नर्मदापुरम जिले के पिपरिया ब्लॉक में शिक्षक एरियर्स और छात्रवृत्ति राशि में गबन के मामले में डाटा एंट्री ऑपरेटर पर एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर लोक शिक्षण नर्मदापुरम के संयुक्त संचालक (जेडी) ने 9 दिसंबर को नया पत्र लिखा। जेडी मनीष वर्मा ने पत्र में
.
पत्र में स्पष्ट लिखा कि “वरिष्ठ अफसरों के निर्देशों की अवहेलना और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। बीईओ एसएल रघुवंशी ने कहा कि हमने एफआईआर के लिए 2 मई 2025 को सभी दस्तावेज थाना प्रभारी को दे दिए हैं।
तीन आदेशों के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं
ब्लॉक के शिक्षकों के एरियर्स और छात्रवृत्ति में लगभग 9 लाख रुपए का गबन हुआ था। ऑपरेटर कमलेश कुमार अहिरवार ने अपने रिश्तेदारों के खाते में राशि का भुगतान किया। अगस्त 2024 में एक ही खाते में बार-बार राशि जाने पर ट्रेजरी शाखा ने मामले को पकड़ा। जांच के बाद 7 मार्च 2025 को कलेक्टर कार्यालय और जेडी ने ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए। इसके बाद 24 अक्टूबर 2025 और तीसरी बार 9 दिसंबर 2025 को भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
मंगलवारा थाने में शुक्रवार तक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ किसी भी दस्तावेज की पेशकश नहीं की गई। पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारण बताकर उपस्थिति नहीं दी। अब 15 दिसंबर को विकासखंड शिक्षा अधिकारी और सेवा निवृत्त क्लर्क अनिल कुमार अग्रवाल जांच समिति के सामने पेश होंगे। मंगलवारा थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी ने कहा कि “हमें एफआईआर कराने के लिए बीईओ कार्यालय से फिलहाल कोई पत्र नहीं मिला है।”
बीईओ एसएल रघुवंशी ने कहा, “वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर हमने मार्च और 2 मई 2025 को थाना प्रभारी पिपरिया को पत्र लिखकर सभी दस्तावेज दे दिए। एफआईआर कराने में हम देरी नहीं कर रहे।”
अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल
शिक्षा विभाग ने 7 मार्च 2025 को कलेक्टर कार्यालय के पत्र के बाद ऑपरेटर पर एफआईआर कराने के निर्देश दिए थे। फिर 24 अक्टूबर और तीसरी बार 9 दिसंबर 2025 को भी आदेश जारी किए गए, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना क्यों कर रहे हैं।
पत्नी और रिश्तेदारों को राशि का भुगतान
जांच में पाया गया कि ऑपरेटर ने अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में छात्रवृत्ति और एरियर्स की राशि ट्रांसफर कराई। कुल गबन करीब 24 लाख रुपए का था, जिसमें ट्रेजरी जांच में 9,48,000 रुपए की पुष्टि हुई। जांच के दौरान ऑपरेटर ने कुछ राशि वापस करके अपनी गलती स्वीकार की। लेकिन कंप्यूटर ऑपरेटर पर एफआईआर अब तक नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेटर के पास मामले से जुड़े कई साक्ष्य हैं, जिनसे नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
वर्तमान और पूर्व बीईओ पर भी जांच
एरियर्स और छात्रवृत्ति राशि में गबन साल 2018 से 2024 तक हुआ। इस बीच दो पूर्व बीईओ और वर्तमान बीईओ पदस्थ रहे है। विभाग ने जांच में तीनों बीईओ के भी बयान लिए गए और विभागीय जांच भी हुई है।
