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हाईकोर्ट पहुंचा पंचायत चुनाव में देरी का मामला: डिजास्टर एक्ट की आड़ में इलेक्शन टालने को चुनौती; याचिका में तय समय पर वोटिंग की मांग – Shimla News

हाईकोर्ट पहुंचा पंचायत चुनाव में देरी का मामला:  डिजास्टर एक्ट की आड़ में इलेक्शन टालने को चुनौती; याचिका में तय समय पर वोटिंग की मांग – Shimla News


हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में देरी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। उच्च न्यायालय के 2 एडवोकेट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी है। इसमें, अनिश्चितकाल तक डिजास्टर ग्राउंड पर चुनाव टालने की सरकार की मंशा को चुनौती दी गई है।

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दरअसल, मुख्य सचिव ने बीते 8 अक्टूबर को डिजास्टर एक्ट का हवाला देते हुए आपदा से हालात सामान्य होने के बाद पंचायत चुनाव कराने की बात कही है। इसके बाद, कैबिनेट ने भी चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इस प्रक्रिया में दो से ढाई महीने लग सकते हैं। इससे पंचायत चुनाव पर तलवार लटक गई है।

याचिकाकर्ता ने अदालत का हस्तक्षेप मांगा

इसे देखते हुए एडवोकेट दिक्कन कुमार ठाकुर और हैप्पी ठाकुर ने याचिका दायर की। उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप करके पूरे प्रदेश में तय समय पर पंचायती राज चुनाव कराने के निर्देश देने का आग्रह किया है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार और स्टेट इलेक्शन कमीशन ने संविधान के तहत तय समय सीमा में पंचायत चुनाव करवाने की कोई तैयारी नहीं की।

संविधान के अनुच्छेद 243-ई की अनुपालना का आग्रह

याचिका में कहा गया कि हिमाचल प्रदेश में पिछली पंचायत चुनाव प्रक्रिया दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच तीन चरणों में पूरी हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-ई के मुताबिक हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं हो सकता और मौजूदा जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव करवाना जरूरी है। मगर अब तक इलेक्शन कमीशन ने चुनाव का कार्यक्रम जारी नहीं किया और न ही तैयारी की है।

संविधान और कानून का हवाला

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं 120 और 160 का उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों में कहा गया है कि-

हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं होगा। स्टेट इलेक्शन कमीशन पर यह जिम्मेदारी है कि वह पंचायतों के चुनाव समय पर करवाए। सरकार किसी भी स्थिति में चुनाव को टाल नहीं सकती, जब तक कोई असाधारण परिस्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।

याचिकाकर्ताओं का कहना

दोनों एडवोकेट का कहना है कि यह याचिका किसी राजनीतिक या निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनहित में दायर की गई है। अगर समय पर चुनाव नहीं हुए, तो राज्य में पंचायत राज संस्थाएं अपनी वैधानिक स्थिति खो देंगी और लोकतांत्रिक शासन की जड़ें कमजोर होंगी।

दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित है चुनाव

हिमाचल की 3577 पंचायतों और 71 नगर निकायों में इसी साल चुनाव होने है। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। इलेक्शन कमीशन को इससे पहले हर हाल में चुनाव कराना है, यह संवैधानिक बाध्यता भी है। मगर जिस तरह के हालात बन रहे है, उसे देखते हुए ये चुनाव समय पर होते नजर नहीं आ रहे है।

स्टेट इलेक्शन कमीशन दिसंबर में चुनाव कराना चाह रहा है, क्योंकि जनवरी में शिमला, मंडी, लाहौल स्पीति, किन्नौर, कांगड़ा, कुल्लू और सिरमौर जिला के कई भागों में कई बार भारी बर्फबारी हो जाती है।

पंचायतों में पांच सीटों को चुनाव

पंचायतों में यह चुनाव पांच सीटों (प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए होने है, जबकि शहरी निकाय में वार्ड पार्षद के लिए वोटिंग होनी है। इसी तरह 71 नगर निकायों में पार्षद चुने जाएंगे।



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