हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल में लोकतंत्र की एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जहाँ ‘कूट’ और ‘बधाल’ ग्राम पंचायतों ने आपसी सहमति से अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है। इन दोनों पंचायतों में प्रधान, उप-प्रधान और सभी वार्ड सदस्यों को निर्विरोध चुना गया है। स्थानीय निवासियों ने चुनाव के शोर और प्रतिद्वंद्विता को त्यागकर आपसी भाईचारे को प्राथमिकता दी है, जिसे पूरे क्षेत्र में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है। कूट ग्राम पंचायत में सुषमा देवी बनी प्रधान ग्राम पंचायत कूट में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से सुष्म देवी को प्रधान और विक्रम सिंह को उप-प्रधान पद के लिए चुना है। इसके साथ ही पाँचों वार्डों में भी निर्विरोध निर्वाचन संपन्न हुआ। वार्ड नंबर 1 से सीमा रानी, वार्ड 2 से राजेश कुमार, वार्ड 3 से संतोष कुमारी, वार्ड 4 से राधा देवी और वार्ड 5 से यशवंत अब पंचायत के विकास कार्यों में अपना सहयोग देंगे। पूरी पंचायत का निर्विरोध चुना जाना गाँव की अटूट एकता को दर्शाता है।
ग्राम पंचायत बधाल: किना देवी और संजय चौहान को मिली जिम्मेदारी बधाल पंचायत में भी कूट की तरह ही एकता का दृश्य देखने को मिला। यहाँ किना देवी को प्रधान और संजय चौहान को उप-प्रधान के रूप में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। वार्ड सदस्यों के तौर पर रेखा कुमारी, सरिता देवी, ज्ञानेश्वरी, मीना और प्रवीण कुमार का चयन भी सर्वसम्मति से हुआ। ग्रामीणों का मानना है कि चुनाव के खर्च और आपसी रंजिश से बचकर अब सभी का ध्यान केवल गाँव के विकास और समस्याओं के समाधान पर केंद्रित रहेगा। विकास को मिलेगी गति: प्रोत्साहन राशि से संवरेंगे गाँव सरकारों द्वारा अक्सर निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों को विशेष ‘प्रोत्साहन राशि’ देने का प्रावधान किया जाता है। स्थानीय निवासियों में इस बात की खुशी है कि चुनाव न होने के कारण अब विकास के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध होगा। इस राशि का उपयोग सीधे सड़क, पानी, शिक्षा और स्वच्छता जैसे बुनियादी ढांचों को सुधारने में किया जा सकेगा। क्षेत्रवासियों ने इस पहल को आपसी एकता और सामूहिक विकास की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम बताया है। सद्भाव और समझदारी का संदेश रामपुर की इन दोनों पंचायतों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि ग्रामीण आपस में समझदारी और तालमेल दिखाएं, तो बिना किसी विवाद के भी सक्षम नेतृत्व का चयन संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्विरोध निर्वाचन से न केवल सरकारी मशीनरी और धन की बचत होती है, बल्कि गाँव का सामाजिक ताना-बाना भी मजबूत होता है। अब इन नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के कंधों पर अपनी पंचायतों को आदर्श पंचायत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
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