‘IPS पूरन सिंह 5 दिन तक करीब-करीब किडनैप रहे। ये किडनैपिंग पुलिस के हाथों हुई। उन्हें पुलिस ने शराब व्यापारियों से वसूली के आरोप में पूछताछ के लिए उठाया और ह्यूमिलेट किया। गुनाह कबूलने का दबाव डाला। फिर पुलिस ने इस गैरकानूनी हिरासत के सबूत भी मिटा दि
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‘थाने से उन 5 दिनों की सीसीटीवी फुटेज आज भी गायब है। पूरन को इस दौरान न किसी से मिलने दिया और न बात करने दी। कोई नहीं जानता कि उन्हें कहां रखा गया था।’
हरियाणा के सीनियर IPS वाई पूरन कुमार के सुसाइड करने से पहले क्या-क्या हुआ, उसे लेकर एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी ये दावे कर रहे हैं। उनका ये भी आरोप है कि इस कथित किडनैपिंग को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि रोहतक SP नरेंद्र बिजराणिया हैं। IPS पूरन ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ में अपने घर पर गोली मारकर सुसाइड कर लिया था।
इसके पहले उन्होंने पत्नी IAS अफसर अमनीत पी. कुमार को आखिरी नोट भेजा था। उसने 8 पन्ने की नोट में अपनी मौत के लिए 15 अफसरों को जिम्मेदार ठहराया। चंडीगढ़ पुलिस ने नोट के आधार पर DGP शत्रुजीत कपूर समेत 15 अफसरों पर केस दर्ज किया है।
पूरन कुमार की खुदकुशी के 7 दिन बाद 14 अक्टूबर को रोहतक में साइबर सेल में तैनात ASI संदीप कुमार ने भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। अपने आखिरी वीडियो में संदीप ने आरोप लगाया कि IPS पूरन कुमार ने करप्शन केस में बदनामी के डर से सुसाइड किया है।
15 अक्टूबर को पत्नी अमनीत की लिखित इजाजत के बाद IPS पूरन कुमार का पोस्टमॉर्टम हो सका और फिर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
IPS पूरन कुमार के साथ आखिर क्या हुआ, सुसाइड नोट में लगाए आरोपों की सच्चाई क्या है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने पूरन कुमार को करीब से जानने वाले और हाल ही में उनके परिवार से मिले कुछ प्रशासनिक अधिकारियों से बात की।
अफसर ने सुसाइड नोट में लगाए आरोपों की हकीकत बताई… सीनियर प्रशासनिक अधिकारी बताते हैं, ‘IPS पूरन कुमार के साथ इमोशनल, सोशल और इकोनॉमिक हर तरह का अत्याचार किया गया। पूरन ही नहीं कोई भी इलीट, अंग्रेजी बोलता और तेज दिमाग वाला दलित अधिकारी सबकी आंखों में चुभता है। पूरन शार्प और हाजिर जवाब अधिकारी थे। उन पर जब आरोप लगाए गए, वो झुकने की जगह अकड़ कर खड़े हुए। बस उनके यही तेवर अफसरों को चुभ गए।‘
1. पांच दिन की हिरासत में ह्यूमिलेशन, फिर मीडिया ट्रायल की साजिश एक इतने बड़े अधिकारी को 5 दिन की हिरासत में रखने के आरोप लग रहे हैं, जबकि उनकी पत्नी भी IAS हैं। इस मामले को पूरन कुमार ने दबाया क्यों? सोर्स कहते हैं, ‘जितनी बड़ी इज्जत, उतनी बड़ी बेइज्जती। पूरन पर बड़ा आरोप लगा था। पत्नी पर भी डिपार्टमेंटल कई केस हैं। ऐसा नहीं कि वो ये शिकायत लेकर DGP या फिर सरकार के पास नहीं गए लेकिन उन्हें कहीं से कोई मदद नहीं मिली।’
पूरन के खिलाफ जो लॉबी है, वो बहुत मजबूत है। या यूं कहें कि ऐसे दलित अफसर जो झुकते नहीं, उनके खिलाफ मजबूत लॉबी ही होती है। उन्हें झुकाने के लिए उन पर कई आरोप मढ़ दिए जाते हैं। कुछ इन आरोपों से डरकर झुक जाते हैं तो कुछ नप जाते हैं।

‘उन पर शराब कारोबारियों से उगाही करने का आरोप था। मैं नहीं जानता ये सच था या झूठ लेकिन डिपार्टमेंट में उनके खिलाफ अगर कोई जांच चल रही थी तो सवाल उठता है कि मीडिया में इसे क्यों लीक किया गया? फिर जहां उन्हें 5 दिन की हिरासत में रखा गया, वहां के सीसीटीवी कैमरों से उन दिनों के फुटेज क्यों गायब हुई। मुझे थोड़ा बहुत याद है कि पूरन ने फुटेज निकलवाने की कोशिश की थी लेकिन नहीं मिली। उनकी हिरासत के सबूत मिटाने की जरूरत क्यों पड़ी?’
‘तीसरा और सबसे अहम सवाल ये है कि सेक्शन-17 ए के तहत ऐसी किसी भी जांच के लिए संबंधित अधिकारी को सरकार और DGP से फॉर्मल परमिशन लेनी चाहिए लेकिन ये परमिशन क्यों नहीं ली गई। यही वजह है कि उनकी हिरासत के सबूत मिटा दिए गए। हिरासत में पूरन पर आरोप कबूल करने का दबाव डाला गया। जाति संबंधी कमेंट तो हर बार किए जाते हैं।’
2. अंबाला थाने में मंदिर में दाखिल होने पर मिला नोटिस IPS पूरन ने सुसाइड नोट में मंदिर में एंट्री को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया है। ये क्या घटना थी? सोर्स ने बताया, ‘2020 में पूरन कुमार अंबाला थाने के मंदिर के अंदर गए। जैसे हर व्यक्ति को मंदिर जाने का अधिकार होता, उसी अधिकार के तहत पूरन भी गए। हालांकि यहां असमान्य ये हुआ कि उन्हें इसके बदले नोटिस मिल गया।’
‘नोटिस में सीधे तौर पर क्या लिखा था ये तो याद नहीं है लेकिन कुछ अनुशासन से संबंधित था। क्योंकि पूरन खुद कानून के अच्छे जानकार थे। इसलिए नोटिस का जवाब उन्होंने खुद ही दिया था। नोटिस उस वक्त DGP रहे मनोज यादव ने भेजा था।’
ये सीधा भेदभाव का मामला था। SC-ST एक्ट का मामला बनता है। इसकी शिकायत पूरन कुमार ने ऊपर क्यों नहीं की? अधिकारी आरोपी लगाते हुए कहते हैं, ‘DGP जब खुद भेदभाव कर रहा है तो शिकायत कितनी भी ऊपर जाए, उसका नतीजा शून्य ही रहता है। हालांकि मैं भरोसे से नहीं कह सकता कि उन्होंने शिकायत नहीं की होगी? उन्होंने इन सब मामलों में कई शिकायतें की थीं। अगर कोई पता लगा पाए तो ढेरों शिकायतें सामने आएंगी।’

3. ऐसी पोस्ट दी गई ताकि ह्यूमिलेशन हो सके पूरन कुमार ADGP थे, फिर उन्होंने सुसाइड नोट में ये क्यों लिखा कि उन्हें नॉन एग्जिस्टेंशियल पोस्ट मिली? जवाब में अधिकारी कहते हैं, ‘आप जर्नलिस्ट हैं। ये सबको पता है, लेकिन अपनी पोस्ट की बारीकी कोई जर्नलिस्ट ही समझ सकता है। वैसे ही पूरन ADGP थे लेकिन उन्हें जो नियुक्ति मिली थी वो IG होमगार्ड की थी।’
‘पूरन चाहते थे कि उन्हें उनके कॉडर के हिसाब से पोस्ट मिले लेकिन उन्हें ह्ययूमिलेट करने के लिए पद के हिसाब से पोस्ट न देकर वो पोस्ट दी गई, जो प्रशासनिक सेवा में बहुत रुतबे वाली नहीं मानी जाती है। इस वक्त तो उन्हें पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में डाल दिया गया था। वैसे भी अच्छी, मलाईदार और रुतबे वाली पोजीशन उन्हें ही मिलती है, जो सरकार और बॉस के चहेते होते हैं।’
29 सितंबर, 2025 को उनकी पनिशमेंट पोस्टिंग हुई। IG रोहतक के पद से हटाकर इन्हें पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज सुनारिया भेज दिया गया। सोर्स के मुताबिक, पूरन कुमार को मिला ये ट्रांसफर एक तरह से पनिशमेंट थी। सबको पता है कि IG के पद से हटाकर ट्रेनिंग में लगाना यही होता है।’

पूरन कुमार के आरोपों के बाद DGP शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया गया, उनकी जगह पर हरियाणा में DGP का अतिरिक्त चार्ज ओम प्रकाश सिंह को सौंपा गया है।
4. अफसरों ने पब्लिकली किए जातिगत कमेंट प्रशासनिक सोर्स बताते हैं, ‘जाति पर आधारित कमेंट सीधे नहीं किए जाते। इनका तरीका कुछ ऐसा होता है कि आप शिकायत भी न कर पाएं और कमेंट भी हो जाए। ज्यादातर दलित अधिकारियों को इसका अनुभव होगा।’
‘IPS पूरन के मामले में कई बार काम को लेकर चर्चा के दौरान उन्हें नीचा दिखाने के लिए व्यंग्य में पूछा गया- पढ़ाई कहां से की है? अपनी बिरादरी से ऊपर उठो या कौन सी बिरादरी से हो? किसी दलित के केस को दलित अधिकारी के सामने ही डिस्कस करना और फिर कहना कि इन लोगों के साथ यही तो दिक्कत है, वगैरह-वगैरह। कोई दलित अधिकारी जब कुछ कहता है, तो कह देंगे यार मजाक नहीं समझते क्या?’
5. तीन बैचमेट और उनके लीडर पूर्व मनोज यादव पर प्रताड़ना आरोप सीनियर अधिकारी बताते हैं, ‘ADGP पूरन कुमार ने अपने नोट में मनोज यादव, IPS (1988 बैच) और तत्कालीन DGP हरियाणा पीके अग्रवाल, IPS (1988 बैच) और तत्कालीन DGP हरियाणा टीवीएसएन प्रसाद, IAS (1988 बैच) तत्कालीन ACS गृह पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने साफ लिखा है कि मनोज यादव प्रमुख साजिशकर्ता थे और बाकी बैचमेट होने का फर्ज निभा रहे थे।

पूरन कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार 8 अक्टूबर को जापान से लौटी थीं और उन्होंने पोस्टमॉर्टम से इनकार कर दिया था और मामले की पुलिस में शिकायत की थी।
6. उनके खिलाफ कई झूठी कम्प्लेन हुईं, आपको कुछ पता हैं? डिपार्टमेंटल कम्प्लेन कुछ न कुछ सब पर होती हैं लेकिन पूरन पर कई थीं। ये बहुत बड़े आरोप नहीं होते। ज्यादातर अनुशासनहीनता के आरोप होते हैं लेकिन स्पेसिफिक कम्प्लेन के बारे में बिना डॉक्यूमेंट देखे कहना ठीक नहीं है।
सोर्स आगे कहते हैं, ‘अभी ताजा मामला 6 अक्टूबर का है, जब पूरन के गनमैन के खिलाफ FIR हुई।‘
इसमें पूरन के खिलाफ शराब व्यापारियों से पैसा उगाही करने के आरोप लगे। उनके गनमैन के खिलाफ 6 अक्टूबर को हरियाणा के अर्बन थाना स्टेट में FIR की गई। सोर्स की मानें तो गनमैन ने पूछताछ में पूरन का नाम ले लिया था और यहीं से तनाव बढ़ गया।

‘पूरन ने DGP शत्रुजीत कपूर को फोन किया। फोन उठा भी लेकिन उधर से मदद मिलने की जगह गोलमोल जवाब मिला। फिर पूनम कुमार ने SP नरेंद्र बिजराणिया को फोन किया लेकिन वहां से तो कई कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठा। ये सब कुछ जानबूझकर हुआ।’
7. पिता की मौत पर भी छुट्टी नहीं मिली तब ACS गृह रहे संजीव अरोड़ा पर पूरन कुमार ने पिता के निधन से पहले उनसे आखिरी बार मिलने की भी छुट्टी न देने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है- ‘ये मेरी अर्न्ड लीव थी। इस घटना ने मुझे तोड़ दिया था।’ इस पर सोर्स बताते हैं, ‘उनके पिता की डेथ शायद 2021 में हुई थी। ये ठीक उससे पहले की बात है। इस बारे में पूरन ने उस वक्त मुख्य सचिव को लिखित में शिकायत भी की थी लेकिन संजीव अरोड़ा के खिलाफ कुछ नहीं हुआ।’
8. नोट में मकान अलॉटमेंट को लेकर एडिश्नल कंडीशन का जिक्र है, ये क्या था? सोर्स ने इसका जवाब नहीं दिया क्योंकि उनके पास इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं थी।

15 अक्टूबर को दोपहर एम्बुलेंस पूरन कुमार की डेडबॉडी लेकर चंडीगढ़ PGI से उनकी कोठी के लिए निकली, जहां लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
9. शिकायतों पर गृहमंत्री ने की थी बैठक, डॉक्यूमेंट में दर्ज पूरन कुमार ने नोट में लिखा है कि उस वक्त राज्य के गृहमंत्री रहे अनिल बिज ने मेरे सभी आवेदनों और शिकायतों पर नवंबर 2023 में बैठक की थी। इसमें DGP शत्रुजीत कपूर और ACS होम टीवीएसएन प्रसाद भी थे। हमने सोर्स से जब इस बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘बैठक हुई थी। शिकायतों पर चर्चा भी हुई थी लेकिन कुछ हुआ नहीं था। इससे भी पूरन काफी आहत थे।’
‘उन्हें उम्मीद थी कि गृहमंत्री की बैठक के बाद उनकी शिकायतों पर कार्रवाई होगी लेकिन बैठक के बाद चर्चा तक नहीं हुई।’
10. बैठक या उसके बाद एक अधिकारी ने उनका सार्वजनिक मजाक उड़ाया हमने सोर्स से पूछा कि सुसाइड नोट में लिखा है कि 1996 के IPS अधिकारी रवि किरण ने पूरन का सार्वजनिक तौर पर मजाक उड़ाया था। ये कब हुआ था? वो जवाब में कहते हैं, ‘शायद गृहमंत्री की बैठक के बाद लेकिन ठीक से नहीं पता।’

DGP पर भी करप्शन के आरोप, दलित अफसर को घेरा-कपूर को बचाया सोर्स ने बताया कि पूरन पर करप्शन का आरोप भी लगा लेकिन साबित नहीं हुआ। जांच होने में कोई बुराई नहीं लेकिन जांच सबकी हो और प्रोसेस के साथ हो। शत्रुजीत कपूर के खिलाफ भी करप्शन का एक केस सामने आया लेकिन उन्होंने सरकार से एफिडेविट बनवाकर जमा कर दिया कि उनके खिलाफ प्राथमिक जांच के लिए भी सरकार से परमिशन लेनी होगी। उन्हें ये प्रोटेक्शन क्यों?
वे आगे कहते हैं, ‘क्योंकि पूरन दलित थे इसलिए उन्हें आरोप लगने पर ही हिरासत में ले लिया गया। सबूत तक मिटा दिए गए कि मामला क्या था? शत्रुजीत कपूर पर बिजली विभाग में टेंडर पास करने में 25 लाख रुपए के करप्शन का आरोप लगा था। ऑल इंडिया इंजीनियर्स एसोसिएशन ने शिकायत भी की थी लेकिन सब अंदर ही अंदर खत्म कर दिया गया।‘
वे बात खत्म करते हुए आखिर में कहते हैं, ‘दलित अफसर का मुंह बंद करने का जरिया सिर्फ ये है कि उस पर आरोप मढ़ दो। एक नहीं कई अधिकारी मिलेंगे, जिन पर आरोपों की लंबी लिस्ट है। उन्हें पता है कि वो अगर बोलेंगे तो उनकी सुनी नहीं जाएगी। पूरन साहसी थे इसलिए बोलते थे लेकिन प्रताड़ना का क्या स्तर रहा होगा जो आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। शायद अब कोई दलित अधिकारी सवाल पूछने की हिम्मत भी न करे।’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने IPS के परिवार से मुलाकात कर आरोप लगाते हुए कहा था कि हरियाणा सरकार तमाशा बंद कर दे। परिवार पर प्रेशर डाला जा रहा है।
IPS पूरन के गनमैन को अरेस्ट करने वाले ASI ने भी किया सुसाइड IPS वाई पूरन कुमार की मौत के 7 दिन बाद रोहतक पुलिस के साइबर सेल में तैनात ASI संदीप लाठर ने भी सुसाइड कर लिया। उन्होंने अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मारकर जान दे दी। सुसाइड से पहले संदीप लाठर ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया और 4 पेज का एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें IPS वाई पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए है।
रिश्वत केस में पूरन कुमार के गनमैन (PSO) सुशील कुमार को हिरासत में लेने वाली टीम में संदीप लाठर भी शामिल था। चंडीगढ़ पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) टीम रिश्वत केस और सुशील की गिरफ्तारी से जुड़ी रोहतक पुलिस के सभी कर्मियों से पूछताछ कर रही है। टीम ने संदीप से भी पूछताछ की थी। …………….. ये खबर भी पढ़ें… CJI पर जूता फेंकने वाले वकील बोले- मुस्लिम पीटते थे

’90 के दशक की बात है। मेरी पत्नी मुरादाबाद की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थीं। हम वहीं रहते थे। माहौल ऐसा था कि अगर मुस्लिम कम्युनिटी के किसी व्यक्ति की बकरी से मेरी स्कूटर छू भी जाती तो वो मुझे उतारकर मारते-पीटते और पत्नी को उठा ले जाते। वहां ऐसा अक्सर होता था।’ जस्टिस बीआर गवई की तरफ जूता फेंकने वाले एडवोकेट राकेश किशोर अपनी जिंदगी से जुड़े इस किस्से से मुस्लिमों के प्रति अपनी सालों पुरानी नाराजगी जता देते हैं। पढ़िए पूरी खबर…
