वाशिंगटन डीसी7 मिनट पहले
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स्पेन के कैनरी द्वीप स्थित टेनेरिफ एयरपोर्ट पर हंटा वायरस प्रभावित क्रूज शिप ‘MV होंडियस’ से उतरे यात्रियों पर विमान में बैठने से पहले स्पेनिश अधिकारियों ने डिसइन्फेक्टेंट स्प्रे किया था।
हंतावायरस के संपर्क में आए 3 और लोगों में संक्रमण मिला है। इनमें एक अमेरिकी और एक फ्रांसीसी यात्री शामिल हैं, जो पहले अपने-अपने देश लौट चुके थे। वहीं, मैड्रिड में क्वारैंटाइन एक स्पेनिश नागरिक की शुरुआती रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।
अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है। 11 अप्रैल को एक बुजुर्ग डच यात्री की जहाज पर मौत हुई थी। उनकी पत्नी बाद में दक्षिण अफ्रीका में मृत मिलीं। 2 मई को एक जर्मन महिला की जहाज पर मौत हो गई।
ये सभी यात्री ‘MV होंडियस’ नाम की उस क्रूज शिप से लौटे हैं, जहां वायरस के मामले सामने आए थे। यह जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स में रुका था। WHO के मुताबिक जहाज से जुड़े हंटावायरस के 9 केस कन्फर्म हो चुके हैं।
WHO ने जहाज से लौटने वाले सभी लोगों के लिए 42 दिन आइसोलेशन की सिफारिश की है। हालांकि अमेरिकी CDC ने कहा कि वायरस का इंसान से इंसान में फैलना दुर्लभ है और इसे कोविड जैसी महामारी नहीं माना जाना चाहिए।
इससे पहले सोमवार को हंता वायरस के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को अमेरिका के नेब्रास्का मेडिकल सेंटर लाया गया। यहां उन्हें 42 दिनों तक निगरानी और क्वारंटीन में रखा जाएगा।

हंता वायरस के लक्षण दिखने में 8 हफ्ते तक लग सकते हैं
हंता वायरस से इंसानों की किडनी फेल होने का खतरा होता है। कई मामलों में मरीज को तेज बुखार, शरीर दर्द, सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी होने लगती है। हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भर सकता है और जान का खतरा भी हो सकता है।
इंसानों में हंता वायरस के लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्ते लग जाते हैं, लेकिन इसके बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है। WHO के मुताबिक, हंता वायरस की चपेट में आने वालों में से 35-40% की मौत 6 हफ्तों के अंदर हो जाती है।
जानवरों से फैलता है यह वायरस
हंता वायरस एक खतरनाक वायरस है, जो ज्यादातर चूहों और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। यह उनके मल, पेशाब और लार में पाया जाता है। इसका नाम दक्षिण कोरिया की “हंटन” नदी के नाम पर रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हंता वायरस की “एंडीज” नाम की एक खास किस्म इंसान से इंसान में भी फैल सकती है। यह संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक, साथ खाना खाने या एक ही बिस्तर पर सोने से फैल सकता है। मरीज की देखभाल करने वालों को ज्यादा खतरा रहता है।
इस वायरस का पहला मामला 1993 में अमेरिका में सामने आया था। उस समय एक अमेरिकी दंपत्ति की मौत हुई थी। जांच में उनके घर के आसपास चूहों के बिल और वायरस के निशान मिले थे।
अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल हंता वायरस के करीब 1.5 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से ज्यादातर यूरोप और एशिया के होते हैं।
इनमें से आधे से ज्यादा मामले चीन से होते हैं। 2018 में अर्जेंटीना की एक बर्थडे पार्टी में यह वायरस 34 लोगों में फैल गया था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी।

संक्रमित इंसान के करीबी संपर्क से हंता वायरस होता है
अधिकारियों के मुताबिक, हंतावायरस आसानी से नहीं फैलता। यह केवल उस व्यक्ति के बहुत करीबी संपर्क से फैल सकता है जिसमें लक्षण दिखाई दे रहे हों।
यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के कार्यवाहक निदेशक जय भट्टाचार्य ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि कौन-कौन लोग संक्रमित व्यक्ति के करीब थे। उसी हिसाब से उन्हें कम, मध्यम या ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर किसी यात्री का संक्रमित व्यक्ति से करीबी संपर्क नहीं था, तो उसे कम खतरे वाला माना जाएगा।
हालांकि, यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमित चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है। इंसान से इंसान में फैलने के मामले बहुत कम देखे गए हैं।
हंता वायरस का अभी कोई इलाज नहीं
हंता वायरस का अभी कोई खास इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों के हिसाब से इलाज करते हैं ताकि उसकी हालत ज्यादा खराब न हो।
अगर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है, तो उसे ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की मदद दी जाती है। शरीर में पानी और ब्लड प्रेशर संतुलित रखने के लिए दवाएं और फ्लूइड दिए जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि जल्दी पहचान और समय पर इलाज से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बुखार, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

कुछ लोगों को घर भेजा जा सकता है
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच के बाद कुछ यात्रियों को घर जाने की इजाजत दी जा सकती है। हालांकि, उन्हें सुरक्षित तरीके से भेजा जाएगा ताकि रास्ते में किसी और को खतरा न हो।
घर पहुंचने के बाद भी लोकल स्वास्थ्य विभाग और सीडीसी उनकी लगातार निगरानी करेंगे।
CDC के मुताबिक, वायरस के संपर्क में आने के बाद 42 दिनों तक निगरानी जरूरी होती है। अगर इस दौरान किसी को बुखार या दूसरे लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत खुद को अलग करना होगा।
खास मेडिकल सेंटर में रखा गया
नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में अमेरिका की खास नेशनल क्वारंटीन यूनिट है। यह अमेरिका की इकलौती फेडरल फंडेड क्वारंटीन सुविधा है। यहां के कमरों में खास नेगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम लगाया गया है, जिससे वायरस हवा में फैल नहीं पाता।
अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को स्ट्रेचर पर नहीं लाया गया। वे खुद विमान से उतरकर गाड़ियों में बैठे और सीधे अपने क्वारंटीन कमरों में पहुंचे।
डॉक्टर माइकल वाडमैन ने बताया कि यहां रहने की व्यवस्था होटल जैसी है। लोगों को कमरे में खाना मिलेगा, वे हल्की एक्सरसाइज कर सकेंगे और रोजाना उनकी जांच होगी।
अगर कोई यात्री बीमार होता है, तो उसे अस्पताल की बायोकंटेनमेंट यूनिट में शिफ्ट किया जाएगा, जहां खतरनाक संक्रामक बीमारियों का इलाज किया जाता है।

नेब्रास्का मेडिकल सेंटर अमेरिका का एक खास अस्पताल है, जहां खतरनाक और संक्रामक बीमारियों के मरीजों के इलाज और क्वारंटीन की विशेष सुविधा मौजूद है।
भारत में आ चुके हैं हंता वायरस के मामले
2007 में आंध्र प्रदेश में एक 46 साल के व्यक्ति को यह संक्रमण हुआ था। नेचर जर्नल में प्रकाशित आर्टिकल के मुताबिक 2008 में चूहे और सांप पकड़ने वाले 28 लोगों में संक्रमण मिला।
सबसे हालिया केस 2016 का है। इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के मुताबिक, मुंबई में हंता वायरस से एक महिला की मौत हुई थी।
महिला को डिलिवरी के 8 दिन बाद पेट में तेज दर्द, बुखार और चक्कर आने लगे। ब्लड प्रेशर कम हुआ और सांस लेने में परेशानी होने लगी। 10 दिन में उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में वायरस की पुष्टि हुई।
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