भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठनों ने मोगा-फिरोजपुर रोड स्थित कोऑपरेटिव बैंक के सामने धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पंजाब सरकार द्वारा प्रति एकड़ कर्ज सीमा बढ़ाने के फैसले को वापस लेने के विरोध में किया गया। किसानों ने इस निर्णय को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत दोबारा लागू करने की मांग की है। एगों ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि कोऑपरेटिव सोसायटियों से जुड़े किसानों में सरकार के इस कदम से भारी रोष है। पंजाब सरकार ने सात साल बाद प्रति एकड़ कर्ज की सीमा 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 39 हजार रुपये करने का सराहनीय फैसला लिया था, लेकिन कुछ समय बाद इसे वापस ले लिया गया। जिला प्रधान निर्मल सिंह बोले- ये किसानों के साथ नाइंसाफी भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान निर्मल सिंह मानूके ने इसे किसानों के साथ बड़ी नाइंसाफी बताया। उन्होंने कहा कि महंगाई को देखते हुए यह बढ़ोतरी आवश्यक थी। जिन किसानों ने अपना पिछला कर्ज समय पर चुका दिया है, उन्हें अब नया कर्ज नहीं मिल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट गहरा रहा है। मानूके ने चेतावनी दी कि यदि समय पर कर्ज उपलब्ध नहीं कराया गया, तो न केवल किसान डिफॉल्टर हो जाएंगे, बल्कि कोऑपरेटिव सोसायटियां भी संकट में आ जाएंगी। किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव सोसायटियां किसानों पर खाद के साथ नैनो यूरिया और अन्य गैर-जरूरी सामान खरीदने का दबाव डाल रही हैं, जिसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोसायटियों और बैंकों का मूल उद्देश्य किसानों की सहायता करना है, लेकिन कुछ अधिकारी और बोर्ड सदस्य अपने निजी लाभ के लिए नीतियां बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त, किसानों ने मांग की कि प्राइमरी कृषि विकास बैंकों से जुड़े लंबे समय से डिफॉल्टर चल रहे किसानों को वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) की सुविधा दी जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से फिर से मजबूत हो सकें। निर्मल सिंह बोले- पुराने और नए कर्ज माफ करने के लिए नई नीति बनाई जाए निर्मल सिंह मानूके ने कहा कि ये कोऑपरेटिव बैंक और सोसायटियां हमारे बुजुर्गों की मेहनत और योगदान से बनी थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि हद कर्ज में बढ़ोतरी वापस ली जा सकती है तो बैंक अधिकारियों की बढ़ी हुई तनख्वाह और डीए भी वापस जमा करवाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के पुराने और नए कर्ज माफ करने के लिए नई नीति बनाई जाए, क्योंकि कई किसान पुराने कर्ज को नए कर्ज से चुकाने के लिए मजबूर हैं और कर्ज के चक्र में फंसे हुए हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बढ़ाया गया हद कर्ज दोबारा लागू नहीं किया और अन्य मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आने वाले समय में बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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