गोंडा के करनैलगंज से पूर्व सपा विधायक और पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सरकार और आशुतोष महाराज पर सीधे निशाना साधा। पूर्व मंत्री ने कहा, “आदि गुरु शंकराचार्य ने चार पीठों की स्थापना की, और अविमुक्तेश्वरानंद जी उनमें से एक पीठ में हैं। हमारी मतभिन्नता किसी से हो सकती है, दूरी किसी से हो सकती है, लेकिन जिस स्तर का आरोप लगाया गया है, वह किसी धर्म गुरु पर लगना स्वीकार्य नहीं है।” गंगा स्नान पर रोक और अधिकारियों की जिद योगेश प्रताप सिंह ने सवाल उठाया कि सत्ता से सवाल करने के कारण शंकराचार्य जी को गंगा स्नान तक नहीं करने दिया गया। उन्होंने बताया कि कुंभ मेला जैसे पवित्र प्रयागराज में भी उन्हें स्नान करने के लिए आठ दिन रुकना पड़ा। “कौन सा नियम है, और कौन सा सरकारी कर्मचारी उनसे पूछेगा कि आप शंकराचार्य कैसे हैं? उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया। जिस भूखंड पर वे थे, उसे क्यों निरस्त नहीं किया गया, इसके लिए अधिकारियों ने उन्हें नोटिस जारी किया। इस धरती पर शंकराचार्य से सवाल उठाया जा रहा है। आशुतोष जी से तो सवाल नहीं हुआ। मैं रामभद्राचार्य जी के बारे में व्यक्तिगत कुछ नहीं कहना चाहता।” आशुतोष पर तीखी टिप्पणी पूर्व मंत्री ने आगे कहा, “जो व्यक्ति इस मामले में सवाल उठाने के माध्यम बने, हम उन्हें गोंडा के लोग जानते हैं। थोड़ा पीछे जाएँ तो नवनीत राणा हमारे एसपी थे, बहुत ईमानदार। वहीं आशुतोष, जो आज ‘महाराजाधिराज’ कहकर खुद को संबोधित कर रहे हैं, वही गोंडा आए थे जब मनकापुर में पकड़ा गया एक बड़े गौ-तस्कर की सिफारिश करने।” धर्म और सनातन पर सवाल योगेश प्रताप सिंह ने धर्म और सनातन पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “आज जिस धर्म की बात हो रही है, हिंदुत्व की, ये भगवान शिव का रूप माना जाता है। शंकराचार्य से सवाल करना, सनातन के नाम पर उठना, स्वीकार्य नहीं है। भगवान शिव पर उँगली उठाई जा रही है।”
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