अरांई के डांग गांव में दो श्रमिकों की मौत के बाद उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। हालांकि अस्पताल में मोर्चरी जर्जर होने का हवाला देते हुए डॉक्टर ने पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया। इस पर ग्रामीण और परिजन भड़क गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने तर्क दिया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यहां पोस्टमार्टम नहीं होना सरकार की बड़ी कमी है। उन्होंने अरांई में ही पोस्टमार्टम कराने की मांग पर जोर दिया। उपखंड अधिकारी नीतू मीणा और तहसीलदार प्रेम सुख वैष्णव ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी बात नहीं बनी। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के बेटे और भाजपा नेता सुभाष चौधरी ने मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने एक अस्थायी पोस्टमार्टम कक्ष की व्यवस्था करवाकर अरांई सीएचसी में ही पोस्टमार्टम करवाने पर सहमति बनवाई। इसके बाद दोनों श्रमिकों का पोस्टमार्टम अरांई में ही संपन्न हुआ, जिसके लिए ग्रामीणों ने सुभाष चौधरी का आभार व्यक्त किया। अस्पताल भवन के जर्जर होने के कारण मोर्चरी लंबे समय से बंद है और पोस्टमार्टम के लिए शवों को किशनगढ़ भेजा जाता है। ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और युवा भाजपा नेता सुभाष चौधरी से अरांई में शीघ्र पोस्टमार्टम सेवाएं शुरू करवाने की मांग की। इस दौरान मंडल अध्यक्ष शिवरतन सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष निर्मल कुमार, जतन चौधरी और समाजसेवी शिवराज बागड़ी सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
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