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आज का एक्सप्लेनर: क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए

आज का एक्सप्लेनर:  क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए


17 मई की शाम। थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी।

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आखिर रजनीकांत के विजय से जलन की बात क्यों उठी, क्या वो विजय को सीएम नहीं बनने देना चाहते थे; इससे जुड़ी पूरी कहानी जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: रजनीकांत और विजय के बीच क्या मसला है? जवाब: रजनीकांत ने 1975 में तमिल फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। फिल्म थी- के बालाचंदर की ‘अपूर्व रागंगल’। 1980 के दशक में ‘बिल्ला’, ‘थिल्लू-मुल्लू’ जैसी फिल्मों के बाद उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला, जो 5 दशकों से जारी है। इधर विजय ने भी 1966 में अपनी पहली बड़ी हिट फिल्म दी। लेकिन ‘थलापति’ और सुपरस्टार वाला दर्जा उन्हें 2007 में आई ‘पोक्किरी’ से मिला। ‘सुपरस्टार’ के टैग पर विजय और रजनीकांत के फैंस अक्सर सोशल मीडिया पर भिड़ जाते हैं, लेकिन दोनों एक्टर्स के बीच सार्वजनिक रूप से कोई तनातनी नहीं दिखी हालांकि विजय के राजनीति में आते ही यह बदल गया-

  • फरवरी 2024 में जिस दिन विजय ने अपनी पार्टी TVK लॉन्च की, उसी दिन एक कार्यक्रम में रजनीकांत ने तब सीएम रहे एमके स्टालिन को ‘राष्ट्रीय राजनीति का उभरता हुआ सितारा’ कहा।
  • 4 मई 2026 को जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो विजय की TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की। DMK सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई। स्टालिन अपनी सीट भी हार गए। ऐसे में 6 मई को रजनीकांत स्टालिन से मिलने उनके घर पहुंचे।
  • तभी खबरें आई कि DMK और AIADMK भी सरकार बनाने के लिए साथ आने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों की बातचीत में रजनीकांत की भूमिका होने के कयास लगाए जाने लगे।
  • 10 मई को विजय ने कांग्रेस और कुछ अन्य दलों का समर्थन जुटाकर सरकार बना ली और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
  • 2 दिन बाद एयरपोर्ट से निकलते हुए जब रजनीकांत से विजय के सीएम बनने पर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वे मुस्कुराते हुए और हाथ जोड़कर निकल गए।

चेन्नई एयरपोर्ट पर रजनीकांत से विजय के सीएम बनने से जुड़े सवाल का जवाब नहीं दिया। सोशल मीडिया पर विजय के फैंस को रजनीकांत का यह रुख पसंद नहीं आया। वो कहने लगे कि ‘थलाइवा जलते हैं।’ धीरे-धीरे ये ट्रेंड करने लगा।

सवाल-2: रजनीकांत का राजनीति से क्या रिश्ता रहा है?

जवाब: रजनीकांत के फिल्मों में आने के एक दशक बाद ही उनकी राजनीति में आने की चर्चा शुरू हो गई थी। वजह थी उनकी राजनीतिक बयानबाजियां, पार्टियों से नजदीकी और दमदार फैन बेस…

1996: जयललिता पर बयान, सरकार बदलने का क्रेडिट मिला

  • 1990 के दशक में रजनीकांत की पॉपुलैरिटी चरम पर थी। तब तमिलनाडु में सीएम जे. जयललिता और उनकी पार्टी AIADMK के खिलाफ नाराजगी थी।
  • रजनीकांत ने विपक्षी DMK गठबंधन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर जयललिता दोबारा CM बनीं, तो तमिलनाडु को भगवान भी नहीं बचा सकता।’
  • चुनाव में जयललिता हार गईं। DMK गठबंधन की जीत का क्रेडिट काफी हद तक रजनीकांत को दिया गया।
  • इस समय AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही कांग्रेस का एक धड़ा रजनीकांत को सीएम चेहरा बनाना चाहता था। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।

2002-2014: BJP को समर्थन, मोदी से मिले, कई बार चुनाव लड़ने के संकेत

  • कावेरी जल विवाद और नदियों को जोड़ने के मुद्दे पर एक बड़ा जन आंदोलन शुरू किया। उन्होंने जनसभाएं कीं, लेकिन राजनीति में एंट्री से इनकार करते रहे।
  • फिर 2004 लोकसभा चुनाव में BJP-AIADMK गठबंधन को समर्थन दिया। वे कई रैलियों और जनसभाओं में BJP नेताओं के साथ नजर आए। हालांकि, ये गठबंधन चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाया।
  • PM मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले रजनीकांत के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद उनके BJP के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चाएं शुरू हुई।
PM मोदी ने अप्रैल 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रजनीकांत से मिले थे। हालांकि, रजनीकांत ने मुलाकात को दोस्ताना बताया और चुनाव लड़ने के सवालों को खारिज कर दिया।

PM मोदी ने अप्रैल 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रजनीकांत से मिले थे। हालांकि, रजनीकांत ने मुलाकात को दोस्ताना बताया और चुनाव लड़ने के सवालों को खारिज कर दिया।

2017-2021: पार्टी बनाने का ऐलान, लेकिन बिना चुनाव लड़े ही संन्यास

  • 2017 में रजनीकांत ने चेन्नई के एक कार्यक्रम में कहा, ‘मेरा राजनीति में आना तय है। मैं अपनी पार्टी बनाऊंगा और 2021 का विधानसभा चुनाव भी लड़ूंगा।’
  • रजनीकांत के इस ऐलान के बाद कुछ ही घंटों में 3 लाख फैंस ने उनके फैन प्लेटफॉर्म RajiniMandaram.org पर सपोर्ट में रेजिस्ट्रेशन कर दिया।
  • 15 मार्च 2018 को रजनीकांत ने रजनी मक्कल मंड्रम, यानी RMM नाम का संगठन बनाया। इससे वे अपने फैन क्लब्स को एक राजनीतिक पार्टी में बदलना चाहते थे।
2018 में RMM की यूथ विंग के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते रजनीकांत।

2018 में RMM की यूथ विंग के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते रजनीकांत।

  • 10 दिसंबर 2020 को, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के 5 महीने पहले रजनीकांत ने ऐलान किया कि वो जनवरी 2021 में पार्टी लॉन्च करेंगे।
  • 19 दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर 3 पन्नों का लेटर लिखकर घोषणा की कि खराब तबीयत और कोविड महामारी के चलते वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
  • उन्हें ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव के बाद अस्पताल ले जाया गया था। इस पर उन्होंने लिखा, ‘मैं इसे भगवान की चेतावनी समझ रहा हूं। चुनाव प्रचार से मेरे स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।’
  • 12 जुलाई 2021 को 71 साल के रजनीकांत ने अपने संगठन RMM को औपचारिक रूप से भंग कर दिया।
रजनीकांत के राजनीति छोड़ने के फैसले के अगले ही दिन उनके समर्थक पोस्टर लेकर पहुंचे। घर के बाहर रजनीकांत से फैसला बदलने की भी अपील की।

रजनीकांत के राजनीति छोड़ने के फैसले के अगले ही दिन उनके समर्थक पोस्टर लेकर पहुंचे। घर के बाहर रजनीकांत से फैसला बदलने की भी अपील की।

सवाल-3: रजनीकांत राजनीति में विजय जैसा करिश्मा क्यों नहीं दिखा पाए?

जवाब: 4 बड़े कारण हैं-

1. फैन बेस को कैडर में तब्दील नहीं कर पाए

  • रजनीकांत ने 2017 में ही ऐलान कर दिया था कि वे 2021 में तमिलनाडु की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 2018 में जो RMM बना वो बस एक फैन क्लब की री-ब्रांडिंग की तरह था।
  • अगले तीन साल में न पार्टी बनी, न पार्टी का नाम तय हुआ, न कोई लोगो और न ही कोई तय आइडियोलॉजी।
  • दूसरी तरफ विजय के फैंस का संगठन, उनकी पार्टी बनने के पहले ही ग्रासरूट पर एक्टिव हो गया था। उन्होंने ब्लड डोनेशन, डिजास्टर मैनेजमेंट, एजुकेशन कैंप और समाज सेवा की।
  • 2021 के लोकल बॉडी इलेक्शन में भी विजय समर्थित उम्मीदवार उतरे थे। विधानसभा चुनाव से देढ़ साल पहले ही सितंबर 2024 में ही विजय ने TVK लॉन्च कर दी थी।

2. द्रविड़ियन राजनीति में फिट नहीं बैठे थलाइवा

  • रजनीकांत ने 2016 में जयललिता के निधन के बाद राजनीति में एंट्री ली। अनुमान था कि वो जयललिता का वैक्यूम भरेंगे।
  • लेकिन रजनीकांत महाराष्ट्रीयन हैं। उनका जन्म बेंगलुरू में हुआ है। ये बात द्रविड़ियन राजनीति वाले राज्य में फिट नहीं बैठती।
  • रजनीकांत आध्यात्मिक राजनीति का आइडिया लेकर आए। तमिलनाडु में द्रविड़ियन पहचान, धर्म और आस्था से बड़ा मुद्दा है। द्रविड़ियन पार्टियों ने रजनीकांत के आइडिया की तुलना बीजेपी की आइडियोलॉजी से की।
  • रजनीकांत की बीजेपी से नजदीकी भी कोई राजनीतिक फायदा नहीं दिला सकी, क्योंकि तमिलनाडु में बीजेपी की कोई खास पकड़ नहीं है।
  • विजय की आइडियोलॉजी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, समानता और बदलाव की रही। उन्होंने शुरुआत से ही साफ रखा।

3. आधे-अधूरे मन से शुरुआत, कमिटमेंट पर संदेह

  • रजनीकांत 1980 के दशक से राजनीतिक बयान देते आए हैं। पहले उन्होंने DMK का समर्थन किया। 2014 के बाद BJP से भी उनकी नजदीकियां दिखी।
  • 2017 में राजनीति में आने की घोषणा से 2020 में पार्टी भंग करने तक, 4 फिल्में रिलीज हुईं। जिससे उनके राजनीतिक कमिटमेंट पर सवाल उठे।
  • दूसरी तरफ जब विजय ने 2024 में TVK बनाई, तब से अब तक उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है। उनकी आखिरी फिल्म ‘जना नायकन’ इसी साल रिलीज हो सकती है। उन्होंने साफ किया कि राजनीति में आने के बाद सिर्फ जनता की सेवा करेंगे।

4. रजनीकांत ने एंट्री में देरी कर दी

  • रजनीकांत ने 67 साल की उम्र में राजनीति में आने की घोषणा की, जबकि विजय 52 साल की उम्र में सीएम बन गए।
  • राजनीति में आने की घोषणा से एक साल पहले उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से सड़कों पर उतरकर चुनाव प्रचार करना और खुद को बदलाव का चेहरा बता पाना मुमकिन नहीं था।
रजनीकांत ने 31 दिसंबर 2017 को फैंस से भरे ऑडिटोरियम में राजनीति में एंट्री का ऐलान किया। तब उन्होंने कहा था, ‘पिछले एक साल में तमिलनाडु की राजनीति से लोगों का सिर शर्म से झुक गया है। इसलिए मैंने यह फैसला लिया है। ’

रजनीकांत ने 31 दिसंबर 2017 को फैंस से भरे ऑडिटोरियम में राजनीति में एंट्री का ऐलान किया। तब उन्होंने कहा था, ‘पिछले एक साल में तमिलनाडु की राजनीति से लोगों का सिर शर्म से झुक गया है। इसलिए मैंने यह फैसला लिया है। ’

सवाल-4: क्या वाकई विजय की राजनीतिक सफलता से जलते हैं रजनीकांत?

जवाब: रजनीकांत ने सीएम विजय से प्रतिस्पर्धा की बात से इनकार किया है। उन्होंने 17 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस चुनाव के बाद विजय और मेरे रिश्ते को लेकर कई बातें हो रही हैं। अगर मैं इनका खंडन न करूं, तो ये बातें सच मानी जाएंगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रजनीकांत ने उनसे और विजय से जुड़े हर विवाद और हर सवाल पर अपनी बात रखी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रजनीकांत ने उनसे और विजय से जुड़े हर विवाद और हर सवाल पर अपनी बात रखी।

विजय से जलन पर कहा- कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं विजय से जलता हूं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। वो मुझसे 25 साल जूनियर हैं। मैं राजनीति छोड़ चुका हूं, तो विजय से मुझे भला क्यों जलन होगी। अगर मैं विजय से तुलना करूं तो मेरे लिए ये ठीक नहीं है। अगर विजय मुझसे तुलना करें तो वो उनके लिए ठीक नहीं है। मैं उन्हें तब से देख रहा हूं जब से वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी?’

स्टालिन से मिलने पर कहा- ‘यह सही है कि मैं स्टालिन से मिला था, लेकिन मैं राजनीति के लिए किसी भी हद तक गिरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। स्टालिन पिछले 30 साल से मेरे दोस्त हैं। हमारी दोस्ती राजनीति से परे है।’

विजय को CM बनने से रोकने पर कहा- ‘मैं स्टालिन से दोस्त के तौर पर मिला था। लेकिन खबरें आने लगीं कि दोनों पार्टियां (DMK-AIADMK) विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए बैठकें कर रही हैं और मैं उनमें शामिल रहा हूं। मैं आपको बता दूं कि रजनीकांत ऐसा शख्स नहीं है जो इतना नीचे गिर जाए।’

विजय से तुलना पर कहा- ‘जब मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो उनसे मेरी तुलना करना गलत है। उनके और मेरे बीच एक जेनरेशन गैप है। अगर मैंने 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ा होता, तो मैं जरूर जीत जाता। मुझे उनकी जीत पर अचंभा हुआ। मैं उनकी जीत को लेकर खुश हुआ। लोगों को विजय से काफी उम्मीदें हैं और मुझे आशा है कि वो इन्हें पूरा करेंगे।’ ’

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रजनीकांत ने विजय को चुनाव जीतने की बधाई दी थी। फिलहाल वो राजनीति में नहीं है, इसलिए जलन वाली बात सही नहीं लगती। रजनीकांत ने मुस्कुराते हुए ये जरूर कहा- ‘मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो विजय से जलूं क्यों? हां, अगर कमल हासन सीएम बनते तो जरूर जलता।’

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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास

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