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लंदन में गांधी प्रतिमा पर लिखा- गांधी-मोदी, हिंदुस्तानी टेररिस्ट: भारतीय हाई कमीशन ने कहा- यह बर्बरता नहीं, अहिंसा के सिद्धांत पर हमला

लंदन में गांधी प्रतिमा पर लिखा- गांधी-मोदी, हिंदुस्तानी टेररिस्ट:  भारतीय हाई कमीशन ने कहा- यह बर्बरता नहीं, अहिंसा के सिद्धांत पर हमला


लंदन21 घंटे पहले

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लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आपत्तिजनक बातें लिखी गईं।

लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटना सामने आई। उपद्रवियों ने सोमवार को प्रतिमा पर पेंट से गांधी, मोदी और हिंदुस्तानियों को आतंकी लिखा।

भारतीय उच्चायोग ने इस घटना पर नाराजगी जताई है। उच्चायोग ने कहा है कि यह सिर्फ प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के अहिंसा और शांतिपूर्ण विचारों पर भी हमला है।

उच्चायोग ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों को इस घटना की सूचना दी गई। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थानीय पुलिस घटना की जांच कर रही है।

उच्चायोग ने बयान में कहा,

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यह शर्मनाक घटना अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस से तीन दिन पहले हुई है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। हम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रतिमा की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।

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गांधी की यह प्रतिमा 1968 में बनी थी

महात्मा गांधी की इस प्रतिमा का निर्माण 1968 में हुआ। इसे प्रसिद्ध पोलिश-भारतीय प्रतिमाकार फ्रेडा ब्रिलियंट ने बनाया था। कांसे से बनी इस प्रतिमा को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के पास के उद्यान टैविस्टॉक स्क्वायर में लगाया गया है।

गांधी 1888-1891 के दौरान UCL में कानून के छात्र थे। यह प्रतिमा उनके लंदन में बिताए समय और उनकी वैश्विक विरासत को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाई गई।

इसमें गांधीजी को उनकी पारंपरिक धोती पहने हुए हुए दिखाया गया है, जो उनकी सादगी और अहिंसा के दर्शन को दर्शाता है। फ्रेडा ने प्रतिमा का डिजाइन गांधी के व्यक्तित्व और उनके शांतिपूर्ण स्वभाव को ध्यान में रखकर तैयार किया था।

हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर इस प्रतिमा के पास समारोह आयोजित किए जाते हैं। इसमें फूल चढ़ाना, भजन गायन और स्मृति सभाएं शामिल होती हैं।

इस साल जून में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन का दौरा किया था। इस दौरान सदस्यों ने टैविस्टॉक स्क्वायर में गांधी को श्रद्धांजलि दी थी।

इस साल जून में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन का दौरा किया था। इस दौरान सदस्यों ने टैविस्टॉक स्क्वायर में गांधी को श्रद्धांजलि दी थी।

पहले भी निशाना बन चुकी हैं गांधी की प्रतिमाएं

यह पहली बार नहीं है, जब गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाया गया है। दुनियाभर में उनकी प्रतिमाओं पर तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुई हैं।

साउथ अफ्रीका में 2003 (डर्बन) और 2015 (जोहान्सबर्ग) में प्रदर्शनकारियों ने गांधी को नस्लीय बताते हुए प्रतिमा हटाने की मांग की थी। इस दौरान #GandhiMustFall अभियान के तहत प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ भी की गई थी।

2020 में नीदरलैंड्स में विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी प्रतिमा पर लाल पेंट से रेसिस्ट यानी नस्लवादी लिखा गया था। 2021 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अनावरण के एक दिन बाद ही गांधी प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई थी।

2023 में कनाडा के बर्नाबी की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में गांधी की प्रतिमा तोड़ दी गई थी।

2023 में कनाडा के बर्नाबी की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में गांधी की प्रतिमा तोड़ दी गई थी।

ब्रिटेन में पहले भी हुईं भारत विरोधी घटनाएं

1. खालिस्तानियों ने भारतीय हाई कमीशन से तिरंगा उतारा

इस फुटेज में एक खालिस्तान समर्थक भारतीय झंडा उतारते दिख रहा है।

इस फुटेज में एक खालिस्तान समर्थक भारतीय झंडा उतारते दिख रहा है।

19 मार्च 2023 को लंदन में कुछ खालिस्तान समर्थकों ने भारतीय हाई कमीशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शनकारी उस वक्त भारत में खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस कार्रवाई का विरोध करने पहुंचे थे।

उन्होंने पहले हाई कमीशन के बाहर तोड़फोड़ की और बाद में यहां लगा तिरंगा उतार दिया। भारत ने इस पर सख्त एतराज जताया। दिल्ली में ब्रिटिश हाई कमिश्नर को तलब किया था।

2. मार्च 2025- जयशंकर की कार को खालिस्तानियों ने घेरा

लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की कार को घेर लिया था।

लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की कार को घेर लिया था।

इस साल मार्च में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिटेन का दौरा किया था। इस दौरान खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने चेथम हाउस के पास उनकी कार को घेरकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने झंडे और स्पीकर लेकर नारे लगाए थे।

उस प्रदर्शन के बाद भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि भारत लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग की निंदा करता है और उम्मीद करता है कि मेजबान देश ऐसे मामलों में अपने कूटनीतिक कर्तव्यों को पूरा करे।

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