तस्वीर गरियाबंद जिले की है जहां 11 सितंबर को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।
छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर सोमवार सुबह से पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। अबूझमाड़ इलाके में दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में जवानों ने दो नक्सली को मार गिराया है। दोनों के शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। बस्तर IG पी सुंदर-राज ने मामले
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मुठभेड़ के बाद जवानों ने सर्चिंग के दौरान AK-47 राइफल, हथियार, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, माओवादी साहित्य, प्रचार-प्रसार सामग्री और दैनिक उपयोग की चीजें बरामद किया है। दरअसल, नारायणपुर के अबूझमाड़, महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर टीम निकली थी। फिलहाल, रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी है।

जवानों ने कांकेर-महाराष्ट्र सीमा पर गढ़चिरौली जिले के गट्टा जाबिया में नक्सली सामग्री भी बरामद की।

सुरक्षा बलों ने मौके से एके47, राइफल और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की है। महिला नक्सलियों की पहचान नहीं हो पाई है।
4 दिन पहले 4 नक्सली मारे
इससे पहले, 18 सितंबर को बीजापुर में 2 और गढ़चिरौली में 2 महिला नक्सली मारे गए थे। खुफिया इनपुट पर जवानों ने ऑपरेशन चलाया गया। एनकाउंटर में गंगालूर एरिया मिलिट्री कमांड सदस्य रघु हपका (33) और पार्टी सदस्य सुक्कु हेमला (32) मारा गया था। रघु पर 5 लाख और सुक्कु पर 2 लाख का इनाम था।
गरियाबंद में 11 सितंबर को 10 नक्सली मारे गए
वहीं गरियाबंद जिले में 11 सितंबर को जवानों ने एनकाउंटर में 5 करोड़ के 10 इनामी नक्सलियों को मार गिराया था। इसमें डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली मोडेम बालाकृष्ण भी मारा गया। मोडेम बालाकृष्ण ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। मामला मैनपुर थाना क्षेत्र के मटाल पहाड़ी में मुठभेड़ हुई।
मारे गए नक्सलियों में 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। मारे गए नक्सलियों में केंद्रीय समिति के सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्ण, ओडिशा राज्य समिति के सदस्य प्रमोद उर्फ पांडु, ओडिशा राज्य समिति के सदस्य विमल उर्फ मंगना समीर और पीपीसीएम रजीता शामिल थे।
इसके साथ ही टेक्निकल टीम PPCM अंजली, SDK ACM सीमा उर्फ भीमे, ACM विक्रम, डिप्टी कमांडर उमेश और बीबीएम डिवीजन PM बिमला शामिल थे। इनपर छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सरकार ने 5 करोड़ 22 लाख का इनाम घोषित किया था।
एनकाउंटर के बाद की ये तस्वीरें देखिए…

गरियाबंद में हेलीकॉप्टर से लाए गए नक्सलियों के शव को पिकअप में लोडकर अस्पताल लाया गया।

गरियाबंद में जवानों ने 10 नक्सलियों को जंगल में घेरकर मारा। सभी के शव बरामद।

गरियाबंद में मारे गए सभी नक्सलियों के शवों को रक्षित केंद्र में रखा गया है।
पांव पसारने से पहले नक्सलियों का खात्मा- एडीजी
एडीजी एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने बताया था कि नए जगह पांव पसारने से पहले नक्सलियों का खात्मा कर दिया गया। बड़े नक्सल नेटवर्क को तोड़ा गया। जवानों ने जंगल में घेरकर नक्सलियों को मारा। सभी इनामी नक्सली थे।
एडीजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया था कि ने बताया कि एके-47 राइफल 1, इंसास राइफल 2, SLR राइफल 1, टेटे कार्बन 1, शॉट 2, 12 बोर बंदूक 2, पिस्टल 1 और बड़ी संख्या में विस्फोटक सामग्री बरामद किए गए हैं।
वहीं रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा था कि जवानों ने इसी जगह पर कहा था कि शस्त्र पूजन से पहले रक्त पूजन करेंगे, उन्होंने कर दिखाया। एसपी निखिल राखेचा ने कहा कि 8 माह पहले हमने सरेंडर की अपील की थी। अब भी कह रहे हैं कि मूल रास्ते से भटके लोग सरेंडर नीति के तहत मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं।

अब पढ़िए गरियाबंद नक्सल एनकाउंटर की कहानी ?
दरअसल, मारे गए नक्सली मोडेम बालकृष्ण के गार्ड कैलाश ने सरेंडर किया था। इसी से पुलिस को मोडेम के बारे में सीक्रेट जानकारी मिली। कैलाश के बताए ठिकानों में पुलिस ने नजर रखना शुरू किया। लोकेशन कन्फर्म होते ही जवानों की टीम गुरुवार सुबह मैनपुर के कुल्हाड़ी घाट पहुंची।
इस दौरान कुल्हाड़ी घाट से लगे पहाड़ी इलाके मटाल में जवानों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। एनकाउंटर में सेंट्रल कमेटी सदस्य मनोज उर्फ बालन्ना उर्फ मोडेम बालकृष्ण अपने 9 साथियों के साथ मारा गया। एसपी निखिल राखेचा ने इसकी पुष्टि की है।

ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था बालाकृष्ण
गरियाबंद पुलिस ने गुरुवार को मैनपुर के कुल्हाड़ी घाट से लगे पहाड़ी इलाके मटाल में संयुक्त ऑपरेशन चलाया। सुबह से रुक-रुककर कई घंटे तक मुठभेड़ चली। एनकाउंटर में सेंट्रल कमेटी सदस्य मनोज उर्फ बालन्ना उर्फ मोडेम बालाकृष्ण अपने 9 साथियों के साथ मारा गया। बालाकृष्ण के पास ओडिशा राज्य कमेटी के सचिव की भी जिम्मेदारी थी।
चलपति के मारे जाने के बाद बालाकृष्ण को मिली थी जिम्मेदारी
14 जनवरी को चलपति समेत 16 नक्सलियों के ढेर होने के बाद धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन कमेटी को विस्तार करने की जिम्मेदारी बालाकृष्ण को दी गई थी। यह सूचना पुलिस तक आ चुकी थी। बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद एसपी निखिल राखेचा ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था।
अब पढ़िए बालाकृष्ण तक कैसे पहुंची पुलिस ?
मोडेम 25 साल से सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच रहा था। एजेंसियों के पास बालकृष्ण के जवानी की तस्वीर भर थी। 15 दिन पहले ही मोडेम बालकृष्ण के गार्ड कैलाश नाम के नक्सली ने सरेंडर किया था। उसी से कुख्यात नक्सली मोडेम के बारे में एजेंसी को कई पुख्ता जानकारियां मिलीं।
पुलिस के मुताबिक मोडेम बालाकृष्ण कई साल से शुगर की बीमारी से जूझ रहा था। उसके सिर के बाल झड़ गए हैं। उसे चलने के लिए 2 लाठियों का सहारा लेना पड़ता था।



गरियाबंद में जनवरी में 16 नक्सली मारे गए थे
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में इसी साल 14 जनवरी को करीब 80 घंटे तक चले ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें से 12 नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
मारे गए नक्सलियों में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर चलपति भी था। चलपति पर 90 लाख का इनाम था। वहीं नुआपड़ा-गरियाबंद-धमतरी डिवीजन कमेटी का प्रमुख सत्यम गावड़े भी एनकाउंटर में मारा गया था।
यह पहला मौका था जब छत्तीसगढ़ में किसी मुठभेड़ में सेंट्रल कमेटी का सदस्य मारा गया। चलपति ऊर्फ अप्पा राव गरियाबंद के भालूडिग्गी इलाके से ही 3 राज्यों में नक्सल एक्टिविटी को कंट्रोल करता था।
जानिए कौन-कौन मारा गया, उन पर कितना था इनाम

अब चलपति के बारे में जानिए
आंध्र प्रदेश का रहने वाला था जयराम उर्फ चलपति
जयराम रेड्डी उर्फ रामाचंद्रा रेड्डी उर्फ अप्पाराव उर्फ रामू आंध्र प्रदेश के चित्तूर के माटेमपल्ली का रहने वाला था। इसकी उम्र करीब 60 साल थी। इसने 10वीं तक की पढ़ाई की थी। वह सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) कैडर का था। चलपति बस्तर के अबूझमाड़ इलाके में भी सक्रिय था। AK-47, SLR जैसी राइफल रखता था।
इसकी सुरक्षा में भी करीब 8 से 10 गार्ड रहते थे। अबूझमाड़ में लगातार हो रही मुठभेड़ के बाद कुछ इसने अपना ठिकाना बदल दिया और गरियाबंद-ओडिशा बॉर्डर पर चला गया था। यह नक्सल संगठन में फ्रंटलाइन का लीडर था।

नक्सल ऑपरेशन में मारा गया 90 लाख का इनामी नक्सली चलपति।

शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे।
वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं।
लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे
- इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था।
- 21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।
- छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।


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131 जवानों का हत्यारा देवजी बना नक्सल महासचिव।
आंध्रप्रदेश के खूंखार नक्सली बसवाराजू के मारे जाने के बाद नक्सल संगठन ने थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी को नया महासचिव नियुक्त किया है। देवजी बस्तर के 131 से ज्यादा जवानों का हत्यारा है। ताड़मेटला-रानीबोदली अटैक का मास्टरमाइंड है। नक्सल महासचिव देवजी पर 1 करोड़ से ज्यादा का इनाम है। पढ़ें पूरी खबर 2. गरियाबंद एनकाउंटर..मारे गए 3 करोड़ से ज्यादा के 16 नक्सली: यहीं से 3 राज्यों की नक्सल एक्टिविटी कंट्रोल करता था एक करोड़ का इनामी चलपति

इससे पहले गरियाबंद में 80 घंटे तक चले ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में मारे गए नक्सलियों की पहचान हो चुकी है। करीब 80 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए। इनमें से 12 नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था। मारे गए नक्सलियों में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर चलपति भी है। अकेले चलपति पर ही 90 लाख का इनाम था। पढ़ें पूरी खबर
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नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी अब सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने राजी। (फाइल फोटो)
नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी अब सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने राजी हो गई। CPI (माओवादी) ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि उनकी पार्टी फिलहाल अस्थायी तौर पर हथियारबंद संघर्ष को रोकने और शांति वार्ता के लिए तैयार है। संगठन ने साफ किया है कि वे सरकार से गंभीर और ईमानदार पहल की उम्मीद कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
