‘नेपाल में करप्शन बहुत ज्यादा बढ़ गया है। मंत्री जमकर घोटाला कर रहे हैं। सड़कों की हालत खराब है। हर कोई पैसा खा रहा है। मैं नेपाली नहीं हूं तो क्या हुआ, रहता तो यहीं हूं। अब यही मेरा घर है। नेपाली GenZ जो भी कर रहे थे, मैं उनके साथ खड़ा रहा। गोली लगन
.
काठमांडू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज करा रहे दानिश आलम बिहार के मोतिहारी के रहने वाले हैं। 9 सितंबर को सरकार के विरोध में प्रोटेस्ट शुरू हुआ, तो दानिश भी उसमें शामिल हो गए। उनके बाएं हाथ में गोली लगी है। 2 दिन चला प्रोटेस्ट शांत हो गया। प्रधानमंत्री केपी ओली को इस्तीफा देना पड़ा। पूर्व जस्टिस सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बन चुकी हैं।
इससे अलग पुलिस की गोलियों से घायल दानिश जैसे कई युवा हॉस्पिटल में इलाज करा रहे हैं। दानिश को खुशी है कि वे नेपाल के लिए जो चाहते थे, वो मिल गया।
दानिश आलम उम्र 20 साल, काठमांडू प्रोटेस्ट में दोस्तों के साथ गए, पुलिसवालों ने गोलियां बरसा दीं
हॉस्पिटल में हमने जिन घायलों से बात की, उनमें दानिश की उम्र सबसे कम सिर्फ 20 साल है।
दानिश काठमांडू के बलखू में रहते हैं। 12वीं पास कर चुके हैं और मैनेजमैंट की पढ़ाई के लिए कॉलेज में एडमिशन लेने वाले हैं। 10 साल पहले उनके माता-पिता बिहार से नेपाल आ गए थे। पिता काठमांडू में ही दुकान चलाते हैं।
दानिश बताते हैं, ‘9 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे घर के बाहर शोर होने लगा। मैंने देखा कि मेरे स्कूल के दोस्त प्रोटेस्ट में जा रहे हैं। मैं भी उनके साथ चल दिया। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और हम संसद भवन की ओर जा रही रैली में शामिल हो गए। इस तरह सभी GenZ प्रोटेस्ट का हिस्सा बन गए।’
‘बलखू से थोड़ा आगे कालीमाटी पुलिस स्टेशन है। रैली यहां पहुंची तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। भीड़ काबू के बाहर होने लगी, तब पुलिस ऊपरी मंजिल पर चली गई। पुलिसवाले बिल्डिंग की छत से गोलियां चलाने लगे।’
दानिश उस मंजर को याद करते हुए अब भी सिहर उठते हैं। वे कहते हैं, ‘मैंने खुद पुलिस को छत से फायरिंग करते देखा। वो रबर बुलेट नहीं, असली गोली चला रहे थे। मैं भीड़ में था। अचानक मेरे हाथ में दर्द सा उठा। मैंने दर्द वाली जगह पर हाथ लगाया, तो खून रिस रहा था। मेरे दोस्त मुझे लेकर हॉस्पिटल आए। टेस्ट के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बाजू पर गोली लगी है। गोली मेरी बाजू के आर-पार निकल गई थी।
‘बालेन शाह का फैन हूं, आर्मी पर यकीन है’ दानिश प्रदर्शन में शामिल होने गए थे, तो उन्हें लगा कि वे 2-3 घंटे में घर लौट आएंगे। ऐसा हुआ नहीं। उस दिन को याद करते हुए वे कहते हैं, ‘उस दिन मेरे साथियों में अलग ही जोश था। लग रहा था कि लड़के मिलकर कुछ भी तोड़ देंगे। कहीं भी चले जाएंगे। सब जला देंगे। हुआ भी ठीक वैसा ही।’
क्या सोचा था कि सरकार गिर जाएगी? दानिश जवाब देते हैं, ‘इतनी जल्दी सरकार गिर जाएगी, ऐसा तो नहीं लगा था। 8 सितंबर को पुलिस ने मेरे कुछ दोस्तों को गोलियों से मार दिया। इसके बाद सिर्फ युवा ही नहीं, हर कोई गुस्से से भर गया था। मुझे लग ही रहा था कि दूसरे दिन कुछ होगा।’दानिश आलम काठमांडू के मेयर बालेन शाह से बहुत प्रभावित हैं। कहते हैं,
बालेन शाह ईमानदार हैं, इसलिए मुझे पसंद हैं। मैं उनका फैन हूं। उन्हें प्रधानमंत्री बनना चाहिए।

प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद काठमांडू में हर जगह आर्मी तैनात है। अंतरिम प्रधानमंत्री चुनने की प्रोसेस में भी आर्मी का दखल रहा। इस बारे में दानिश कहते हैं, ‘हमें नेपाली आर्मी पर यकीन है। इसलिए सब उनकी बात मान रहे हैं।’
विजय अधिकारी उम्र 22 साल, काठमांडू फेसबुक पर प्रोटेस्ट का पता चला, गए तो पैर में 6 गोलियां लगीं

विजय अधिकारी की उम्र सिर्फ 22 साल है। वे काठमांडू के ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी वॉर्ड में वेंटिलेटर पर हैं।
विजय अधिकारी के बाएं पैर पर 6 गोलियां लगीं हैं। कुछ गोलियां ऑपरेशन करके निकाल दी गई हैं। कुछ अब भी पैर में धंसी हुई हैं। विजय जापानी भाषा की पढ़ाई करते हैं और अभी सेकेंड ईयर में हैं।
विजय को 8 सितंबर को गोलियां लगी थीं। उसी दिन प्रोटेस्ट में 19 युवाओं की मौत हुई थी। विजय को फेसबुक से पता चला कि जेनजी प्रोटेस्ट होने वाला है। उन्होंने दोस्तों से इस बारे में बात की। सबने मिलकर प्रोटेस्ट में जाने का प्लान बनाया। सुबह 9 बजे ही विजय घर से निकल गए।
विजय बताते हैं, ‘हम सुबह प्रदर्शन में जा रहे थे। मेरे साथ कई दोस्त आगे चल रहे थे। आगे पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अचानक से भगदड़ मच गई। पूरी भीड़ तितर-बितर हो गई। तभी पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिया।’
‘तभी हमने देखा कि पुलिसवालों ने अपनी राइफल निकाल ली। लोड करके फायरिंग पोजीशन ले ली। मेरे आगे खड़े दोस्त को गोली लगी। मैं उसे बचाने के लिए गया, तभी मेरे पैर पर गोलियां लगीं। पैर से खून निकलने लगा और मैं वहीं गिर गया। मेरे दोस्त मुझे हॉस्पिटल ले गए।’
‘हम बालेन शाह दाई (भाई) के मैसेज पर प्रदर्शन में शामिल होने गए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर ये मैसेज दिया था। केपी ओली ने हमें मारने का ऑर्डर दिया। 22 साल के स्टूडेंट के पैर में कोई 6 गोली कैसे मार सकता है। ऐसा तो नेपाल में राजशाही के समय भी नहीं हुआ। हम प्रदर्शन करने गए थे। उसका सबसे बड़ा कारण सरकारी भ्रष्टाचार और नेपो किड्स थे। सोशल मीडिया सिर्फ छोटा सा कारण था’
विजय अधिकारी आगे कहते हैं, ‘भारत में भ्रष्टाचार कम है, इसलिए वहां बहुत डेपवलपमेंट हुआ है। नेपाल में जितना भ्रष्टाचार हुआ है, उतना कहीं नहीं हुआ। हमने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो पैर में गोलियां मारी गईं। सीने पर गोलियां मारी गईं। अगर केपी ओली से बदला लेने के लिए मुझे जान भी देनी पड़ती, तो मैं तैयार था।’
राजू तमांग उम्र: 24 साल नेपो किड्स की वजह से गुस्सा पनप रहा था

राजू तमांग की उम्र 24 साल है। वे होटल में मैनेजर हैं। 8 सितंबर को प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
राजू कई दिनों से सोशल मीडिया पर नेताओं के बेटे-बेटियों के वीडियो देख रहे थे। इनमें कोई स्विटजरलैंड घूम रहा था, आलीशान लाइफ जी रहे थे। राजू इसे लेकर बहुत परेशान थे और अंदर ही अंदर गुस्सा भी पनप रहा था।
राजू कहते हैं, ‘प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। बहुत लोगों को मार दिया। मां-बाप ने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, लेकिन केपी ओली की गोली ने एक झटके में उनकी जान ले ली। ऐसे में कोई भी चुप कैसे रहेगा।’
राजू तमांग आगे कहते हैं कि हम न राजा का शासन चाहते हैं, न मौजूदा राजनीतिक पार्टियों में से किसी नेता को चाहते हैं। हां, काठमांडू के मेयर बालेन शाह पर मुझे यकीन है। इसके पहले जितने भी लोग और पार्टियों ने नेपाल पर राज किया, सबने धोखा ही दिया।’
नवीन तमांग उम्र 22 साल साउथ कोरिया जाने का ख्वाब, अब हॉस्पिटल में इलाज करा रहे

नवीन कोरियन भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। ये भाषा सीखकर साउथ कोरिया जाना चाहते हैं।
नवीन ने सोचा है कि साउथ कोरिया का वीजा मिल गया तो वहां कोई छोटा-मोटा काम कर लेंगे। नेपाल के मुकाबले वहां 10 गुना सैलरी मिलती है। नेपाल में न तो नौकरी है, न लाइफ। हालांकि वे अभी हॉस्पिटल में एडमिट हैं।
नवीन अकेले नहीं है। नेपाल में लाखों लोग हैं, जिनकी इतनी हसरत है कि किसी देश का वीजा लें और वहां काम करने के लिए चले जाएं। GenZ प्रोटेस्ट में नेपाल से पलायन भी बड़ा मुद्दा बना। नवीन प्रोटेस्ट का हिस्सा रहे हैं। उनके पैर में चोट आई है। वे हॉस्पिटल के बेड पर लेटे हुए हैं।
नवीन कहते हैं, ‘ये लड़ाई GenZ ने लड़ी और उन्हीं ने जीती है। इसलिए अब राजनीति भी युवाओं को ही करनी चाहिए। केपी शर्मा ओली को नेपाल से निकाल देना चाहिए।’
प्रोटेस्ट में 51 लोगों की मौत, इनमें एक भारतीय नेपाल पुलिस के प्रवक्ता रमेश थापा के मुताबिक, प्रदर्शन में कुल 51 लोगों की मौत हुई है। इसमें 3 पुलिसवाले हैं। एक भारतीय नागरिक भी है। स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 8 सितंबर से हुए प्रदर्शनों में 30 लोगों की मौत गोली लगने से हुई, जबकि 21 लोग जलने, घायल होने और दूसरी चोटों से मारे गए।
नई सरकार बनने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर हालात सामान्य नेपाल में नई सरकार बनने के साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर हालात सामान्य होने लगे हैं। यूपी के बहराइच में रुपईडीहा बॉर्डर पर कारों, बाइक, पैदल यात्रियों और ट्रकों का आना-जाना फिर से शुरू हो गया। हालांकि आम लोगों की आवाजाही अभी कम ही है।
सशस्त्र सीमा बल की 42वीं बटालियन के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने बताया कि हालात सामान्य होने की वजह से हमने आज किसी को नहीं रोका। आमतौर पर करीब 50 लोग लोग हर दिन रुपईडीहा सीमा पार करते हैं। 13 सितंबर को करीब 20 हजार लोगों ने ही बॉर्डर पार किया।

काठमांडू में भी हालात पहले से सामान्य हो रहे हैं। सड़कों को लोग निकल रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली पर FIR नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ राजधानी काठमांडू में FIR दर्ज की गई है। ओली पर आरोप है कि 8 सितंबर को आंदोलन शुरू हुआ, तब उन्होंने पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर हमले और ज्यादती का आदेश दिया था।
ओली ने भारी दबाव के बीच 9 सितंबर को पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही वे आर्मी की सुरक्षा में हैं।
घायलों से मिलने पहुंची सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम पीएम सुशीला कार्की घायल आंदोलनकारियों से मिलने काठमांडू के हॉस्पिटल पहुंची। उन्हें 5 मार्च, 2026 तक संसदीय चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

सुशीला कार्की घायलों से मिलने हॉस्पिटल पहुंची। वे 12 सितंबर को ही नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनी हैं।
उधर, 6 दिनों की हिंसा के बाद काठमांडू के कई इलाकों से कर्फ्यू हटा दिया गया है। 6 जगहों पर अब भी कर्फ्यू जारी है। यहां 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, भूख हड़ताल, धरना, घेराव, जुलूस और सभा करने पर रोक लगा दी गई है। नोटिस में कहा गया है कि यह आदेश दो महीने तक लागू रहेगा।
…………………
नेपाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए…
पूर्व PM-वित्त मंत्री को पीटा, संसद-सुप्रीम कोर्ट जलाए, लोग बोले- हमारी सरकार करप्ट गैंग

नेपाल की संसद, सुप्रीम कोर्ट, पॉलिटिकल पार्टियों के ऑफिस, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री-मंत्रियों के घर और सबसे खास काठमांडू का सिंह दरबार, सब एक दिन में जल गया। पूरे काठमांडू के आसमान में काला धुआं दिख रहा है। पूर्व PM झालानाथ खनाल की पत्नी को जिंदा जला दिया गया। 20 से 25 साल के लड़के-लड़कियां सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। इनका कहना है कि हमारी सरकार करप्ट है। पढ़िए पूरी खबर…
