उज्जैन में शिप्रा नदी में कार हादसे के 68 घंटे बाद उन्हेल थाने में पदस्थ महिला कॉन्स्टेबल आरती पाल (38) का शव कार के अंदर मिला। रतलाम की रहने वाली आरती अपने भाई की सवा माह की रस्म में शामिल होने घर आई थीं और वापस ड्यूटी पर लौटते ही हादसे का शिकार हो
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आरती की मां शीला पाल ने बताया कि 5 सितंबर को उनकी बेटी घर पर थी। भाई की धूप ध्यान की रस्म के बाद सब मिलकर बैठे थे। आरती बोली थी कि 2 से 4 दिन में फिर आएगी। नवमी के दिन दादाजी के श्राद्ध में आने का भी वादा किया था। मां ने कहा- “पूरे परिवार में सात भाइयों की इकलौती बहन थी। हमेशा हंसती रहती थी। वह लड़की नहीं थी, हमारा बेटा थी।”
30 जुलाई को भाई का निधन, फिर बहन भी चली गई
आरती के बड़े भाई जितेंद्र पाल (45) का निधन बीमारी से 30 जुलाई को हुआ था। भाई के निधन के सवा माह बाद ही परिवार ने बेटी को भी खो दिया। 4 सितंबर को वह भाई की रस्म में शामिल होने घर आई थीं। 5 सितंबर को सुबह रस्म में रहीं और शाम को ड्यूटी पर लौट गईं। 6 सितंबर को हादसा हो गया।
घर की चौखट पर परिजनों के साथ गमगीन बैठी मां शीला पाल(साड़ी में)
पुलिस जॉब के प्रति समर्पित थी आरती
आरती ने 2012 में पुलिस विभाग ज्वाइन किया था। पहली पोस्टिंग उज्जैन के महाकाल थाने में मिली थी। पिछले 3-4 साल से उन्हेल थाने में पदस्थ थीं। उन्होंने शादी नहीं की थी और पूरी तरह नौकरी को समर्पित थीं। अंकल के बेटे गौरव ने बताया- “हम सात भाइयों की एकलौती बहन थीं। दीदी हमेशा हमारे लिए खड़ी रहती थीं।”

घर में बैठे परिजन।
परिवार में गहरा सदमा
रतलाम के अरिहंत परिसर में रहने वाले परिवार में पिता अशोक कुमार पाल (कलेक्ट्रेट से रिटायर्ड अधीक्षक), मां शीला पाल और छोटा भाई लोकेंद्र हैं। बड़े भाई जितेंद्र की मौत के बाद घर में भाभी नीतू और 12 साल का बेटा तव्य है। मकान भी पिता ने आरती के नाम कर रखा था। परिजनों ने कहा– “आरती सभी भाइयों की आंखों का तारा थी। मां और काकी में फर्क नहीं समझती थी। कभी मां को नहीं, काकी को सब बताती थी।”

आरती के मकान के बाहर चौखट पर पोते के साथ बैठी आरती की मां शीला पाल।
उज्जैन में होगा अंतिम संस्कार
68 घंटे बाद कार से शव मिलने पर आरती का शरीर पूरी तरह गल चुका था। शव उज्जैन के चिरायु हॉस्पिटल में रखा गया। बुधवार सुबह 9 बजे चिरायु हॉस्पिटल से अंतिम यात्रा निकलेगी और रामघाट पर अंतिम संस्कार होगा। रात में रतलाम से मां, परिजन और रिश्तेदार उज्जैन रवाना हुए।

रतलाम के अरिहंत परिसर में कॉन्स्टेबल आरती का घर।
