मुख्य बातें

एनएचएआई ने लोगों की जमीन हड़प कर सड़क बना दी क्या, डीसी खुद जांच कर रिपोर्ट दें: कोर्ट – Ranchi News

एनएचएआई ने लोगों की जमीन हड़प कर सड़क बना दी क्या, डीसी खुद जांच कर रिपोर्ट दें: कोर्ट – Ranchi News

झारखंड हाईकोर्ट ने एनएचएआई द्वारा बिना मुआवजा दिए रैयतों की जमीन पर सड़क बनाने के मामले को गंभीरता से लिया है। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने रांची-टाटा रोड के निर्माण से जुड़े एक मामले में रैयतों को मुआवजा नहीं मिलने के मामले की जांच का निर्देश दिया ह

.

अदालत ने रांची के उपायुक्त को इस मामले की जांच स्वयं करके एक माह में रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि रांची डीसी स्वयं स्थल पर जाकर मामले की जांच करें। रैयतों से बात करें और बताएं कि क्या एनएचएआई ने स्थानीय लोगों की जमीन हड़प कर सड़क का निर्माण किया है। उन्होंने डीसी को निर्देश दिया है कि वह स्थल का निरीक्षण करके प्रभावित पक्षों की शिकायतों को दूर करने का रास्ता भी बताएं।

मामले की सुनवाई के दौरान डीसी की ओर से दुर्गा पूजा सहित अन्य त्योहार में विधि-व्यवस्था में व्यस्त रहने का हवाला देते हुए जांच की अवधि को बढ़ाने की मांग की गई। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए एक माह में जांच कर अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि यदि किसी रैयत की जमीन का उपयोग किया गया है तो संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत प्रभावित रैयत को मुआवजा देना राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची (आदिवासी क्षेत्र) के अंतर्गत आता है, इसलिए उपायुक्त की भूमिका स्थानीय लोगों के अधिकारों के रक्षक के रूप में है। इसलिए डीसी पूरे मामले की स्वयं जांच करके रिपोर्ट दें।

एनएचएआई ने जमीन की मापी पर उठाए सवाल…

सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने अपनी गलती से पल्ला झाड़ लिया। एनएचएआई ने जमीन की मापी पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनकी उपस्थिति के बिना मापी की प्रक्रिया हुई। मुआवजा का भुगतान प्रशासन के माध्यम से किया जाता है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में यह स्वीकार किया गया कि जमीन का उपयोग उचित मुआवजा दिए बिना किया गया है। मालूम हो कि पूर्व में भी कई रैयतों ने जमीन का मुआवजा दिए बिना सड़क का निर्माण किए जाने का मामला अदालत के समक्ष लाया था। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को तलब किया था। अदालत ने एनएचएआई की दलील पर कड़ा ऐतराज जताते हुए फटकार भी लगाई थी।

शिक्षक नियुक्ति मामले में प्रार्थियों ने कैविएट लगाई

रांची | हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 2016 के मामले में कुछ प्रार्थियों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है। जिसमें प्रार्थियों की ओर से कहा गया है कि किसी फैसले के पूर्व उनका पक्ष सुना जाए। प्रार्थियों की ओर से यह कहा गया है कि मामले में एकल पीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से अपील दाखिल की गई है, इसलिए उनका पक्ष सुना जाए। जेएसएससी की ओर से वर्ष 2016 के शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मीना कुमारी एवं अन्य के मामले में एकल पीठ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आयोग ने एकल पीठ के आदेश को गलत बताया है। याचिका में कहा गया है कि प्रार्थी मीना कुमारी एवं अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ही मेरिट लिस्ट जारी की गई है। इसमें किसी तरह की त्रुटि नहीं है। झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने न्यायिक आयोग बनाने का भी आदेश दिया है, जो सही नहीं है। जबकि, प्रार्थियों ने इस मामले में फैसले से पूर्व पक्ष सुनने का आग्रह किया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *