चित्तौड़गढ़ जिले में साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “म्यूल हंटर” के तहत पुलिस को एक और सफलता मिली है। साइबर थाना पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध एसबीआई बैंक खाते की जानकारी पुलिस को मिली। जब साइबर पुलिस पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर इस खाते का रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि इस खाते के खिलाफ देशभर से साइबर ठगी की 101 शिकायतें दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि यह खाता “सोलफेव ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड” नाम की फर्म के नाम पर खुला हुआ था और इसके खाताधारक चंदेरिया थाना क्षेत्र के नयाखेड़ा दौलतपुरा निवासी गोपाल जाट और नारायण वैष्णव थे। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की। अलग-अलग राज्यों से ठगी की रकम खाते में आई, फिर दूसरे खातों में भेजी गई पुलिस जांच में सामने आया कि अगस्त 2025 के दौरान देश के कई राज्यों में हुए साइबर फ्रॉड की रकम इस खाते में जमा हुई थी। इसके बाद रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार इस खाते में आने वाली राशि अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़ी हुई थी। जांच में यह भी पता चला कि खाते का उपयोग सिर्फ सामान्य बैंकिंग लेन-देन के लिए नहीं बल्कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इकट्ठा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस भाषा में ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने और घुमाने के लिए करते हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से खाते का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों की मदद की और ठगी की राशि को निकालकर उपयोग में लिया। साइबर थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला, आगे की जांच जारी साइबर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों गोपाल जाट और नारायण वैष्णव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। इसलिए अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संपर्क किन-किन लोगों से था और ठगी की रकम आखिर कहां-कहां भेजी गई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं। साइबर विशेषज्ञों की मदद से बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन डिटेल और डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं।
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