छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण की गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रामीण सक्रिय हो गए हैं। कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुलंगी गांव के लोगों ने गांव की सीमा पर बोर्ड लगाकर पादरियों और मसीही समुदाय के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
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दरअसल, सुलंगी गांव में 16 परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया था। इनमें से 2 परिवार अब अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे ईसाई धर्म के विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध गांव के भोले-भाले लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने के तरीकों से है। अभी भी 14 परिवार दूसरे धर्म का पालन कर रहे हैं।
गांव में लगे बोर्ड पर पेसा अधिनियम 1996 का हवाला दिया गया है। नियम 4(घ) के तहत सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत संस्कृति के संरक्षण का अधिकार दिया गया है। ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
अब तक 9 गांवों ने ऐसे बोर्ड लगाए
कांकेर जिले में अब तक 9 गांवों ने ऐसे बोर्ड लगाए हैं। यह अभियान 2 अगस्त को कुड़ाल गांव से शुरू हुआ। इसके बाद जुनवानी, परवी, जनकपुर, हवेचुर, घोड़ागांव, घोटा, घोटिया और मुसुरपुट्टा में बोर्ड लगाए गए। सुलंगी में 7 सितंबर को बोर्ड लगाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रलोभन देकर आदिवासियों का धर्मांतरण कराना उनकी संस्कृति और परंपराओं के लिए खतरा है। इससे गांव का सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
