ग्वालियर के जगनापुरा स्थित रामजानकी राधाकृष्ण मंदिर की करीब 19.10 बीघा जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ तक पहुंच गया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज एनके मोदी सहित छह लोगों को नोटिस जारी कर च
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राज्य शासन ने इस भूमि को लेकर रिट अपील दायर करते हुए कहा है कि यह जमीन मंदिर के नाम पर ‘माफी औकाफ’ श्रेणी में दर्ज है। इसलिए यह किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं हो सकती। शासन का तर्क है कि इसके बावजूद दो निजी पक्षों ने आपसी सहमति से इस जमीन का बंटवारा कर लिया, जो पूरी तरह अवैध है।
एकल पीठ ने नहीं सुना शासन को पक्ष
शासन ने कहा कि एकल पीठ ने बिना शासन का पक्ष सुने और बिना नोटिस जारी किए आदेश पारित कर दिया था, जो कानून की दृष्टि में त्रुटिपूर्ण है। इस पर न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक सभी पक्षों से जवाब मांगा है।
राजस्व मंडल में भी चल रहा विवाद
यह विवाद पहले राजस्व मंडल में विचाराधीन है। सेवानिवृत्त जज एनके मोदी ने मंडल में जवाब देते हुए कहा था कि जमीन मंदिर के नाम पर दर्ज है और इसका कोई व्यक्तिगत मालिक नहीं है। अन्य स्थानों पर दिए गए उनके जवाब और दावों में भी यही तथ्य उल्लेखित हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
मामले में सुप्रीम कोर्ट के ‘कंचनिया बनाम शिवराम’ केस के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि मंदिर की जमीन को किसी भी तरह से अंतरित (ट्रांसफर) करने या पट्टे पर देने का अधिकार पुजारी को नहीं होता।
लंबे समय से चल रहा है विवाद
जमीन को लेकर एनके मोदी और सर्वेश सिंह तोमर के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। बताया जाता है कि दोनों ने आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा कर लिया था, जबकि यह भूमि मंदिर की संपत्ति होने के कारण किसी के नाम नहीं की जा सकती।
