स्टेट जीएसटी विभाग की टीमों ने अजमेर में टैक्स चोरी का खुलासा किया। अजमेर में अरमान मोबाइल एसेसरीज कारोबारी के यहां सर्च ऑपरेशन में करोड़ों रुपए के फर्जी लेनदेन और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) गड़बड़ी सामने आई। उपायुक्त (प्रशासन) चंदन सिंह शेखावत ने बताया कि अजमेर का मोबाइल एसेसरीज कारोबारी लंबे समय से विभाग की निगरानी में था। जांच में सामने आया कि कारोबारी ने अपने दो बड़े शोरूम और कर्मचारियों के नाम पर अलग-अलग क्रेता-विक्रेता फमें बना रखी थीं। इन फमों के जरिए खरीद-बिक्री और बिलिंग का ऐसा नेटवर्क तैयार किया गया, जिससे फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा लेकर सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान की आशंका है। प्रारंभिक जांच में 2 से 3 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी सामने आने की संभावना जताई गई है। कारोबारी ने मौके पर 27 लाख रुपए जमा करवाए। जांच में यह भी सामने आया कि माल और बिलिंग का वास्तविक प्रवाह अलग-अलग फर्मों के जरिए घुमाया जा रहा था, ताकि टैक्स देनदारी कम दिखाई जा सके। नेटवर्क ट्रैक कर पकड़ी सर्कुलर ट्रेडिंग जीएसटी विभाग ने कार्रवाई में डेटा एनालिटिक्स और सर्कुलर ट्रेडिंग तकनीक का उपयोग किया। सर्कुलर ट्रेडिंग में एक ही माल को कई फर्मों के बीच कागजों में बार-बार खरीदा और बेचा जाता है। उदाहरण के तौर पर ए ने बी से माल खरीदा, बी ने सी से, सी ने डी से और डी ने वही माल फिर ए को बेच दिया। इस प्रक्रिया में असली व्यापार कम और कागजी बिलिंग ज्यादा होती है। फर्मों के बीच पैसा घूमता रहता है और फर्जी आईटीसी के जरिए टैक्स देनदारी कम दिखाई जाती है। विभाग ने डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध लेनदेन पकड़कर फर्मों के नेटवर्क को ट्रैक किया।
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