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बड़वानी जिले के पाटी में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित ग्रामीणों और पूर्व कैबिनेट मंत्री ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री से शिकायत की है। आरोप है कि स्ट्रीट लाइट और गणगौर घाट के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। यह मामला 2022 का है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बड़वानी जिले के पाटी में भोंगर्या हाट में शामिल होने आए थे। उस समय, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल ने स्थानीय मांगों को उनके सामने रखा था। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने मंच से ही 80 लाख रुपए की लागत से स्ट्रीट लाइट, 60 लाख रुपए का गणगौर घाट और 40 लाख रुपए के बस स्टैंड के निर्माण की घोषणा की थी। घोषणा के बाद शुरू हुआ काम घोषणा के बाद, 2025 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से गणगौर घाट और स्ट्रीट लाइट का कार्य कराया गया। हालांकि, नगरवासी इन कार्यों की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय वर्मा ने आरोप लगाया है कि गणगौर घाट के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्मा ने बताया कि 60 लाख रुपए की लागत से बन रहे गणगौर घाट का निर्माण इतना खराब है कि यह बारिश में बह सकता है। इसी तरह, 80 लाख रुपए की स्ट्रीट लाइट परियोजना में पूरे नगर में नए बिजली के खंभे और नई लाइनें डाली जानी थीं, लेकिन ठेकेदार ने पुराने खंभों पर ही लाइनें डालकर कम वोल्टेज के एलईडी बल्ब लगाए हैं, जिनकी गुणवत्ता भी खराब है। नहीं बन पाया नया बस स्टैंड इसके अतिरिक्त, 40 लाख रुपए की लागत से बनने वाले नए बस स्टैंड का निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके कारण नगर में आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडल अध्यक्ष वर्मा ने इन सभी अनियमितताओं की शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल को आवेदन के माध्यम से की है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने पाटी के विकास के लिए तीन बड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन आरईएस विभाग और ठेकेदार ने मनमानी करते हुए घटिया निर्माण कार्य किया है। पटेल ने स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घटिया निर्माण की शिकायत भेजी है। क्या कहते हैं स्थानीय लोग नगरवासी नरेंद्र राठौड़ ने बताया कि स्ट्रीट लाइट में सिर्फ दिखावे का कार्य किया जा रहा है। पुराने पोल पर ही एलईडी बल्ब लगाए जा रहे है जबकि नगर में नवीन स्ट्रीट लाइट के लिए नवीन पोल व एलटी लाइन डाली जानी थी। लेकिन पुराने पोल पर ही बल्ब लगाए जा रहे हैं। जिसमें भी घटिया कार्य किया जा रहा है। गणगौर घाट में भी मिट्टी वाली रेत का उपयोग किया गया। सीमेंट भी हल्की उपयोग में ली गई। जिससे वह कभी भी बह जाएगा। ग्रामीण सखाराम ने बताया कि स्ट्रीट लाइट का कार्य आरईएस विभाग द्वारा ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। स्ट्रीट लाइट में सिर्फ दिखावे का कार्य किया जा रहा है। एमपीबी के पुराने पोल पर ही एलईडी बल्ब लगाए जा रहे है। एक एलईडी बल्ब की किमत करीब 9 हजार रूपये से 14000 तक बताई जा रही। लेकिन नगर में एलईडी बल्ब चालू नहीं हो रहे। विभाग द्वारा हाई मास्क भी लगवाये गये लेकिन उनकी ऊचाई भी बहुत कम ली गई और वो भी चालू नहीं होते है। ठेकेदार द्वारा मन मर्जी से आधा अधूरा घटिया कार्य किया गया। इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाए और जल्द से जल्द कार्य को सही तरीके से करवाया जाए ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि सुभाष पटेल ने बताया कि आरईएस विभाग द्वारा नगर में स्ट्रीट लाइट व गोई नदी पर गणगौर घाट का निर्माण कार्य किया गया है। पंचायत को हैंडओवर नही किया गया है। दोनो ही कार्यो में गुणवत्ता की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही आगे क्या करना है वह स्पष्ट किया जाएगा। आरईएस विभाग ने घटिया निर्माण कार्य किया है। इसी के कारण हैंडओवर नहीं किया गया। जिम्मेदार बोले उधर एमपीईबी के जेई राजाराम बमनके ने बताया कि विभाग से नगर में लगने वाली स्ट्रीट लाइट के लिए एस्टीमेट मांगा था। जिसमें विभाग द्वारा 21 लाख का एस्टीमेट बनाकर दिया था। जिसमें 63 केवी का ट्रांसफार्मर व एलटी लाइन शामिल हैं। बाकी एस्टीमेन्ट आरईएस विभाग द्वारा बनाया गया। स्ट्रीट लाइट में डाली गई लाइन व बल्ब को चेक करने के बाद ही आगामी निर्णय लिया जाएगा। आरईएस विभाग के इंजीनियर दुर्गेश उइके ने बताया कि नगर में लगी स्ट्रीट लाइट में 60 व 90 वाल्ट के 200 बल्ब लगे हैं। इसके अलावा 8 हाईमास्क लगे हैं। हमारे एस्टीमेट में बल्ब,एलटी लाइन व हाईमास्क ही है। इसके अलावा अन्य कार्य एमपीईबी से किया गया है। 60 वाल्ट के बल्ब की कीमत 9791 व 90 वाल्ट के बल्ब की कीमत 14173 हैं। दोनो कार्य प्रगतिरत है दोनो ही कार्य एस्टीमेट के आधार पर किया गया है।
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