राकेश पचौरी | मथुरा1 मिनट पहले
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मथुरा के फरह स्थित पंडित दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, परखम में आयोजित 10 दिवसीय गौमय कला प्रशिक्षण वर्ग का समापन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मथुरा एसएसपी श्लोक कुमार पहुंचे, जहां उनका स्वागत व सम्मान केंद्र के पदाधिकारियों और शोधकर्ताओं द्वारा किया गया।
गोवंश संरक्षण और वैज्ञानिक जानकारी पर जोर
समापन कार्यक्रम के दौरान गौ विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को गौवंश के संरक्षण, पालन-पोषण एवं उनसे जुड़े उत्पादों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य समाज को यह जागरूक करना है कि गाय केवल धार्मिक महत्व की ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत उपयोगी है।

गोबर और गोमूत्र से उत्पाद निर्माण की विधि
कार्यक्रम में बताया गया कि 10 दिन तक चले इस प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिभागियों को गाय के गोबर और गोमूत्र से बनने वाले विभिन्न उत्पादों जैसे – दिये, अगरबत्ती, पेंट, खाद, साबुन आदि के निर्माण की विधि सिखाई गई। इन उत्पादों से न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव है।
रसायन-मुक्त खेती और स्वास्थ्य लाभ
शोधकर्ताओं ने इस दौरान गौ उत्पादों के फायदे और नुकसान पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि गोमय उत्पादों के उपयोग से रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा मिलता है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होते हैं। वहीं प्रतिभागियों को यह भी सिखाया गया कि किस प्रकार गौ माता के पालन-पोषण और देखभाल में वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन और अन्य लाभों में वृद्धि की जा सकती है।

आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
एसएसपी श्लोक कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को आत्मनिर्भरता और परंपरागत जीवनशैली से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में गोवंश से जुड़े अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।
प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र
समापन के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और सभी को गौ संरक्षण एवं गोमय उत्पादों के प्रचार-प्रसार का संकल्प दिलाया गया।
