 दिन का रोजगार भी मुश्किल से मिलता था, तो नए कानून में 125 दिन का काम मिलने की गारंटी कैसे दी जाएगी?
  • ग्राम सभाओं की शक्तियां सीमित कर गांवों को श्रेणियों में बांटकर काम देने का फैसला सरकार को देने पर सहमति क्यों दी गई?
  • रोजगार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इसके राजनीतिक इस्तेमाल की जरूरत क्यों पड़ी और आपने इसके पक्ष में वोट क्यों दिया?
  • क्या 100 से 125 दिन की गारंटी मनरेगा में ही नहीं बढ़ाई जा सकती थी, नया कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कहना है कि इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कहना है कि इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

7 जनवरी से BJP का जागरूकता अभियान

यह विरोध ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश भाजपा इकाई ने 7 जनवरी से VB-G RAM G एक्ट के समर्थन में राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पार्टी का दावा है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत करेगा।

हालांकि, जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण मजदूरों और मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। गांव कंसूहा खुर्द में लगे पोस्टर अब आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बन गए हैं।

विरोध के नए तरीके अपना रहे ग्रामीण

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक गांव तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में अंदरखाने नाराजगी लगातार बढ़ रही है। पोस्टर और बैनरों के जरिए सवाल उठाना इस बात का संकेत है कि मजदूर अब संगठित तरीके से अपनी आवाज उठाने की तैयारी में हैं।

कृषि कानूनों के बाद फिर चुनौती?

पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा को गांवों में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि ब्लॉक समितियों और जिला परिषद चुनावों में पार्टी को कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन चुनावों के तुरंत बाद VB-G RAM G कानून भाजपा के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है।

विधानसभा चुनाव से पहले मजदूरों द्वारा कानून को लेकर उठाए जा रहे सवाल संकेत दे रहे हैं कि चुनावी माहौल में यह मुद्दा भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है और ग्रामीण इलाकों में विरोध और तीखा हो सकता है।



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