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स्थानीय एपीजे गुरुकुल में महासती सुमन कुमारी जी महाराज की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर अखंड पाठ सहित गुणगान सभा का आयोजन हुआ। आचार्य पद्मराज स्वामी जी ने कहा कि हमारे जीवन को जो वैशिष्ट्य प्राप्त होता है, वह मात्र धर्म के द्वारा ही सम्भव है। धर्म से अतिरिक्त आहार, निद्रा, भय, परिवार, सम्पत्ति आदि सबके पास होते हैं। मात्र धर्म ही अतिरिक्त संपत्ति है जो मनुष्य के स्तर को ऊंचा उठा देता है। इसीलिए कहा गया है “धर्म से हीन व्यक्ति पशु के समान हो जाता है” धर्मेण हीना पशुभि: समाना। धर्म का मार्ग चुनने वाला व्यक्ति अपने सदपुरुषार्थ से स्वयं का इतना परिष्कार कर सकता है कि उसमें परमात्मतत्व प्रकट हो जाए। महासती श्री सुमन कुमारी जी महाराज ने सरलता, दृढ़ता, संयम-साधना और सहृदयता से अपना ऐसे ही परिष्कार किया था। गुरुमां वसुंधरा जी ने बताया कि गुरुणी मैया को साध्वी बनने में अपार कष्टों का सामना करना पड़ा था। घरवालों ने उन्हें 8 दिन तक कमरे में बंद कर दिया था। बिना अन्न जल के 8 दिन की तपस्या के बाद वे दरवाजा तोड़कर बाहर निकल आयी थी। उन्हें दीक्षा लेने में विशेष रूप से अपनी मां के विरोध का सामना करना पड़ा। अनेक प्रताड़नाओं को सहकर भी वे कभी अपने संकल्प से नहीं डिगीं। गुरुमां ने भजन के द्वारा गुरुणी जी के महिमामय जीवन का परिचय दिया। उनकी स्तुति में भक्ति भजन गाए। उनकी आरती गाई गई और प्रसाद बांटा गया। इस अवसर पर नेपाल में घटित घटना में जीवन गंवाने वालों को याद करते हुए उनकी आत्मिक शांति की कामना की गई। हाथों में दीपक लेकर नवकार मंत्र एवं गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ प्रार्थना करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
