मंदसौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई। वे गांधीसागर रिट्रीट फेस्टिवल के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। शनिवार सुबह कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हॉट एयर बैलून में सवार हुए। उड़ान भरने से पहले ही अचानक तेज हवा चलने ल
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बैलून में गर्म हवा भरने वाले बर्नर की आग बैलून के कोने में लगे कपड़े तक पहुंच गई। सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बैलून को संभालते हुए सीएम को बमुश्किल बास्केट (गोंडोला) से नीचे उतारा।
इस घटनाक्रम के बाद मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने कहा कि ‘मौके पर हादसे जैसा कुछ नहीं था। बैलून में सुरक्षा के संबंध में किसी प्रकार की कोई चूक नहीं हुई है। सीएम केवल एयर बैलून को देखने के लिए गए थे।
हॉट एयर बैलून के लिए भी पायलट लाइसेंस जरूरी
भारत में हॉट एयर बैलून उड़ाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से एयर ऑपरेटर परमिट लेना जरूरी है। डीजीसीए बैलून की मेकिंग क्वालिटी, बर्नर, बॉस्केट समेत सभी की जांच के बाद लाइसेंस जारी करती है। बैलून उड़ाने वाले पायलट को भी डीजीसीए से ‘बैलून पायलट लाइसेंस’ लेना जरूरी है।
बैलून उड़ाने के लिए प्रोपेन गैस का इस्तेमाल होता है। लीकेज से लपटें फैल सकती हैं। बैलून उड़ाने का सही समय सुबह या शाम होता है, जब हवा शांत रहती है। हवा तेज हो तो बैलून का कपड़ा (एनवेलप) झुक जाता है, बर्नर की लपटें कपड़े को छू सकती है।
बैलून में पहले ठंडी हवा और फिर गर्म हवा डाली जाती है। इस दौरान अगर कपड़े का हिस्सा नीचे गिर जाए और बर्नर का फ्लेम उसके पास आ जाए, तो आग लग सकती है।
देखिए घटनाक्रम की 5 तस्वीरें…
बैलून में आग लगने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई, सुरक्षाकर्मी फौरन दौड़े।

हॉट एयर बैलून में लगी आग को बुझाया गया। इस दौरान सीएम को कवर किया गया।

गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के पास CM हॉट बैलून में सवार हुए, लेकिन बैलून उड़ नहीं सका।

बैलून की ट्रॉली में सवार सीएम मोहन यादव खुद उसे संभाले खड़े रहे।

हवा की रफ्तार ज्यादा होने से हॉट एयर बैलून बड़ी मुश्किल से कंट्रोल हुआ।
कंपनी-पायलट ने कहा- लाइसेंस जरूरी नहीं है
बैलून उड़ाने वाले पायलट इरफान ने कहा कि इस काम में लाइसेंस की जरूरत नहीं। मेरे पास 8 साल का अनुभव है। इवेंट कंपनी के मैनेजर सौरभ गुप्ता ने भी सफाई दी कि हवा को गर्म करना जरूरी है, ताकि बैलून गर्म हवा के साथ ऊपर उठे। 80 फीट के करीब बैलून उड़ता है। कम ऊंचाई पर लाइसेंस जरूरी नहीं है।
कंपनी यूपी में 2020 में ब्लैकलिस्ट, 2021 में बहाल
पर्यटन विभाग ने आयोजन की जिम्मेदारी गुजरात की ‘लल्लूजी एंड संस’ कंपनी को दी है। विभाग के अनुसार, इसी कंपनी ने 2019 में प्रयागराज अर्धकुम्भ में टेंट सिटी लगाई थी। बाद में मेला प्राधिकरण व कंपनी के बीच विवाद हुआ। विवाद के कारण प्राधिकरण ने 2020 में कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
कंपनी ने इसके खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया। 2021 में प्राधिकरण व कंपनी के बीच आउट-ऑफ-कोर्ट समझौता हुआ, और ब्लैकलिस्टिंग का आदेश वापस ले लिया। विवाद 107 करोड़ के फर्जी बिलों के भुगतान का था।
सांसद के साथ हॉट एयर बैलून में बैठे थे मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता के साथ हॉट एयर बैलून के रोमांचकारी सफर पर निकल रहे थे, लेकिन उस समय हवा की रफ्तार ज्यादा थी। इस वजह से बैलून उड़ नहीं सका।
जब उसमें एयर भरी जा रही थी, वह नीचे झुक गया। जिससे निचले हिस्से में आग लग गई। इसके ठीक नीचे सीएम थे। इसके चलते सीएम सिक्योरिटी भी अलर्ट हुई और ट्रॉली को संभाले रखा। दूसरी ओर, एक्सपर्ट और कर्मचारियों ने आग को बुझाया।
कलेक्टर बोलीं- सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया कलेक्टर अदिति गर्ग ने बयान जारी कर कहा कि एयर बैलून में सुरक्षा के संबंध में किसी तरह की कोई चूक नहीं हुई है। मुख्यमंत्री जी केवल एयर बैलून को देखने के लिए गए थे। हॉट एयर बैलून, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, गर्म हवा का गुब्बारा होता है।

बैलून में हवा की रफ्तार जीरो होनी चाहिए एक्सपर्ट ने बताया कि सुबह 6 से 7:30 बजे के बीच हवा की रफ्तार न के बराबर रहती है। हॉट एयर बैलून में हवा की रफ्तार जीरो होनी चाहिए, लेकिन जब सीएम सवार हुए, तब रफ्तार 15 से 20 किमी प्रतिघंटा तक थी। इस वजह से बैलून ऊपर नहीं जा सका।
बैलून का कपड़ा फायर प्रूफ, पूरी तरह सेफ हॉट एयर बैलून पायलट इरफान ने कहा कि यह बैलून एलपीजी से चलता है। इसमें दो सिलेंडर लगते हैं। जैसे ही एलपीजी से हीट देंगे तो ऊपर जाएगा। नीचे लाने के लिए भी हीट देनी पड़ती है। बर्नर में आग एलपीजी से ही लग रही है।
बर्नर को खड़ा रखेंगे, तभी बैलून में हीट जाएगी। क्लोज करने के समय ही बर्नर को बंद करते हैं। बैलून का कपड़ा फायर प्रूफ है। वह पूरी तरह से सेफ है। मैंने केरला में इसकी ट्रेनिंग ली है। सात साल से इसे चला रहा हूं। मैंने कई राइड कराई हैं।

हॉट एयर बैलून के पायलट इरफान बैलून ऑपरेटिंग सिस्टम को समझाते हुए।
सीएम बोले- कहां विदेश जाना? यही पर सब कुछ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गांधीसागर महासागर के समान है। यहां प्राकृतिक रूप से भी वन्यजीव संपदा है। मैं रात में यही रुका था और वाटर एक्टिविटी में शामिल हुआ। पर्यटकों के लिए यह स्वर्ग समान है। कहां विदेश जाना? यही पर ऐसी धरोहर और स्पॉट हैं।

